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सावधान: ऐसे लोगों में विटामिन-डी की कमी का जोखिम होता है कई गुना अधिक, कहीं आप भी तो नहीं हैं इस ग्रुप में?

Sun, 03 Jul 2022 06:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विटामिन डी की कमी के कारण क्या हैं? - फोटो : Pixabay
शरीर की इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखने से लेकर हड्डियों को स्वस्थ रखने तक के लिए हमें नियमित रूप से विटामिन-डी वाली चीजों के सेवन की सलाह दी जाती है। शरीर में विटामिन-डी की ही मदद से ही कैल्शियम का अवशोषण हो पाता है। यही कारण है कि जिन लोगों में विटामिन-डी की कमी होती है उनमें हड्डियों से संबंधित कई तरह की समस्याएं बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सभी वयस्कों को प्रतिदिन 10-20 माइक्रोग्राम की मात्रा में इस विटामिन का सेवन अवश्य सुनिश्चित करना चाहिए। आप अपने आहार में कई चीजों जैसे मछली, मशरूम,दूध और अंडे को शामिल करके इसकी पूर्ति कर सकते हैं।

क्या आप जानते हैं कि कुछ लोगों में विटामिन-डी की कमी का जोखिम अधिक होता है? डॉक्टर्स कहते हैं, हमारे खान-पान और जीवनशैली की गड़बड़ आदतें शरीर में स्वाभिवक रूप से इस अति आवश्यक विटामिन की कमी का कारण बन सकती हैं।

कुछ अध्ययनों में तो यह भी बताया गया है कि ग्रामीण परिवेश की तुलना में शहरी वातावरण में रहने वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक होता है। आइए जानते हैं कैसे?
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विटामिन डी का होती है शरीर को जरूरत - फोटो : pixabay
विटामिन-डी क्यों जरूरी है?

विटामिन-डी की कमी बढ़ाने वाले कारकों के बारे में जानने से पहले आइए जानते हैं कि हमारे शरीर के लिए इसकी क्या आवश्यकता है? शोध बताते हैं कि विटामिन-डी कई तरह की स्वास्थ्य स्थितियों जैसे हड्डियों की माजबूती और मांसपेशियों की ताकत, कैंसर-हृदय रोग और टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती देने के लिए आवश्यक माना जाता है। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि विटामिन-डी कोलन, प्रोस्टेट और स्तन कैंसर के विकास को नियंत्रित करने में भी प्रभावी हो सकता है।
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विटामिन-डी को उचित मात्रा जरूरी - फोटो : Pixabay
किन लोगों में हो सकती है इसकी कमी?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ स्थितियों के चलते आपमें विटामिन-डी की कमी का खतरा हो सकता है। सबसे ज्यादा जोखिम उन लोगों में देखा गया है कि जिनके दिन का ज्यादातर समय बंद कमरे या ऑफिस में निकल जाता है और सूर्य के प्रकाश से संपर्क कम हो पाता है। इसके अलावा  जो लोग सनस्क्रीन का अत्यधिक उपयोग करते हैं, उनकी त्वचा भी विटामिन-डी को उचित मात्रा में अवशोषित नहीं कर पाती है।

असल में हमारे शरीर को आहार के अलावा सूर्य के प्रकाश के माध्यम से विटामिन-डी प्राप्त होता है, शरीर को पर्याप्त मात्रा में सूर्य का प्रकाश न मिल पाने के कारण इसकी कमी का जोखिम हो सकता है।

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विटामिन डी के लिए जरूरी है सूर्य की रोशनी - फोटो : iStock
सूर्य का प्रकाश और विटामिन-डी

अध्ययनों से पता चलता है कि सूर्य के प्रकाश के साथ त्वचा के रासायनिक प्रतिक्रिया की स्थिति में विटामिन-डी का निर्माण होता है। जब त्वचा सूरज के संपर्क में आती है तो 7-डीहाइड्रोकोलेस्ट्रोल नामक स्टेरॉयड का ब्रेक डाउन होता है जिससे विटामिन डी का निर्माण होता है। आहार के साथ-साथ सूरज के संपर्क में रहना भी विटामिन -डी के लिए काफी आवश्यक माना जाता है।
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विटामिन-डी वाले आहार का सेवन आवश्यक - फोटो : Pixabay
विटामिन-डी के लिए स्वस्थ आहार भी आवश्यक

विटामिन डी की कमी से मांसपेशियों में दर्द, थकान और गंभीर स्थितियों में अवसाद का कारण बन सकती है, इस तरह की समस्याओं से बचे रहने के लिए आहार में उन चीजों को जरूर शामिल करें जो इस विटामिन से भरपूर मानी जाती हैं। पालक, गोभी, सोयाबीन और सेम जैसी सब्जियों के साथ संतरे और केले खाने को फायदेमंद माना जाता है। मशरूम को इसके लिए सबसे बेहतर आहार माना जाता है।  


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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