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Study: पीठ दर्द से रहते हैं परेशान? कहीं यह नींद की कमी के कारण तो नहीं, जानिए क्या है इन समस्याओं का संबंध

Tue, 10 Jan 2023 04:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कमर दर्द की समस्याओं के कारण - फोटो : iStock
पीठ दर्द, विशेषकर पीठ के निचले हिस्से में होने वाले दर्द की समस्या काफी सामान्य है। लंबे समय तक ऑफिस में बैठे रहने वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। साल 2015 की ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी के अनुसार, वैश्विक आबादी के 7.3% (करीब 540 मिलियन) लोगों ने कभी न कभी पीठ के दर्द का अनुभव किया है।

लाइफस्टाइल की समस्याएं जैसे शारीरिक निष्क्रियता, बैठने के तरीके में गड़बड़ी और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को इसका प्रमुख कारण माना जाता रहा है। वहीं एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है या फिर जो लोग अनिद्रा के शिकार हैं, उनमें  पीठ के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव अधिक हो सकता है।

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने नींद की गुणवत्ता में कमी और पीठ दर्द के बीच के संबंधों के बारे में बताया है। वैज्ञानिकों ने पाया कि एक भी रात अगर आपकी नींद ठीक से पूरी नहीं हो पाती है तो अगले दिन पीठ में दर्द होने का जोखिम अधिक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दोनों स्थितियां एक दूसरे से संबंधित हैं जिसके बारे में सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
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पीठ में दर्द की समस्या - फोटो : iStock
खराब नींद की गुणवत्ता और पीठ के निचले हिस्से में दर्द

कई अध्ययनों से पता चला है कि खराब नींद की गुणवत्ता और पीठ के निचले हिस्से में दर्द के बीच संबंध हो सकता है। 9,611 प्रतिभागियों के बीच किए गए एक क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन ने निष्कर्ष में वैज्ञानिकों की टीम ने पाया था कि नींद की अवधि में कमी और गुणवत्ता संबंधी समस्या, दोनों ही पीठ के निचले हिस्से में दर्द का कारण बन सकती है।

इस बार के अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने इसके अन्य जीनोमिकल संबंधों का पता लगाने की कोशिश की। वैज्ञानिकों का कहना है कि नींद की कमी के कारण होने वाले कुछ परिवर्तन इस प्रकार की दिक्कतों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
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नींद की समस्या के कारण होने वाली दिक्कते - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

जीनोम-वाइड एसोसिएशन स्टडी (GWAS) में विशेष लक्षणों से जुड़े जीन की पहचान के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने 336,965 व्यक्तियों के डेटा और आनुवंशिकता का अध्ययन किया। कई स्तर पर किए गए विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने अनिद्रा और पीठ के निचले हिस्से में दर्द के कारणों का पता लगाया।

झेजियांग यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने फ्रंटियर्स इन न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया कि पीठ दर्द की समस्या से बचाव के लिए नींद की गुणवत्ता को सुधारने के उपाय करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। नींद की कमी न सिर्फ पीठ दर्द को बढ़ा देती है, साथ ही इससे कई प्रकार की और समस्याओं का जोखिम भी रहता है।

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नींद की समस्या और इसके दुष्प्रभाव - फोटो : Pixabay
नींद की कमी से होने वाली समस्याएं

अध्ययनों में पाया गया है कि नींद की कमी, शरीर में इंफ्लामेशन को बढ़ावा दे सकती है, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर मांसपेशियों में दर्द का जोखिम होता है। यह गठिया जैसी सूजन की स्थिति का भी कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, नींद की कमी का दीर्घकालिक रूप से भी सेहत पर कई प्रकार से दुष्प्रभाव हो सकता है। ऐसे लोगों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, अवसाद, दिल का दौरा पड़ने और स्ट्रोक का खतरा भी अधिक होता है।  
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नींद की गुणवत्ता को कैसे ठीक रखा जा सकता है? - फोटो : istock
नींद की गुणवत्ता और अवधि में कैसे सुधार करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अच्छी नींद सभी उम्र के लोगों के लिए जरूरी है। इसमें लगातार बनी रहने वाली कमी की समस्या के कारण कई प्रकार के दीर्घकालिक जोखिमों को खतरा होता है। कुछ सामान्य से उपाय नींद की समस्या को ठीक करने में मदद कर सकते हैं।
  • नींद का एक समय तय करें, रोज उसी समय पर सोएं। 
  • स्क्रीन टाइम कम करें, विशेषतौर पर सोने से एक घंटे पहले सभी प्रकार के स्क्रीन से दूरी बना लें।
  • कैफीन का सेवन कम करें।
  • नियमित व्यायाम की आदत बनाएं, विशेषतौर पर मेडिटेशन वाले अभ्यास अच्छी नींद पाने में सहायक हैं।
  • अच्छी नींद के लिए शराब या अन्य मादक पदार्थों से दूरी बनाएं।



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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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