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Coronavirus: वैक्सीन के आने के बाद भी मास्क पहनना होगा जरूरी, विशेषज्ञ ने बताई ये बड़ी वजह

Fri, 31 Jul 2020 05:47 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Vaccine - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। पूरी दुनिया को इस वक्त जिस बड़ी चीज का सबसे ज्यादा इंतजार है, वह है कोरोना की वैक्सीन। खबरों के मुताबिक, वर्तमान समय में कोरोना वायरस के लिए 150 से ज्यादा कैंडिडेट वैक्सीन उपलब्ध हैं। वैज्ञानिक, शोधकर्ता और चिकित्सा विशेषज्ञ वैक्सीन को जल्द से जल्द तैयार करने में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि 21 से ज्यादा वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल की फेज में हैं, जिनमें से पांच वैक्सीन तीसरे यानी आखिरी चरण में हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कोरोना का टीका हमारे लिए उपलब्ध होगा। लेकिन क्या यह काफी होगा?
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस के खिलाफ जो पांच संभावित वैक्सीन अंतिम चरण के ट्रायल में है, उनसे उम्मीदें बढ़ गई हैं। अंतिम चरण में अलग-अलग उम्र के लोगों पर वैक्सीन का प्रभाव देखा जाता है कि यह कितनी सुरक्षित और कारगर है। भारत में आईसीएमआर और भारत बायोटेक द्वारा निर्मित वैक्सीन COVAXIN के अलावा जायडस कैडिला की वैक्सीन भी ह्यूमन ट्रायल फेज में है। रूस, ब्रिटेन, अमेरिका, चीन और अन्य देश भी कई वैक्सीन को लेकर दावा कर रहे हैं। लेकिन सवाल वही है कि क्या वैक्सीन कोरोना से बचाने के लिए काफी होगी? 
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ऐसा कहना जल्दबाजी होगी कि वैक्सीन सुरक्षा देने के लिए काफी होगी - फोटो : Pixabay
  • साइंस इनसाइडर में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी कि वैक्सीन सुरक्षा देने के लिए काफी होगी। यह बात तो काफी लोग जानते हैं कि किसी भी बीमारी की वैक्सीन तैयार करने में सालों लग जाते हैं। कोरोना वायरस जिस तेजी से फैलता जा रहा है, आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है और इसी वजह से इस वायरस पर नियंत्रण के लिए जल्दबाजी में वैक्सीन तैयार की जा रही है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • ऐसे में वैज्ञानिक भी संशय में हैं कि हर भौगोलिक स्थिति और वातावरण में रहनेवाले सभी उम्र के लोगों के लिए कोरोना वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी को मज़बूत करने में पूरी तरह से असरदार हो। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतना जरूर है कि वैक्सीन कोरोना मरीज को दोबारा संक्रमित होने की संभावना को कम कर सकती है। यहां तक कि लक्षण भी नहीं बढ़ेंगे, लेकिन कोरोना वायरस के खिलाफ तुरंत और पूरी सुरक्षा प्रदान करने और संक्रमण से बचाने में यह कितनी कारगर होगी, यह कहना जल्दबाजी होगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, वैक्सीन के विकास के लिए सफलता दर 10 फीसदी रही है। कोरोना की वैक्सीन के लिए भी सुरक्षा, प्रभावकारिता, दुष्प्रभाव जैसे कई दृष्टिकोण जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अबतक उपलब्ध वैक्सीन का लक्ष्य कोरोना संक्रमण को रोकने में कम से कम 60 से 70 फीसदी कारगर और प्रभावकारी बनाने का है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
साइंस इंसाइडर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार,
  • बेयलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन में वैक्सीन विकसित करने वाली विशेषज्ञ मारिया एलेना बोट्टाती का कहना है, "जैसे ही आपको वैक्सीन मिल जाए, इसका ये मतलब कतई नहीं है कि आप अपना मास्क कचरे में फेंक सकते हैं। ऐसा होने वाला नहीं है। मुझे उम्मीद है कि लोग ये सोच कर नहीं बैठें कि वैक्सीन जादुई तरीके से वायरस का खतरा खत्म कर देगी। इसका मतलब यह होगा, कि हमें एक बेहतर वैक्सीन बनाने की जरूरत है, जो कोरोना वायरस संक्रमण को पूरी तरह से खत्म करे।" उन्होंने कहा कि इसमें काफी वक्त लगेगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना वायरस की वैक्सीन के आने का मतलब यह नहीं होगा कि महामारी से पहले वाला जीवन इतनी आसानी से वापस आ जाएगा। वैक्सीन के बावजूद हमें आपस में शारीरिक दूरी और स्वच्छता का पालन करना होगा। साथ ही मास्क पहनना जरूरी होगा। इन अभ्यासों के साथ ही वैक्सीन अपना काम प्रभावी ढंग से कर पाएगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वैक्सीन की प्रभावशीलता पर बहुत संदेह नहीं है। इस बात में तो कोई दो राय नहीं कि कोरोना की वैक्सीन न होने से बेहतर है, एक ऐसी वैक्सीन का होना, जो 60 फीसदी तक भी कारगर हो। ऐसी वैक्सीनों के जरिए हमें हर्ड इम्यूनिटी पाने में मदद मिलेगी। इसलिए मास्क का इस्तेमाल करते रहें। यह ज्यादा श्रेयस्कर रहेगा। 

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