Summer Baby Care: गर्मी के मौसम में हर घर में कूलर चलना शुरू हो जाते हैं। पर, क्या आप जानते हैं कि कूलर के ठीक सामने बच्चे को सुलाना सही नहीं माना जाता। आइए आपको उसके नुकसान बताते हैं।
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बच्चे को कूलर के ठीक सामने सुलाना कितना सही?
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Summer Baby Care: गर्मियों के मौसम में तेज गर्मी से बचाने के लिए माता-पिता अक्सर बच्चों को कूलर के ठीक सामने सुला देते हैं, ताकि उन्हें ठंडक मिल सके और अच्छी नींद आए। लेकिन कई बार राहत देने वाला यही तरीका बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकता है।
लगातार सीधी ठंडी हवा लगने से बच्चे को कई समस्याएं हो सकती हैं। खासकर छोटे बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण उन्हें ज्यादा दिक्कत होती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बच्चे को कूलर के सामने सुलाना कितना सही है और इससे क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं। इस लेख में हम आपको इससे संबंधित पूरी जानकारी देंगे।
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बच्चे को कूलर के ठीक सामने सुलाना कितना सही?
- फोटो : Amar Ujala AI
बच्चे को कूलर के ठीक सामने सुलाना कितना सही?
गर्मियों में कूलर राहत जरूर देता है, लेकिन छोटे बच्चों को सीधे कूलर के सामने सुलाना पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता। बच्चों की बॉडी बहुत संवेदनशील होती है और तेज ठंडी हवा उनके शरीर पर जल्दी असर डाल सकती है। अगर सावधानी न बरती जाए तो कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
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बच्चे को कूलर के ठीक सामने सुलाना कितना सही?
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बॉडी टेम्परेचर पर असर
छोटे बच्चों का शरीर तापमान को उतनी तेजी से कंट्रोल नहीं कर पाता जितना बड़ों का। कूलर की लगातार ठंडी हवा लगने से बच्चे का बॉडी टेम्परेचर अचानक कम हो सकता है। इससे बच्चे को बेचैनी, ठंड लगना या हल्का बुखार भी हो सकता है।
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सर्दी-जुकाम का खतरा
कूलर की सीधी हवा लंबे समय तक लगने से नाक बंद होना, गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। खासकर रात में लगातार ठंडी हवा लगने पर बच्चों की इम्यूनिटी प्रभावित हो सकती है, जिससे वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
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बैक्टीरिया और एलर्जी की समस्या
अगर कूलर की टंकी और फिल्टर की नियमित सफाई नहीं होती, तो उसमें बैक्टीरिया, फंगस और धूल जमा हो जाती है। यही गंदी हवा बच्चे तक पहुंचकर एलर्जी, छींक, आंखों में जलन और स्किन रैशेज जैसी दिक्कतें पैदा कर सकती है।
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सांस लेने में परेशानी
बहुत छोटे बच्चों या अस्थमा और एलर्जी से परेशान बच्चों को कूलर की नमी वाली हवा सूट नहीं करती। इससे सांस फूलना, सीने में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत बढ़ सकती है। इसलिए ऐसे बच्चों को सीधे कूलर की हवा से बचाना चाहिए।
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आंखों और त्वचा में ड्रायनेस
लगातार ठंडी हवा के संपर्क में रहने से बच्चे की त्वचा रूखी हो सकती है। कई बार आंखों में सूखापन और जलन भी महसूस होती है। बच्चों की स्किन बेहद नाजुक होती है, इसलिए उन्हें संतुलित तापमान में रखना जरूरी है।