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शोध: वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया पेट की चर्बी बढ़ने का प्रमुख कारण, ज्यादातर लोग इस वजह से हो जाते हैं शिकार

Fri, 15 Apr 2022 04:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बेली फैट की बढ़ती समस्या - फोटो : istock
पेट की चर्बी का बढ़ना जिसे 'बेली फैट' के नाम से जाना जाता है, न सिर्फ आपकी शारीरिक बनावट को खराब कर देता है साथ ही सेहत के लिहाज से भी इसे काफी गंभीर माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि बेली फैट की समस्या से परेशान लोगों में टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और कई अन्य शारीरिक समस्याओं का जोखिम अधिक होता है। यह मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर देता है जिसके कारण आपमें स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कई गुना बढ़ सकता है। सामान्यतौर पर खराब जीवनशैली विशेषकर लंबे समय तक बैठे रहने और आहार की गड़बड़ी को पेट की चर्बी बढ़ने का प्रमुख कारण माना जाता रहा है, पर हाल ही में शोधकर्ताओं ने इसके एक सबसे प्रमुख कारण का पता लगा लिया है।

'जर्नल द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी' में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि नींद की कमी के कारण लोगों में बेली फैट की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इसके अलावा आहार में कैलोरी की मात्रा बढ़ने और फैट वाली चीजों का अधिक सेवन भी इस समस्या का एक कारण हो सकता है। अगर रात की नींद सुधार ली जाए तो इस बढ़ती समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। आइए आगे इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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नींद की कमी के कारण फैट बढ़ने की दिक्कत - फोटो : Pixabay
नींद की कमी के कारण बेली फैट की समस्या

मायो क्लिनिक के शोधकर्ताओं ने पाया कि पिछले एक दशक में  पेट की चर्बी और नींद की समस्या, दोनों के बढ़ने के मामले रिपोर्ट किए गए हैं, दोनों ही स्थितियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। 

कार्डियोवैस्कुलर मेडिसिन शोधकर्ता नैमा कोवासिन के नेतृत्व में किए गए शोध से पता चलता है कि नींद की कमी के कारण पेट की चर्बी बढ़ने का खतरा  9 प्रतिशत बढ़ जाता है, वहीं यह समस्या आंत में भी चर्बी बढ़ा सकती है। नींद पूरी करने पर ध्यान देकर आप शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को बेहतर बनाए रख सकते हैं। 
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स्लीप डिसऑर्डर के नुकसान - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन में 12 स्वस्थ लोग शामिल थे, जिनमें मोटापे की समस्या नहीं थी। प्रतिभागियों के खाने पर कोई रोक नहीं थी, साथ ही उनकी नींद के समय पर ध्यान दिया गया। अध्ययन के दौरान नींद के प्रतिबंध के समय प्रतिभागियों ने प्रतिदिन 300 से अधिक अतिरिक्त कैलोरी का सेवन किया। शोध के अंत में पाया गया कि कैलोरी का बढ़ना पेट की चर्बी बढ़ने का कारण तो है ही पर जिन लोगों ने अच्छी नींद पूरी की, उनमें दूसरे लोगों की तुलना में बेली फैट का खतरा कम पाया गया।

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पेट की चर्बी की समस्या - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

शोधकर्ता नैमा कोवासिन कहते हैं, अगर आपके वजन में काफी मामूली बढ़ोतरी भी है, फिर भी यह आंत में वसा के संचय का कारण बन सकती है। हालांकि केवल सीटी स्कैन द्वारा ही इसका पता लगाया जा सकता है, वरना इसका निदान मुश्किल होता है।

नींद की कमी की समस्या को आमतौर पर हम हल्के में लेते हैं, वहीं फैट कम करने के लिए लाखों कोशिश करते रहते हैं। पर ध्यान रखने वाली बात यह है कि अगर आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है तो अन्य किए जाने वाले सभी उपाय अधिक कारगर साबित नहीं हो सकते।
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पेट की चर्बी से बचाव के लिए नींद जरूरी - फोटो : iStock
अध्ययन का निष्कर्ष

अध्ययन के प्रमुख अन्वेषक और कार्डियोवास्कुलर मेडिसिन के प्रोफेसर वीरेंड सोमर्स कहते हैं, इस अध्ययन से स्पष्ट पता चलता है कि भले ही आप दुबले, स्वस्थ या कम उम्र वाले हैं, फिर भी नींद की कमी आपके पेट में वसा के संचय और उन्नत स्थितियों में पेट की चर्बी बढ़ने का कारण बन सकती है। वजन कम करने के प्रयास में लगे लोगों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि बिना नींद पूरी किए आपके सारे अतिरिक्त उपाय बेकार हो सकते हैं। नींद की कमी शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। सभी लोगों को रोजाना रात में कम से कम 6-8 घंटे की निर्बाध नींद जरूर पूरी करनी चाहिए। 


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स्रोत और संदर्भ
Effects of Experimental Sleep Restriction on Energy Intake, Energy Expenditure, and Visceral Obesity

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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