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Study: शाकाहारी लोगों के लिए अच्छी खबर- इनमें नसों के ब्लॉकेज का जोखिम कम, कई रोगों से रह सकते हैं सुरक्षित

Sat, 03 Jun 2023 08:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शाकाहारी आहार से होने वाले लाभ - फोटो : istock
किस प्रकार का आहार सेहत के लिए अधिक लाभकारी है? यह चर्चा लंबे समय से होती रही है। तमाम अध्ययनों में अलग-अलग निष्कर्ष देखे गए हैं, हालांकि सभी में लगभग एक बात कॉमन जरूर है कि जो लोग शाकाहारी या प्लांट बेस्ड डाइट का पालन करते हैं, उन्हें अधिक स्वस्थ पाया गया है।

शोधकर्ता कहते हैं, मांसाहार जैसे चिकन-अंडे या रेड मीट निश्चित ही आयरन, प्रोटीन जैसे तत्वों से भरपूर होते हैं पर दीर्घकालिक रूप में प्लांट बेस्ड डाइट लेने वालों में गंभीर रोगों के विकसित होने का जोखिम कम देखा गया है।

मांसाहार और शाकाहारी भोजन, कौन से अधिक लाभकारी हो सकते हैं, यह जानने के लिए शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया, जिसमें पाया गया कि मांस खाने वालों की तुलना में, शाकाहारी या प्लांट बेस्ड डाइट का पालन करने वाले लोगों के ब्लड में फैट या किसी जमाव का जोखिम कम पाया गया। यह धमनियों को अवरुद्ध होने से बचा सकता है, जिससे संभवतः हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का जोखिम कम होता है। मसलन शाकाहारी आहार का पालन करके आप हृदय को स्वस्थ रख सकते हैं।
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धमनियों में ब्लॉकेज की स्थिति - फोटो : istock
हृदय रोगों के लिए फायदेमंद डाइट प्लान

पिछले माह 24 मई को इस अध्ययन के परिणामों के निष्कर्ष यूरोपीय हार्ट जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं। इसमें शोधकर्ताओं ने बताया कि वैश्विक स्तर पर प्लांट बेस्ड डाइट से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के कारण इसकी मांग काफी तेजी से बढ़ी है। बड़ी संख्या में लोगों ने या तो मांसाहार से दूरी बनाई है या फिर इसे कम किया है।

साल 1982 से 2022 के बीच किए गए इस शोध में लोगों की आहार प्रणाली का बारीकी से अध्ययन किया गया।
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धमनियों में ब्लॉकेज की समस्या - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

अलग-अलग स्थानों पर किए गए अध्ययनों में, शोधकर्ताओं ने कुछ लोगों को लगभग 7 महीने तक सर्वभक्षी आहार (मांस, डेयरी और प्लांट बेस्ड) का सेवन करने की सलाह दी। अन्य लोगों को शाकाहारी भोजन या मांसाहारी भोजन करने के लिए कहा गया। अध्यययन के निष्कर्ष में देखा गया कि जो लोग पौधे-आधारित आहार खाते थे, उनमें अन्य डाइट प्लान वालों की तुलना में टोटल ब्लड फैट का स्तर कम था। 

विशेष रूप से, प्लांट बेस्ड डाइट का पालन करने वाले लोगों में कोलेस्ट्रॉल 7% कम, लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल 10 फीसदी और एपोलिपोप्रोटीन बी (एपीओबी) का स्तर 14 प्रतिशत कम देखा गया। इन सभी का बढ़ा हुआ स्तर हृदय को नुकसान पहुंचा सकती है। गौरतलब है कि एपीओबी, बैड कोलेस्ट्रॉल में पाया जाने वाला मुख्य प्रोटीन है और इसे हृदय रोगों के कारक के तौर पर जाना जाता है।
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प्लांट बेस्ड डाइट का करें सेवन - फोटो : istock
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?

कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और अध्ययन के लेखक रूथ फ्रिकके ने एक समाचार विज्ञप्ति में कहा, "शाकाहारी और प्लांट बेस्ड डाइट का पालन करने वालों में धमनियों में ब्लॉकिंग का कारण बनने वाले लिपोप्रोटीन करीब 14% कम देखे गए हैं। इस तरह का डाइट प्लान हृदय रोगियों के लिए कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं के सेवन करने जितना प्रभावी है। पांच साल तक पौधे आधारित आहार का पालन करने वाले किसी व्यक्ति में हृदय रोगों का जोखिम 7% तक कम हो सकता है।

जिस प्रकार से वैश्विक स्तर पर हृदय रोगों के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे में डाइट में यह बदलाव आपको गंभीर रोगों से बचाने में लाभकारी हो सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Plant-based dietary patterns and atherogenic lipoproteins

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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