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सेहत अलर्ट: बारिश के मौसम में होने वाले वायरल से कैसे बचें? ये सावधानियां बरतनी जरूरी

Sun, 27 Jun 2021 01:34 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Rajesh Mundeja 

डॉ राजेश मुंडेजा 
जनरल फिजीशियन, उजाला सिग्नस अस्पताल  
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम डी


बारिश के मौसम में तरह-तरह की बीमारियां शरीर पर हमला कर देती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि बारिश की वजह से कई जगहों पर जलभराव और गंदगी हो जाती है, जिससे मच्छर और खतरनाक बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं। पानी और हवा के जरिये ये बैक्टीरिया हमारे खाने तक और फिर शरीर तक पहुंचते हैं और हमें बुखार-फ्लू जैसी बीमारियां दे जाते हैं। हालांकि अगर थोड़ी सी भी सावधानी बरती जाए तो इस मौसम में होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। आमतौर पर डॉक्टर बारिश में होने वाली बीमारियों को तीन भागों में बांटते हैं, जिनमें वायरल बुखार और जुकाम, फ्लू (इंफ्लूएंजा) और मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियां (जैसे चिकनगुनिया और डेंगू) शामिल हैं। आइए जानते हैं इस बीमारियों के कारण होने वाली समस्याओं और बचाव के तरीकों के बारे में...  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
वायरल बुखार और जुकाम 
  • दरअसल, मौसम बदलने के साथ ही वातावरण में आए कीटाणुओं से होने वाले बुखार को वायरल बुखार कहते हैं। ये हवा और पानी के जरिये फैलते हैं और इंसान के शरीर तक पहुंच जाते हैं। इसमें बुखार तो होता ही है, इसके साथ ही कुछ लोगों में खांसी और जोड़ों में दर्द की समस्या भी हो सकती है। यह बुखार तीन से सात दिनों तक रह सकता है, इसलिए ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर से दिखा लेना उचित होता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वायरल बुखार से बचाव के तरीके क्या हैं? 
  • साफ-सफाई का ध्यान रखें 
  • खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह साबुन-पानी से धोएं 
  • डाइट अच्छी रखें यानी ताजा खाना और फल खाएं 
  • बाहर का खाना खाने से बचें  
  • बासी खाना भी न खाएं  
  • बारिश में न भीगें 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
फ्लू (इंफ्लूएंजा) 
  • बारिश के मौसम में फ्लू की समस्या खूब देखने को मिलती है, जिसे इंफ्लूएंजा भी कहते हैं। इसमें जुकाम, खांसी, तेज बुखार और जोड़ों में दर्द होता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कॉमन फ्लू 5-7 दिनों तक रहता है। हालांकि डॉक्टर की सलाह पर दवाई लेने से यह जल्दी ठीक हो जाता है। फिर भी कई लोगों को जुकाम और खांसी ठीक होने में 10-15 दिन लग जाते हैं। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
फ्लू से बचाव के तरीके क्या हैं?  
  • फ्लू से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन लगवा सकते हैं 
  • इस मौसम में भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, क्योंकि बीमार व्यक्ति के खांसने या छींकने से दूसरे लोग भी संक्रमित हो सकते हैं 
  • फ्लू की बीमारी छूने से भी फैलती है। जैसे किसी बीमारी व्यक्ति ने छींकते समय अपने मुंह पर हाथ रखा और फिर उसी हाथ कुछ छू लिया और उसे आपने भी छू लिया तो आपके भी बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। 
  • इसलिए मास्क पहनें, सुरक्षित शारीरिक दूरी रखें और बेवजह कोई भी चीज छूने बचें, इससे कोरोना से भी बचाव होगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियां 
  • बारिश के मौसम में मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों, जैसे डेंगू और चिकनगुनिया का खतरा ज्यादा रहता है। इन बीमारियों में तेज बुखार, जोड़ों में दर्द, उल्टी और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं। ये बीमारियां चूंकि खतरनाक होती हैं, इसलिए इनके लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत होती है।  विशेषज्ञ बताते हैं कि डेंगू होने पर शुरुआत में तेज बुखार आता है, इसके साथ ही सिरदर्द और आंखों के पीछे दर्द भी महसूस होता है, जबकि चिकनगुनिया में तेज बुखार के साथ-साथ जोड़ों में दर्द भी ज्यादा तेज होता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डेंगू और चिकनगुनिया से कैसे बचें? 
  • घर को साफ-सुथरा रखें 
  • कूलर, चिड़िया के बर्तन, गड्ढे, गमलों और टायर आदि में ज्यादा दिनों तक पानी न इकट्ठा न होने दें, क्योंकि इनमें मच्छर पनपने लगते हैं। 
  • पूरी बाजू के कपड़े पहनें 
नोट: डॉक्टर राजेश मुंडेजा, सऊदी अरब, मॉरीशस, मालदीव और भारत सहित विभिन्न देशों में काम करने के साथ 25+ वर्षों के अनुभव वाले एक जाने-माने चिकित्सक हैं। इन्होंने बीकानेर के एसपी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री प्राप्त की है। इसके साथ इन्होंने सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय में चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में काम किया है और उजाला सिग्नस अस्पताल में शामिल होने से पहले आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के महामृत्युंजय अस्पताल में निर्देशक, वरिष्ठ सलाहकार चिकित्सक और चिकित्सा विभाग के प्रमुख रहे हैं।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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