फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

PMS: दिनचर्या की ये गलत आदतें बढ़ा देती हैं प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम का खतरा, जानें बचाव के उपाय

Mon, 14 Jul 2025 03:34 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम एक ऐसी शारीरिक समस्या है, जिससे अधिकतर लड़कियां कभी न कभी जरूर सामना करती हैं। प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम होने के कई कारण होते हैं, इन्हीं में एक प्रमुख कारण है दिनचर्या की कुछ गलत आदतें हो सकती हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
विज्ञापन
1 of 7
प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम - फोटो : Freepik.com
Premenstrual Syndrome Preventive Measures: मासिक धर्म से पहले, महिलाओं को अक्सर कुछ शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरना पड़ता है, जिसे आमतौर पर प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम कहा जाता है। यह सिर्फ एक मामूली असुविधा नहीं, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जो लाखों महिलाओं के जीवन को प्रभावित करती है। मूड स्विंग्स, लगातार थकान, चिड़चिड़ापन, पेट में ऐंठन और तेज सिरदर्द ये सभी पीएमएस के आम लक्षण हैं, जो मासिक धर्म शुरू होने से ठीक पहले नजर आते हैं।

कई स्टडी में से सामने आया है कि हमारी दैनिक दिनचर्या की कुछ गलत आदतें इन लक्षणों को और भी गंभीर बना सकती है। हमारी अनियमित जीवनशैली, खानपान में लापरवाही और बढ़ता तनाव, ये सभी कारण पीएमएस की समस्या को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। अच्छी बात यह है कि आप कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बरतकर और स्वस्थ आदतों को अपनाकर, पीएमएस के प्रभावों को काफी हद तक कम कर सकते हैं। आइए इस लेख में हम उन आदतों और सावधानियों के बारे में जानते हैं, जो पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करने में आपकी मदद कर सकती हैं।
विज्ञापन

2 of 7
नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock
अनियमित नींद 
सबसे पहली और आम गलती है देर रात तक जागना और सोने-जागने का समय बार-बार बदलना। पर्याप्त नींद न लेना या अनियमित नींद सीधे तौर पर आपके हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकती है, जिससे पीएमएस के लक्षण और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं। इसलिए, कोशिश करें कि हर दिन एक निश्चित समय पर सोएं और जागें, ताकि आपके शरीर की सर्केडियन रिदम सही रहे।
 
ये भी पढ़ें- Health Tips: भुना हुआ भुट्टा खाने से मिलते हैं ये जबरदस्त फायदे, बस बरतें ये सावधानी
विज्ञापन

3 of 7
नो शुगर डाइट - फोटो : Freepik.com
कैफीन और शुगर का अधिक सेवन
बहुत ज्यादा शुगर और कैफीन का सेवन करना सीधे तौर पर आपके प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षणों को बढ़ा सकता है। आज की जीवनशैली में लोग अक्सर तनाव या थकान से निपटने के लिए चाय, कॉफी या मीठे स्नैक्स का सहारा लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, ये आदतें पीएमएस से जूझ रही महिलाओं के लिए और भी मुश्किल पैदा कर सकती हैं।  इसलिए, यदि आप पीएमएस के लक्षणों को कम करना चाहती हैं, तो इन दोनों के सेवन को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। 

ये भी पढ़ें- Health Tips: तांबा के बर्तन में रखे पानी पीने से क्या होता है, क्या सच में ये पानी फायदेमंद होता है?

4 of 7
आहार पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
संतुलित आहार न लेना
संतुलित आहार केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। अपने भोजन में पर्याप्त मात्रा में साबुत अनाज, फल, सब्ज़ियां, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड्स, ज्यादा नमक और अनहेल्दी फैट्स से बचें। कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन बी6 जैसे पोषक तत्व पीएमएस के लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं, जो आपको हरी पत्तेदार सब्जियों, नट्स, बीज और डेयरी उत्पादों से मिल सकते हैं।
विज्ञापन

5 of 7
तनाव की समस्या - फोटो : Freepik.com
मानसिक तनाव
मानसिक तनाव पीएमएस के लक्षणों को गंभीर बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। तनाव के कारण शरीर में कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है और पीएमएस से जुड़ी चिड़चिड़ापन, चिंता और मूड स्विंग्स को बढ़ा सकता है। इसलिए, तनाव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। मानसिक तनाव से नियंत्रित करने के लिए योग करें, ध्यान करें, गहरी सांस लेने वाले व्यायाम करें, या अपनी पसंद की हॉबी में समय बिताना तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।
विज्ञापन

6 of 7
नियमित व्यायाम करें - फोटो : Adobe Stock
नियमित व्यायाम न करना
नियमित शारीरिक गतिविधि पीएमएस के लक्षणों से राहत पाने का एक और प्रभावी तरीका है। व्यायाम करने से शरीर में एंडोर्फिन नामक 'फील-गुड' हार्मोन रिलीज होते हैं, जो मूड को बेहतर बनाते हैं। यह तनाव को कम करने और नींद की गुणवत्ता सुधारने में भी सहायक है।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
PMS से बचाव के उपाय - फोटो : Freepik.com
बचाव के उपाय
पीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव लाना जरूरी है। तनाव कम करने के लिए समय-समय पर अपने काम से ब्रेक लें और अपनी पसंदीदा गतिविधियों में हिस्सा लें। अगर लक्षण बहुत गंभीर हों, तो डॉक्टर से परामर्श लें। कुछ मामलों में, विटामिन डी, मैग्नीशियम या अन्य सप्लीमेंट्स की सलाह दी जा सकती है। स्वस्थ जीवनशैली और जागरूकता के साथ, पीएमएस के प्रभाव को कम करना संभव है, जिससे महिलाएं अपने मासिक चक्र को अधिक सहजता से जी सकती हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें