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अध्ययन: आइसोलेशन अवधि पर वैज्ञानिकों ने उठाए सवाल, कहा- ऐसा हुआ तो दूसरों के लिए खतरा बन सकते हैं संक्रमित

Mon, 17 Jan 2022 05:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना संक्रमितों के लिए होम आइसोलेशन - फोटो : iStock
भारत सहित दुनियाभर में इस समय कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण जारी है। अध्ययनों में कोरोना के इस वैरिएंट को काफी संक्रामक माना जा रहा है, यह देश में तीसरी लहर का कारण भी बन रहा है। भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के ढाई लाख से अधिक मामले सामने आए, वहीं ओमिक्रॉन से संक्रमितों का आंकड़ा भी बढ़कर 8 हजार को पार कर गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट, डेल्टा की तुलना में अधिक संक्रामक जरूर है, हालांकि इसके कारण लोगों को गंभीर समस्याएं नहीं हो रही हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हाल ही में यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने संक्रमितों के लिए होम आइसोलेशन के समय को घटाकर 14 दिनों से 10 दिन का कर दिया था। हालांकि हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव लोगों के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकता है।

'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इंफेक्शियस डिजीज' में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि संक्रमितों के लिए 10 दिनों का क्वारंटीन पर्याप्त नहीं है। वायरस के प्रसार को कम करने के लिए 10 दिनों के आइसोलेशन को काफी नहीं माना जा सकता है। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कोरोना से ठीक हो चुका हर 10 में से 1 व्यक्ति अभी भी कोविड-19 फैला सकता है। इस बारे में फिर से विचार किए जाने की आवश्यकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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संक्रमितों के लिए होम आइसोलेशन जरूरी - फोटो : iStock
10 दिनों का होम आइसोलेशन नाकाफी
वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि संक्रमित व्यक्ति से दूसरों को होने वाले कोरोना संक्रमण के खतरे को रोकने और बीमारी के ठीक होने के लिए सिर्फ 10 दिनों का होम आइसोलेशन पर्याप्त नहीं है।एक्सेटर विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए इस शोध में होम आइसोलेशन पूरा कर चुके लोगों पर अध्ययन किया गया। इसके लिए 176 लोगों के सैंपल लिए गए जिन्हें पहले आरटीपीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि 10 दिनों का आइसोलेशन पूरा करने के बाद भी 13 प्रतिशत लोगों में ऐसे संकेत देखे गए जिससे वह अन्य को संक्रमित कर सकते हैं। 
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आइसोलेशन के नियमों में बदलाव - फोटो : iStock
क्या हैं आइसोलेशन के नए  नियम
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग ने अपने लोगों के लिए आइसोलेशन और क्वारंटाइन का समय 14 दिन से घटाकर 10 कर दिया था, जिसे बाद में इसे और घटाकर 5 दिन किया गया। सीडीसी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट किया- कोविड-19 वाले लोगों को संक्रमण की पुष्टि के बाद 5 दिनों के लिए खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए। वहीं यदि रोगी एसिम्टोमैटिक है और उन्हें बुखार नहीं है तो इस अवधि के बाद मास्क पहनकर अगले पांच दिनों तक लोगों के आसपास रह सकते हैं। 

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10 दिनों का आइसोलेशन काफी नहीं - फोटो : iStock
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर लोर्ना हैरिस कहते हैं, हालांकि यह एक अपेक्षाकृत छोटा अध्ययन है लेकिन हमारे परिणाम बताते हैं कि संभावित रूप से शरीर में वायरस के प्रभाव 10 दिनों के बाद तक भी बना रह सकता है, ऐसे में इतने दिनों के बाद आइसोलेशन खत्म कर देने से आगे वायरस के संचरण का जोखिम हो सकता है। दूसरी बात पारंपरिक आरटी-पीसीआर परीक्षण वायरल अंशों की उपस्थिति के बारे में बताते हैं। वे यह पता नहीं लगा सकते हैं कि क्या यह अभी भी सक्रिय है और व्यक्ति संक्रामक है या नहीं। इस बारे में भी ध्यान रखने की आवश्यकता है।
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संक्रमण का प्रसार रोकना जरूरी - फोटो : Pixabay
10 दिनों के बाद भी शरीर में वायरस रह सकते हैं सक्रिय
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर और अध्ययन की प्रमुख लेखक मर्लिन डेविस कहते हैं, 10 दिनों के आइसोलेशन के बाद भी लोगों में वायरस की सक्रियता के बारे में पता चलता है, ऐसे में होम आइसोलेशन के नए नियमों पर फिर से विचार किए जाने की आवश्यकता है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां पर अभी भी संक्रमितों के लिए 14 दिनों का होम आइसोलेशन अनिवार्य है, इसके बाद लोगों को लगातार विशेष बचाव के नियमों का पालन करते रहने की सलाह दी जाती है, जिससे संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिल सके। 


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स्रोत और संदर्भ
Persistence of clinically relevant levels of SARS-CoV2 envelope gene subgenomic RNAs in non-immunocompromised individuals

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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