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इस हार्मोन के कारण बढ़ता है तनाव, इससे बचना है तो वर्तमान में जीना है जरूरी, करें ये उपाय

Wed, 11 Mar 2020 10:51 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
अनियमित जीवनशैली, कभी पढ़ाई या काम का दबाव तो कभी रिश्तों में दरार, व्यक्ति के जीवन में तनाव होना आम है। कई बार हम बहुत चाहते हुए भी इससे बच नहीं पातें। कई बार तो हमें पता भी नहीं चल पाता कि हम किन वजहों से तनाव में होते हैं। दरअसल, शरीर में बदलाव की प्रतिक्रिया को तनाव कहते हैं। शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तरीके से शरीर प्रतिक्रिया करता है। आइए इस बारे में और ज्यादा जानते हैं फिजियोथेरेपी, नेचुरोपैथी और एक्यूप्रेशर कंसलटेंट डॉ. राजेश राणा से: 
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pain - फोटो : pixa
डॉ. राणा बताते हैं कि तनाव तब नकारात्मक हो जाता है जब किसी मनुष्य को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। तनाव के कारण सामान्य सांस की प्रक्रिया भी बदल जाती है, जिससे पीठ और कमर की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है। शरीर के लचीलापन पर बुरा असर पड़ता है। तनाव के कारण कोर्टिसोल हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे स्पाइन के आसपास की मांसपेशियों में ऐंठन और खिंचाव आने लगता है। कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ने पर मांसपेशियों की सघनता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। तनाव से बचना है तो हमेशा वर्तमान में जीने की कोशिश करें।
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फिजियोथेरेपी, नेचुरोपैथी और एक्यूप्रेशर कंसलटेंट डॉ. राजेश राणा बताते हैं तनाव से उत्पन्न दर्द के उपचार का पहला सिद्धांत तनाव का कारण जानना और रोगी को तनाव मुक्त करना है। तनावग्रस्त रोगी की जीवनशैली में बदलाव बेहद अहम हो जाता है। कई बार विटामिन डी की कमी से भी रोगी में चिड़चिड़ा बढ़ जाता है। वह तनाव में रहने लगता है। 

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सिरदर्द
लक्षण
  • तनाव से सिर में दर्द होता है।
  • पेट की समस्याएं लगातार बनी रहती हैं।
  • अच्छी नींद नहीं आती है।
  • छाती में भी दर्द हो सकता है।
  • गर्दन व कमर का दर्द भी तनाव से हो सकता है।
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फिजियोथेरेपी
डॉ. राणा के अनुसार, इसके उपचार में एक्यूप्रेशर और फिजियोथेरेपी काफी कारगर है। फिजियोथेरेपी की तमाम आधुनिक मशीनें आ चुकी हैं, जिससे शरीर की ऐंठन व दर्द को खत्म किया जा सकता है। व्यायाम से भी खोई हुई मांसपेशियों को प्राप्त किया जा सकता है, जिससे कि दर्द की पुनरावृत्ति न हो। 
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योगा - फोटो : social media
डॉ. राणा के अनुसार, तनाव दूर करने के लिए यह जानना भी बेहद जरूरी है कि कौन सा आसन और प्राणायाम किस रोग में करना चाहिए। यह भी उतना ही जरूरी है कि जिस योगासन को करें वह उचित तरीके से हो, अन्यथा नुकसान भी पहुंचा सकता है। 
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तनाव मुक्त रहने के लिए हमारा भोजन संपूर्ण तत्वों से भरपूर होना चाहिए। भोजन हमेशा सही समय पर करना चाहिए। रोगी को अच्छी नींद आए, इसके लिए योगनिद्रा और शवासन करना चाहिए। इसके अलावा कपालभाति व अनुलोम-विलोम भी अत्यंत लाभदायी होता है। इससे रोगी को अच्छी नींद आएगी और तनाव कम होगा।
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Drinking water - फोटो : Pixabay
समाधान
  • रोज सुबह उठकर प्राणायाम करें।
  • हमेशा वर्तमान में जीने की कोशिश करें।
  • समस्याओं को दूसरों से साझा करें।
  • तनाव होने पर ठंडा पानी भी पी सकते हैं।
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