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टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम: महिलाओं के लिए घातक हो सकती है ये बीमारी, लक्षणों पर जरूर दें ध्यान

Mon, 12 Jul 2021 08:12 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Rajesh Mundeja 

डॉ राजेश मुंडेजा 
जनरल फिजीशियन, उजाला सिग्नस अस्पताल  
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी


टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम कुछ प्रकार के बैक्टीरियल इंफेक्शन (जीवाणु संक्रमण) से होने वाली एक दुर्लभ, लेकिन जानलेवा समस्या है। अक्सर टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम स्टैफिलोकोकस ऑरियस (स्टैफ) बैक्टीरिया द्वारा उत्पादित विषाक्त पदार्थों के परिणामस्वरूप होता है, लेकिन यह स्थिति समूह ए स्ट्रेप्टोकोकस (स्ट्रेप) बैक्टीरिया द्वारा उत्पादित विषाक्त पदार्थों के कारण भी हो सकती है। यह सिंड्रोम पुरुष, बच्चों और पोस्टमेनोपॉजल महिलाओं सहित किसी को भी प्रभावित कर सकता है। इस सिंड्रोम के जोखिम कारकों में त्वचा पर घाव, सर्जरी और टैम्पोन और अन्य उपकरणों का उपयोग, जैसे गर्भनिरोधक स्पंज आदि शामिल हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस बीमारी से पीड़ित मरीजों का ब्लड प्रेशर तेजी से कम होने लगता है, जिसकी वजह से शरीर में सही तरीके से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है, जिससे मौत भी हो सकती है। आइए जानते हैं इस बीमारी के लक्षण और इलाज के बारे में... 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं? 
  • अचानक तेज बुखार 
  • लो ब्लड प्रेशर (कम रक्तचाप) 
  • उल्टी या डायरिया 
  • सनबर्न जैसे दिखने वाले रैशेज, विशेष रूप से हथेलियों और तलवों पर 
  • भ्रम की स्थिति 
  • मांसपेशियों में दर्द 
  • आंखें, मुंह और गले की लालिमा 
  • सिर दर्द 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम की जटिलताएं 
  • टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम तेजी से बढ़ सकता है। इसकी जटिलताओं में शॉक (सदमा), किडनी फेल्योर और यहां तक की मौत भी शामिल है। अगर किसी व्यक्ति को वायरल संक्रमण हुआ है, जैसे कि फ्लू या चिकनपॉक्स, तो टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम के होने का खतरा बढ़ जाता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम का पता कैसे लगा सकते हैं? 
  • टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम का पता लगाने के लिए डॉक्टर ब्लड या यूरीन सैंपल की जांच करते हैं। इसके अलावा वजाइना, सर्विक्स या गले का स्वैब लेकर भी इसकी जांच की जाती है। शरीर के दूसरे अंगों पर इस टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम का प्रभाव पड़ा है या नहीं और अगर पड़ा है तो कितना पड़ा है, इसके लिए डॉक्टर सीटी स्कैन या चेस्ट एक्स-रे भी करा सकते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम का इलाज क्या है? 
  • अगर आप टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम से पीड़ित हैं तो आपको अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। इसके इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा मरीज को ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने की दवा भी दी जा सकती है और शरीर में पानी की मात्रा बढ़ाने के लिए डॉक्टर मरीज को तरल पदार्थ भी दे सकते हैं।  
नोट: डॉक्टर राजेश मुंडेजा, सऊदी अरब, मॉरीशस, मालदीव और भारत सहित विभिन्न देशों में काम करने के साथ 25+ वर्षों के अनुभव वाले एक जाने-माने चिकित्सक हैं। इन्होंने बीकानेर के एसपी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री प्राप्त की है। इसके साथ इन्होंने सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय में चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में काम किया है और उजाला सिग्नस अस्पताल में शामिल होने से पहले आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के महामृत्युंजय अस्पताल में निर्देशक, वरिष्ठ सलाहकार चिकित्सक और चिकित्सा विभाग के प्रमुख रहे हैं।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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