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सावधान: सूर्य के प्रकाश में ना निकलने वालों को कैंसर का खतरा अधिक, अध्ययन में दावा

Mon, 05 Jul 2021 03:43 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शरीर के लिए सूर्य की रोशनी जरूरी (प्रतीकात्मक तस्वीर)Co - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों तरह से ही यह प्रमाणित हो चुका है कि पृथ्वी पर मौजूद सभी प्राकृतिक चीजें हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें से किसी की भी कमी, हमारी सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। सूरज की रोशनी भी हमारे स्वस्थ जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी से संबंधित हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने लोगों को एक गंभीर बीमारी के बारे में आगाह किया है।

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किए गए अध्ययन में बताया गया है कि सूर्य की पराबैंगनी (यूवीबी) किरणों के अपर्याप्त संपर्क के कारण लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ गया है। 186 देशों के डेटा का अध्ययन करते हुए वैज्ञानिकों की टीम ने बताया है कि खासकर वृद्ध लोगों में इस गंभीर कैंसर का जोखिम अधिक देखने को मिल रहा है, अन्य आयुवर्ग के लोगों को भी विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है।

इस अध्ययन पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि शहरी परिवेश के लोगों का सूर्य की रोशनी से सीधा संपर्क बहुत कम होता है, लोगों का ज्यादा से ज्यादा समय घरों या ऑफिस में बीत जाता है ऐसे में इन लोगों में खतरा अधिक होने का जोखिम है। आइए इस अध्ययन की अन्य महत्वपूर्ण बातों को भी जानते हैं।
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कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा - फोटो : Social media
सूर्य की किरणें और कोलोरेक्टल कैंसर का संबंध
अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय सैन डिएगो के शोधकर्ताओं ने विभिन्न देशों में कई आयु समूह के लोगों में यूवीबी किरणों और कोलोरेक्टल कैंसर के संबंध को जानने के लिए अध्ययन किया।अध्ययन के निष्कर्ष को जर्नल बीएमसी पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 186 देशों में 75 वर्ष तक के सभी आयु वर्ग के लोगों में यूवीबी की अपर्याप्तता को कारण कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम अधिक पाया। 
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सूर्य के कम संपर्क के कारण बढ़ी कोलोरेक्टल कैंसर की समस्या - फोटो : iStock
शरीर के लिए पर्याप्त मात्रा में आवश्यक है विटामिन डी
वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य की पराबैंगनी (यूवीबी) किरणों के अपर्याप्त संपर्क के कारण शरीर में विटामिन डी का स्तर कम हो जाता है। जिन लोगों को विटामिन डी की कमी होती है उनमें कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम अधिक होता है। अध्ययन के लेखकों के अनुसार विटामिन डी की कमी को ठीक करके कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सूर्य की रोशनी विटामिन डी का सबसे आसान और बेहतर स्रोत मानी जाती है, ऐसे में सभी लोगों को सुबह के समय सूर्य के संपर्क में आने की कोशिश जरूर करनी चाहिए।

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शरीर के लिए सूर्य की रोशनी बहुत आवश्यक - फोटो : iStock
यरोपीय देशों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले अधिक
कई रिपोर्टस में सामने आ चुका है कि यूरोपीय देशों में लोगों को कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा अधिक होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में हर साल साढ़े चार लाख से ज्यादा लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों का निदान किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कई अन्य कारकों के अलावा यरोपीय देशों धूप की कमी के कारण इस गंभीर कैंसर के मामलों का जोखिम अधिक देखा गया है। इसके अलावा ठंडे स्थान में रहने वाले लोगों की त्वचा की रंगत भी ऐसी होती है जो यूवीबी किरणों का ठीक तरीके से अवशोषण नहीं कर पाती है, इसे भी एक संभावित कारण के रूप में देखा जाना चाहिए।
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कोलोरेक्टल कैंसर में बड़ी आंत हो सकती है प्रभावित - फोटो : Social media
क्या है कोलोरेक्टल कैंसर की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोलोरेक्टल कैंसर मुख्यरूप से बृहदान्त्र और मलाशय को प्रभावित करता है। इसे आंत के कैंसर, पेट के कैंसर या मलाशय के कैंसर के रूप में भी जाना जाता है। इस कैंसर के शिकार 37 फीसदी लोगों को मल या मलाशय से खून आने और पेट में दर्द तथा 23 फीसदी लोगों को एनीमिया की समस्या हो सकती है। कुछ लोगों में कैंसर का पता तब चलता है जब यह फेफड़े, यकृत और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है। इसके लक्षण प्रभावित हिस्सों पर निर्भर कर सकते हैं।

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स्रोत और संदर्भ: 
Could age increase the strength of inverse association between ultraviolet B exposure and colorectal cancer

अस्वीकरण नोट: यह लेख  जर्नल बीएमसी पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के  निष्कर्ष के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।
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