फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Scuba Diving: रोमांचक स्कूबा डाइविंग कहीं हो न जाए जानलेवा? ये लापरवाहियां बन सकती हैं मौत का कारण

Sat, 20 Sep 2025 05:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मशहूर हुए गायक जुबीन गर्ग का सिंगापुर में शुक्रवार (19 सितंबर) को निधन हो गया। वह स्कूबा डाइविंग कर रहे थे। इस हादसे के बाद से लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं? क्या स्कूबा डाइविंग करना सुरक्षित नहीं है, क्या ये जानलेवा हो सकती है?
विज्ञापन
1 of 5
स्कूबा डाइविंग और इसके खतरे - फोटो : Amarujala.com
साल 2006 में आई फिल्म 'गैंगस्टर' के 'या अली' गाने से मशहूर हुए गायक जुबीन गर्ग (52 वर्ष) का सिंगापुर में शुक्रवार (19 सितंबर) को निधन हो गया। वह स्कूबा डाइविंग कर रहे थे तभी हादसे का शिकार हो गए। सिंगापुर पुलिस ने उन्हें पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया, हालांकि डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए। शुक्रवार रात तक की रिपोर्ट्स में ये स्पष्ट नहीं हो पाया था कि आखिर स्कूबा डाइविंग के दौरान ऐसा क्या हुआ जिससे उनकी मौत हुई। 

इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, गर्ग बिना लाइफ जैकेट पहने तैराकी के लिए गए थे और लाइफ गार्ड ने उनसे लाइफ जैकेट पहनने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। 

इस हादसे के बाद से लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं? क्या स्कूबा डाइविंग करना सुरक्षित नहीं है, क्या ये जानलेवा हो सकती है और किन लोगों को स्कूबा डाइविंग नहीं करनी चाहिए, आइए इन सबके बारे में विस्तार से समझते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
स्कूबा डाइविंग के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
पहले ये जान लेते हैं कि स्कूबा डाइविंग है क्या?

स्कूबा डाइविंग एक ऐसी रोचक गतिविध है, जिसमें गोताखोर पानी के नीचे जाकर समुद्री जीवन और पानी के नीचे की दुनिया का अनुभव करते हैं। यह एक रोमांचक और अद्वितीय अनुभव होता है, जो आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। इसे बतौर शौक के लिए भी किया जाता रहा है।

इसके लिए ड्राइवर एक ऑक्सीजन भरा टैंक, मुंह पर रेगुलेटर, मास्क और लाइफ जैकेट पहनता है। डाइविंग से पहले ट्रेनिंग में सिखाया जाता है कि कैसे सांस लेना है, पानी में बैलेंस कैसे रखना है और पानी के ऊपर-नीचे सही तरीके से कैसे आना-जाना है?
विज्ञापन

3 of 5
जुबीन गर्ग की स्कूबा डाइविंग के दौरान गई जान - फोटो : एक्स
स्कूबा डाइविंग और इसके कारण मौत का खतरा

स्कूबा डाइविंग के कारण सालाना कितने लोगों की मौत हो जाती है, इसका स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। हालांकि हर साल दुनियाभर से इसके मौत के मामले सामने आते रहते हैं। ज्यादातर मामलों में देखा जाता रहा है कि मौत का कारण हवा खत्म हो जाना, दिल का दौरा या सांस से संबंधित अन्य समस्याएं होती हैं।

डाइविंग के दौरान सबसे बड़ा खतरा होता है- जल्दी ऊपर आना। जब आप गहराई से तेजी से सतह पर आते हैं, तो शरीर में फंसी गैस बुलबुले बनाती है। इससे डिकम्प्रेशन सिकनेस होती है, जिसके चलते सांस की तकलीफ और गंभीर मामलों में दिमाग या दिल पर असर हो सकता है।

4 of 5
स्कूबा डाइविंग और इससे मौत के मामले - फोटो : Freepik.com
स्कूबा डाइविंग के दौरान होने वाली दिक्कतें

स्कूबा डाइविंग के दौरान किन कारणों से मौतें होती हैं? इसे समझने के लिए विशेषज्ञों ने डाइविंग से संबंधित 126 मौतों के आंकड़ों का अध्ययन किया।

मृतकों की औसत आयु 44 वर्ष थी, इसमें 99 (79%) पीड़ित पुरुष थे वहीं 83 (77%) या तो अधिक वजन वाले या मोटे थे। इनमें कम से कम 52 (41%) नौसिखिए थे और 17 (13%) की मौत प्रशिक्षण या प्रारंभिक स्कूबा अनुभव के दौरान हुई। केवल 35 (28%) लोग घटना के समय किसी साथी के साथ थे।

हार्ट अटैक का हो सकता है खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि स्कूबा डाइविंग के दौरान दिल का दौरा पड़ने का खतरा रहता है क्योंकि डाइविंग के दौरान होने वाले शारीरिक तनाव, जैसे सेंट्रल ब्लड वॉल्यूम में बदलाव और ठंडा पानी हृदय प्रणाली पर अत्यधिक दबाव डालते हैं, जिससे रोगग्रस्त या पहले से कमजोर हृदय पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है।

वृद्ध लोग, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या मधुमेह जैसी बीमारियों के शिकार ड्राइवर्स के लिए ये जानलेवा हो सकती है। यही कारण है कि स्कूबा डाइविंग करने वाले किसी भी व्यक्ति को हृदय संबंधी स्वास्थ्य जांच के साथ कुछ अन्य नियमित चिकित्सा जांच कराने की भी सलाह दी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
स्कूबा डाइविंग से पहले हृदय स्वास्थ्य को लेकर बरतें सावधानियां - फोटो : Freepik.com
ये सावधानियां जरूरी

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जिनको पहले से दिल की बीमारी है, अस्थमा या फेफड़ों की गंभीर समस्या है, दौरे पड़ते हैं या फिर जिनकी हाल में सर्जरी हुई हो उन्हें डाइविंग न करने की सलाह दी जाती है। गर्भवती महिलाए या पैनिक डिसऑर्डर के शिकार लोगों को भी डाइविंग से बचना चाहिए।

विशेषज्ञों की सलाह है कि डाइविंग से पहले अच्छे से प्रशिक्षण ले लें और अच्छी स्वास्थ्य स्थिति वाले लोगों को ही डाइविंग के लिए जाना चाहिए।




----------------------------
नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें