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Cancer: कैंसर रोगियों के लिए 'वरदान' साबित हो सकती है 100 रुपये की ये दवा, रोग के बढ़ने का जोखिम होगा कम

Fri, 01 Mar 2024 09:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कैंसर की दवा (सांकेतिक) - फोटो : istock
कैंसर वैश्विक स्तर पर गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है। हर साल कई प्रकार के कैंसर के कारण दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है। मेडिकल साइंस में आधुनिकता और तकनीकी विकास से कैंसर के उपचार में मदद तो मिली है पर अब भी आम लोगों के लिए कैंसर का उपचार करा पाना इतना आसान नहीं है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर से मौत के लिए मुख्य कारण इसका समय पर निदान न हो पाना है, ज्यादातर लोगों में इसका पता ही तब चल पाता है जब कैंसर काफी बढ़ चुका होता है।

कैंसर के सस्ते और सरल उपचार को लेकर अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने कैंसर के इलाज में एक अभूतपूर्व खोज की है। टीम का दावा है कि उन्होंने एक ऐसी गोली विकसित कर ली है जो कैंसर को दोबारा होने से रोकने और कैंसर के उपचार के दुष्प्रभावों को 50 फीसदी तक कम करने में मददगार हो सकती है। खास बात ये है कि ये दवा काफी किफायती भी है, एफएसएसएआई से मंजूरी मिलते ही यह टैबलेट 100 रुपये में उपलब्ध हो सकेगी।
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कैंसर के जोखिमों को कैसे कम करें - फोटो : Pixabay
कैंसर को फैलने से रोक सकती है ये दवा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 'आर+सीयू' नाम की इस टैबलेट में प्रो-ऑक्सीडेंट के साथ रेस्वेराट्रॉल और कॉपर होता है जो पेट में ऑक्सीजन रेडिकल्स उत्पन्न करता है। ये रेडिकल्स कैंसर कोशिकाओं द्वारा रिलीज किए जाने वाले क्रोमेटिन कणों को नष्ट कर सकती हैं। इससे अन्य स्वस्थ कोशिकाओं के कैंसरग्रस्त होने का जोखिम कम हो जाता है। यह प्रक्रिया कैंसर कोशिकाओं को शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने से भी रोकती है, जिसे 'मेटास्टेस' कहा जाता है।

कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मददगार इस दवा से रोग के जोखिमों को भी कम किया जा सकता है।
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कैंसर का उपचार हो सकेगा आसान - फोटो : Pexels
चूहों पर किए अध्ययन में दिखे अच्छे परिणाम

रिपोर्ट में कहा गया है कि चूहों पर किए गए इस दवा के परीक्षण में बेहतर परिणाम देखे गए हैं। चूहों और इंसानों में कुछ जीन्स एक समान होते हैं, ऐसे में उम्मीद है कि इसके परिणाम इंसानों में भी अच्छे हो सकते हैं। फिलहाल दवा का मानव परीक्षण किया जा रहा है।

अध्ययन के लिए चूहों में मानव कैंसर कोशिकाएं डाली गईं, जिससे उनमें एक ट्यूमर बन गया। फिर चूहों का इलाज रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और सर्जरी से किया गया। शोध में पता चला कि जब ये कैंसर कोशिकाएं डेड हो जाती हैं, तो वे छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटने लगती है। इससे निकलने वाले कण रक्त प्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में जा सकते हैं और स्वस्थ कोशिकाओं में प्रवेश करके उन्हें भी कैंसर में बदल सकते हैं। इस दवा की मदद से कैंसर के अन्य हिस्सों में जाने से रोका जा सकता है।

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कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोक सकती है ये दवा - फोटो : Pixabay
कैंसर उपचार के दुष्प्रभावों को कम कर सकती है ये दवा

अध्ययन की अब तक की रिपोर्ट के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि आर+सीयू दवा कैंसर उपचार में चिकित्सा के दुष्प्रभावों को लगभग 50% तक कम कर सकती है साथ ही ये कैंसर की पुनरावृत्ति को रोकने में 30% प्रभावकारिता प्रदर्शित करती है। यह टैबलेट अग्न्याशय, फेफड़े और मौखिक कैंसर में प्रभावी हो सकती है। विशेषज्ञों की टीम ने कहा, फिलहाल भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से इस दवा की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। मंजूरी मिलते ही टैबलेट के जून-जुलाई तक बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है।
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कैंसर के उपचार को लेकर खोज - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ ?

टाटा इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. राजेंद्र बडवे कहते हैं, अगर टेबलेट को मंजूरी मिल जाती है तो इसकी कीमत काफी कम होगी। इसकी कीमत 100 रुपये से भी कम रखने का प्रयास है जिससे आम लोगों के लिए भी इसके इस्तेमाल को आसान बनाया जा सके। कैंसर के उपचार में ये दवा कितनी असरदार है इसको लेकर फिलहाल दावा नहीं किया जा सकता है पर ये कैंसर के दोबारा बढ़ने के जोखिमों को जरूर कम कर सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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