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SIDS: सोते नवजातों में बढ़े अचानक मौत के मामले, वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया इसका प्रमुख कारण

Thu, 19 May 2022 06:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ टिप्स, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सडेन इंफैंट डेथ सिंड्रोम (एसआईडीएस) - फोटो : Pi
सडेन इंफैंट डेथ सिंड्रोम (एसआईडीएस) वैश्विक स्तर पर नवजात बच्चों में मौत की एक गंभीर समस्या है। ब्रिटेन में हर साल लगभग 200 बच्चे अचानक और अप्रत्याशित रूप मौत के शिकार हो जाते हैं। भारत में भी एसआईडीएस एक बड़ी समस्या का कारण बनी हुई है। साल 2019 में देश में जन्मे 1000 में से 32 नवजात की मृत्यु सडेन इंफैंट डेथ सिंड्रोम  के रूप में रिपोर्ट की गई। एसआईडीएस की स्थिति जन्म पहले 6 महीनों के दौरान अधिक देखने को मिलती है। इसमें सामान्यतौर परसो रहे नवजात अचानक और अप्रत्याशित रूप से मृत्य का शिकार हो जाते हैं। 

सडेन इंफैंट डेथ सिंड्रोम के कारण और इसके बचाव को लेकर वर्षों से शोध और अध्ययन किए जा रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि समय से पहले या जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं में इसका खतरा अधिक होता है। नवजात लड़कों में इसका खतरा अधिक देखा गया है

 एसआईडीएस आमतौर पर तब होता है जब बच्चा सो रहा होता है, हालांकि यह कभी-कभी जागते समय भी हो सकता है। इस बीच हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने सडेन इंफैंट डेथ सिंड्रोम के कारण का पता लगाने का दावा किया है। आइए इस बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
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सडेन इंफैंट डेथ सिंड्रोम के कारण - फोटो : Pixabay
सडेन इंफैंट डेथ सिंड्रोम के बारे में जानिए

विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईडीएस, बच्चे के विकास के चरणों में अधिक रिपोर्ट किया जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने या बच्चे के धूम्रपान के संपर्क में आने से इस समस्या का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इस बीच हालिया शोध में ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने एक बायोमार्कर की पहचान की है जिसके आधार पर नवजात में एसआईडीएस के जोखिम का पता लगाया जा सकता है।

पश्चिमी देशों में होने वाले सभी प्रसवोत्तर मौतों में लगभग 50 फीसदी को एसआईडीएस से संबंधित माना जाता है। आइए जानते हैं कि शोधकर्ताओं ने इसके लिए किन कारणों को जिम्मेदार पाया है?
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ब्लड कैमिकल की समस्या - फोटो : Pixabay
बच्चों में खास ब्लड कैमिकल की कमी

द लैंसेट्स ईबायोमेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने सडेन इंफैंट डेथ सिंड्रोम के लिए बच्चों में एक खास ब्लड कैमिकल की कमी को जिम्मेदार पाया है। चिल्ड्रन हॉस्पिटल एट वेस्टमीड (सीएचडब्ल्यू) में शोधकर्ताओं की  टीम ने ब्यूटिरिलकोलिनेस्टरेज़ (बीसीएचई) नामक एक बायोकैमिकल  मार्कर की पहचान की है जो  शिशुओं में मृत्यु को रोकने में मदद कर सकता है।  इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने 722 नवजातों के ब्लड सैंपल की जांच की। 

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नवजात शिशु की देखभाल - फोटो : Istock
अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने सडेन इंफैंट डेथ सिंड्रोम और अन्य कारणों से मरने वाले शिशुओं में बीसीएचई  के स्तर की जांच की। निष्कर्षों से पता चलता है कि बीसीएचई का स्तर उन बच्चों में काफी कम था, जिनकी मौत सडेन इंफैंट डेथ सिंड्रोम के रूप में हुई।

अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ हैरिंगटन बताते हैं, बीसीएचई मस्तिष्क के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी बच्चों में अचानक मौत का कारण बन सकती है। हालांकि यह कमी क्यों होती है, इस बारे में जानने के लिए शोधकर्ता आगे अध्ययन कर रहे हैं। 
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अभिभावकों का सिगरेट पीना बच्चों के लिए नुकसानदायक - फोटो : pixabay
अध्ययन का निष्कर्ष

शोध के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया कि बच्चों के जन्म के समय किए जाने वाले जांच में डॉक्टरों को ब्यूटिरिलकोलिनेस्टरेज़ के स्तर की भी जांच कर लेनी चाहिए, जिससे की संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए ऐसे बच्चों की विशेष देखभाल और उपचार किया जा सके। शोधकर्ताओं का कहना है कि अध्ययन के अगले चरण में बीसीएचई की कमी के कारण और बच्चों में इसकी कमी को दूर करने के उपायों को जानने के लिए शोध किया जाना है। यह अध्ययन बाल मृत्युदर को रोकने की दिशा में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


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स्रोत और संदर्भ
Butyrylcholinesterase is a potential biomarker for Sudden Infant Death Syndrome

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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