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विशेषज्ञों की चेतावनी: बच्चों में भी हो सकता है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा, इन जोखिम कारकों को लेकर बरतें सावधानी

Tue, 02 Aug 2022 04:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला. नई दिल्ली
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बच्चों में डायबिटीज का खतरा - फोटो : Pixabay
डायबिटीज वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विशेषज्ञ इसे 'साइलेंट किलर' बीमारियों रूप में वर्गीकृत करते हैं, क्योंकि डायबिटीज कई अन्य तरह की बीमारियों के जोखिम को भी बढ़ा देती है। डायबिटीज, मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्या है। मुख्यरूप से लाइफस्टाइल और आहार की दिक्कतों के कारण इस रोग का जोखिम बढ़ जाता है। सामान्यतौर पर वयस्कों और बुजुर्गों में  टाइप-2 डायबिटीज का खतरा अधिक देखा जाता रहा है, पर क्या आप जानते हैं कि बच्चों को भी यह बीमारी अपना शिकार बना सकती है?

डॉक्टर्स कहते हैं कि आमतौर पर टाइप-1 डायबिटीज का खतरा बच्चों में देखा जाता रहा है, हालांकि कुछ जोखिम कारक पांच साल से भी कम उम्र के बच्चों में  टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा देते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर बच्चों में डायबिटीज के खतरे को लेकर ध्यान नहीं दिया जाता है, पर यह आगे चलकर कई तरह की समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषकर अगर आपके बच्चों को डायबिटीज की समस्या है और समय पर इसका निदान नहीं हो पाता है तो यह शरीर में किडनी-लिवर सहित कई अन्य अंगों के लिए समस्याएं बढ़ा सकता है। आंकड़े बताते हैं कि शहरी परिवेश में पल रहे बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम अधिक देखा गया है। आइए इस समस्या को विस्तार से समझते हैं।
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डायबिटीज के खतरे को जानिए - फोटो : istock
बच्चों में डायबिटीज का खतरा

पिछले एक-दो दशकों में दुनियाभर में मधुमेह के मामलों में चौंकाने वाली वृद्धि देखी गई है। टाइप-2 डायबिटीज के मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि जिन माता-पिता को डायबिटीज का समस्या रही है उन्हें अपने बच्चों में इसके जोखिमों को लेकर विशेष सतर्कता बरतती रहनी चाहिए। कोविड के इस दौर ने जिस तरह से युवा से लेकर बच्चों तक को सेंडेंटरी लाइफस्टाइल का आदी बना दिया है, इसके कारण डायबिटीज के मामले और भी बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं।

आइए जानते हैं कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में किन जोखिम कारकों को चलते  टाइप-2 डायबिटीज  का खतरा बढ़ जाता है?
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बच्चों में मोटापे की समस्या - फोटो : Pixabay
आनुवांशिकता और मोटापा 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन बच्चों में डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री रही है, यानी कि अगर माता-पिता में से किसी को डायबिटीज रहा है तो बच्चों में भी इसका खतरा हो सकता है। इसके अलावा यदि बच्चे का बॉडी मास इंडेक्स अधिक है या वह मोटापे का शिकार है तो डायबिटीज होने का खतरा और भी बढ़ जाता है। बच्चों में मोटापे की समस्या को डायबिटीज के साथ हृदय रोग और अन्य कई बीमारियों का कारण माना जाता है।

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बच्चों को दें पौष्टिक आहार - फोटो : iStock
आहार और लाइफस्टाइल की समस्या

आहार और लाइफस्टाइल, डायबिटीज को बढ़ाने वाले दो प्रमुख कारण माने जाते रहे हैं। बच्चों से लेकर वयस्कों तक इन्हें डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारक के तौर पर जाना जाता है। यदि आपका बच्चा अधिक मीठा या पैक्ड फूड खाता है, साथ में उसमें आनुवांशिकता या मोटापे जैसे जोखिम कारक हैं तो यह डायबिटीज के खतरे को कई गुना तक बढ़ा देता है। जिन बच्चों का ज्यादातर समय मोबाइल पर या घर के भीतर बीतता है उनमें भी इसका खतरा काफी अधिक देखा गया है।
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डायबिटीज के जोखिम को जानिए - फोटो : iStock
बच्चों में डायबिटीज के खतरे को जानिए

बच्चों में डायबिटीज का समय रहते निदान कर अगर उसका इलाज किया जाए तो इससे रोग को बढ़ने और गंभीर रूप लेने से बचाया जा सकता है। सामान्यतौर पर मधुमेह के लक्षण बच्चों और वयस्क, दोनों में समान होते हैं। बच्चों में यदि बिना स्पष्ट कारणों से वजन कम हो रहा है, उन्हें धुंधला दिखाई देता है या फिर भूख कम लगती है तो इसे डायबिटीज के संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए। यदि घाव भरने में भी समय अधिक लगता है तो इस बारे में तुरंत किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर जांच कराएं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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