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Sudden Heart Attack: जिम में अचानक मौत का एक और मामला, डॉक्टर की सलाह- ठंड के मौसम में रहें विशेष सावधान

Thu, 05 Jan 2023 04:48 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हार्ट अटैक के जोखिम कारक - फोटो : istock
सडेन हार्ट अटैक के केस पिछले एक साल में काफी तेजी से बढ़े हैं। साल 2022 में अचानक आए हार्ट अटैक के कारण कई लोगों की मौत हई। चलते-फिरते और शादियों-पार्टियों का आनंद लेते हुए अचानक दिल का दौरा पड़ने के मामले पूरे साल चर्चा का विषय बने रहे। दुर्भाग्य से यह सिलसिला अब भी जारी है। हालिया मामला मध्यप्रदेश के इंदौर का है, जहां जिम में वर्कआउट के दौरान अचानक एक व्यक्ति को हार्ट अटैक आया जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक की आयु 55 साल थी, वह रोज जिम जाया करते थे। 

जिम के दौरान पहले भी दिल का दौरा पड़ने के मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक तीव्रता वाले व्यायाम के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ने का खतरा रहता है, ऐसे में जिन लोगों को पहले से ही हार्ट की समस्या रही है, उन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

इसके अलावा हृदय रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंड का यह मौसम भी हृदय स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस दौरान कुछ असावधानियां गंभीर हृदय रोग के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।
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जिम और हार्ट अटैक का जोखिम - फोटो : Getty Images
जिम में बरतें विशेष सावधानी

जिम में बढ़ते हार्ट अटैक के जोखिमों को लेकर हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, व्यायाम सेहत के लिए जरूरी है, पर उतना ही जितना हमारा शरीर सहन करने की क्षमता रखता है। अधिक तीव्रता वाले व्यायाम, हृदय पर अतिरिक्त दबाव को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इसके कारण कई लोगों में अचानक हृदय गति काफी बढ़ जाने की समस्या देखी गई है, ये स्थितियां दिल का दौरा पड़ने का कारण बन सकती हैं। ज्यादातर जिमों में अच्छे वेंटिलेशन की समस्या देखी जाती रही है, इसके कारण भी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

पहले से ही हृदय रोगों के शिकार लोगों को ट्रेनर की सलाह पर हमेशा हल्के स्तर के व्यायाम करने चाहिए। शरीर को पूरा आराम देना भी बहुत आवश्यक है।
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हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे से बचाव के उपाय - फोटो : istock
सडेन हार्ट अटैक चिंताकरक

अमर उजाला से बातचीत में  हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ विभव सिंह कहते हैं, बढ़ते सडेन हार्ट-अटैक के मामले चिंताकारक हैं, इसपर वृहद स्तर पर गंभीरता से ध्यान देते हुए कारकों को जानने के लिए शोध की आवश्यकता है।

वैसे तो कई कारण हैं जो सडेन हार्ट अटैक के जोखिमों को बढ़ा देते हैं। जिन लोगों को पहले से ही हृदय स्वास्थ्य की समस्या रही है उन्हें इसपर गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। ठंड का मौसम भी जटिलताओं को बढ़ाने वाला हो सकता है।

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वाहिकाओं में संकुचन के कारण हो सकता है हार्ट अटैक - फोटो : Pixabay
ठंड में हार्ट-अटैक का खतरा

डॉ विभव सिंह बताते हैं, ठंड के मौसम में हमारा शरीर स्वाभाविक रूप से तापमान को बैंलेस करते रहने की कोशिश करता है। जब बाहर का तापमान कम होने लगता है तो इसके हिसाब से शरीर को अपना तापमान सेट करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसके कारण बीएमआर (बेसल मेटाबोलिक रेट) बढ़ जाता है।

बेसल मेटाबोलिक रेट शरीर के मेटाबॉलिज्म को मापता है। इसके अलावा सर्दियों के दौरान वाहिकाओं में संकुचन की समस्या भी बढ़ जाती है जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने का खतरा रहता है। इस तरह की स्थिति पर ध्यान न देना हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।
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हृदय रोगी रखें विशेष ध्यान - फोटो : istock
हृदय की सेहत का सभी लोग रखें ख्याल

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं हृदय रोगों को सिर्फ बढ़ते उम्र के साथ होने वाली समस्याओं के तौर पर देखने की गलती न करें। वयस्कों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को इस विषय में ध्यान देने की आवश्यकता है। 
  • हृदय की सेहत को ठीक रखने के लिए लाइफस्टाइल को ठीक रखना बहुत आवश्यक है। 
  • स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम की आदत धमनियों को स्वस्थ रखने और हृदय को बेहतर तरीके से काम करते रहने में मदद करती हैं।
  • सर्दियों में हाई कैलोरी वाले आहार का सेवन कम करें। अधिक ठंड से बचाव करते रहें।
  • शारीरिक सक्रियता पर ध्यान दें।  घर पर ही हल्के स्तर की स्ट्रेंचिंग और योग का अभ्यास करके भी हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है। 
 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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