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केवल तंबाकू ही नहीं इन कारणों से भी हो सकता है गले का कैंसर, जानें लक्षण

Tue, 20 Aug 2019 10:11 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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कैंसर की बीमारी आजकल बहुत तेजी से फैल रही है। थोड़ी सी लापरवाही से किसी की भी जिंदगी खतरें में पड़ सकती है। पूरे शरीर के किसी भी अंग में कैंसर के लक्षण पनप सकते हैं। एक शोध के मुताबिक 57 प्रतिशत मामले कैंसर के एशिया में होते हैं और इसमें भी गले व कैंसर के करीब चार लाख मामले अकेले भारत में होते हैं। लोगों को लगता है कि केवल धूम्रपान करने वालों को ही गले का कैंसर हो सकता है लेकिन जो तंबाकू का सेवन किसी तरह भी नहीं करते उन्हें भी ये रोग हो सकता है। जिसके बारे में बहुत कम लोगों में जाकरुकता है। तो आइए जाने कैसे हमारे शरीर को प्रभावित करता है गले व सिर का कैंसर।
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कैसे होता है गले व सिर का कैंसर
गले के कैंसर के लिए मुख्य रूप से लोगों की गलत जीवनशैली जिम्मेदार होती है। तंबाकू का सेवन करने वाले करीब अस्सी प्रतिशत लोगों में गर्दन से जुड़ा कैंसर हो जाता है। जिसके लिए तंबाकू में मौजूद टार जिम्मेदार होता है। तंबाकू के साथ ही जो लोग एल्कोहल का सेवन करते हैं उनमें करीब 38 फीसदी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि इससे म्यूकोसल इंजरी का खतरा बढ़ता है। कुछ वायरस जैसे एचपीवी, एचआईवी, ईबीवी और हर्पीस भी गले के कैंसर का कारण बनते हैं। ज्यादा नमक वाली प्रोसेस्ड चीजें, ग्रिल्ड व भुना हुआ मीट ज्यादा खाना भी कैंसर का कारण बन सकता है। भोजन में केरेटेनॉएड्स, फॉलिक एसिड, विटामिन्स और डाइटरी फाइबर की कमी इसके खतरे बढ़ाती है। ज्यादा समय तक लिपबाम और एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन का इस्तेमाल भी गले के कैंसर का कारण बन जाता है।
 
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- फोटो : pixa
क्या है लक्षण
गले के कैंसर के केवल 12 फीसदी मामले ही शुरूआती चरण में पता चल पाते हैं। अगर कैंसर की बीमारी का पहले ही स्तर में पता चल जाए तो उचित इलाज संभव है। अगर किसी को गले का कैंसर है तो उसकी आवाज प्रभावित होना शुरू हो जाती हैं। भोजन निगलने में परेशानी होने लगती हैं। मुंह में सूजन और खून आने लगता है इसके साथ ही कभी-कभी गर्दन में गांठ दिखाई देने लगती है।
 
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गले का कैंसर जानलेवा नहीं
सिर और गले के कैंसर के उपचार के लिए बहुत सारी नई तकनीकों का उपयोग किया जाता है जिससे मरीज की जान तो बच जाती है। लेकिन चेहरा बिगड़ने या आवाज चले जाने की संभावना रहती है। बहुत बार मरीज को भोजन निगलने में परेशानी होती है जिसके समाधान के लिए रिहेबिलिटेशन करना पड़ता है और मरीज की खाने, चबाने और बात करने में मदद की जाती है।
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