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Obesity: मोटापा ग्रस्त महिलाएं हो जाएं सावधान, हृदय रोगों के अलावा इस जानलेवा समस्या का भी हो सकती हैं शिकार

Mon, 29 Jul 2024 12:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महिलाओं में मोटापे का खतरा - फोटो : istock
शरीर का वजन अधिक होना या मोटापे की समस्या को कई प्रकार की गंभीर और क्रोनिक बीमारियों का कारण माना जाता रहा है। बच्चे हों या बुजुर्ग, महिला हों या पुरुष मोटापे की स्थिति सभी के लिए खतरनाक हो सकती है। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने महिलाओं में अधिक वजन की समस्या को गंभीर बताते हुए इसे कंट्रोल में रखने की सलाह दी है।

स्ट्रोक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि जो महिलाएं 15 से 30 की उम्र में अधिक वजन वाली या मोटापे की शिकार होती हैं, उनमें 55 की उम्र से पहले इस्केमिक स्ट्रोक होने का जोखिम अधिक हो सकता है। हालांकि इसी उम्र के पुरुषों में मोटापे के कारण इतना जोखिम नहीं देखा गया है।

शोध के निष्कर्ष के आधार पर विशेषज्ञों ने कहा है कि कम उम्र से ही वजन को कंट्रोल रखने के लिए प्रयास जरूरी हैं। किशोरावस्था (13-18 की आयु) के बाद अगर वजन कम भी करते हैं तो भी स्ट्रोक का खतरा समाप्त नहीं होता इसलिए बचपन से ही वजन पर ध्यान देते रहना जरूरी है।
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ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम - फोटो : istock
इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम

गौरतलब है कि रक्त का थक्का (जिसे थ्रोम्बस के रूप में जाना जाता है) बनने के कारण मस्तिष्क की ओर जाने वाली धमनी के अवरुद्ध होने से इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है। मोटापे के शिकार लोगों में थक्का बनने का जोखिम अधिक होता है और इससे स्ट्रोक के अलावा हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है। स्ट्रोक को जानलेवा समस्या माना जाता है।

ये अध्ययन फिनलैंड में किया गया। साल 1980 से 2020 तक किए गए इस अध्ययन में 50 वर्ष की आयु के 10,491 लोग शामिल थे, जिनमें से 49% महिलाएं थीं। शोधकर्ताओं ने 14 और 31 या दोनों उम्र में इनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) मापा। इनमें 20 में से एक प्रतिभागी में थक्का बनने और इसके कारण स्ट्रोक का खतरा देखा गया। 
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महिलाओं में स्ट्रोक का जोखिम - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन की कुछ महत्वपूर्ण बातों पर विशेषज्ञों ने ध्यान आकृष्ट किया है।
  • 14 वर्ष की आयु में मोटापे की शिकार महिलाओं में थक्के के कारण स्ट्रोक का जोखिम 87% अधिक पाया गया।।
  • 31 वर्ष की आयु में मोटापे की शिकार महिलाओं में उचित वजन वाली महिलाओं की तुलना में क्लॉट के कारण होने वाले स्ट्रोक का खतरा 167% अधिक था।
  • 31 वर्ष में मोटापे वाली महिलाओं में हेमोरेजिक स्ट्रोक का जोखिम भी लगभग 3.5 गुना अधिक देखा गया।
  • जो पुरुष 14 या 31 वर्ष की आयु में अधिक वजन वाले या मोटापे से ग्रस्त थे, उनमें थक्के के कारण होने वाले स्ट्रोक का खतरा, महिलाओं की तुलना में कम था।

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मोटापा की शिकार महिलाएं - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

न्यूयॉर्क में नॉर्थवेल हेल्थ-साउथ यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजी डिवीजन के निदेशक डॉ. एंड्रयू रोगोव कहते हैं, 14 और 31 वर्ष की आयु में अधिक वजन वाली महिलाओं में पुरुषों की तुलना में स्ट्रोक की आशंका अधिक देखी गई।

अमेरिका में साल 2019 में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में स्ट्रोक से 55,000 अधिक मौतें हुईं। यह खतरा हार्मोनल परिवर्तनों और मौखिक गर्भनिरोधक गोलियों के अधिक सेवन के कारण हो सकता है। कई और जोखिम कारक हैं जो महिलाओं में स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देते हैं।
  • एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर, विशेषकर धूम्रपान करने वाली महिलाओं में।
  • पहली माहवारी 10 वर्ष या उससे कम उम्र में या 17 वर्ष से अधिक उम्र में होना।
  • मेनोपॉज समय से पहले होना (45 वर्ष की आयु से पहले)
  • हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का उपयोग।
  • गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं या मधुमेह का खतरा।
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स्ट्रोक से बचाव - फोटो : istock
स्ट्रोक के खतरे से कैसे बचें?

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का कहना है कि अधिकांश स्ट्रोक को स्वस्थ जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से रोका जा सकता है। कम उम्र से वजन को कंट्रोल रखना सबसे जरूरी है। इसके अलावा यदि आप धूम्रपान करती हैं, तो इसे तुरंत छोड़ दें। शारीरिक रूप से सक्रिय रहें, यहां तक कि हर घंटे 10 मिनट तक घूमना भी बैठने से बेहतर है।

रक्तचाप-शुगर को नियंत्रित रखें और स्वस्थ आहार लें। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किशोरावस्था या युवावस्था के दौरान अधिक वजन की शिकार महिलाओं में स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए समय पर ध्यान देना जरूरी है। अगर आप भी कम उम्र में ही अधिक वजन की शिकार हैं तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। 


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स्रोत और संदर्भ
Overweight in Adolescence and Young Adulthood in Association With Adult Cerebrovascular Disease


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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