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अध्ययन में खुलासा: भारतीय ब्रांड वाले नमक और चीनी में पाए गए माइक्रोप्लास्टिक्स, कैंसर का बढ़ सकता है खतरा

Tue, 13 Aug 2024 06:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नमक में माइक्रोप्लास्टिक - फोटो : freepik.com
नमक और चीनी के सेवन को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से हानिकारक माना जाता रहा है। इसके अधिक सेवन से डायबिटीज, शरीर में इंफ्लामेशन से लेकर ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियों का खतरा हो सकता है। हालांकि नमक-चीनी से सेहत को होने वाले नुकसान यहीं तक सीमित नहीं हैं, इससे कैंसर होने का खतरा भी काफी बढ़ सकता है।

असल में एक हालिया अध्ययन में पता चला है कि भारतीय ब्रांड वाले नमक और चीनी में माइक्रोप्लास्टिक्स हो सकते हैं। नमक और चीनी चाहे पैक्ड हों या अनपैक्ड लगभग सभी में माइक्रोप्लास्टिक्स पाए गए हैं। गौरतलब है कि माइक्रोप्लास्टिक्स को कैंसर के प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है।

पर्यावरण अनुसंधान संगठन टॉक्सिक्स लिंक ने मंगलवार (13 अगस्त) को इस अध्ययन को 'माइक्रोप्लास्टिक्स इन सॉल्ट एंड शुगर' नाम से प्रकाशित किया है। शोधकर्ताओं ने कहा माइक्रोप्लास्टिक्स वाली चीजें कई प्रकार के कैंसर के साथ मस्तिष्क और तंत्रिकाओं से संबधित विकारों को भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं। सभी लोगों को ऐसी चीजों को लेकर विशेष सावधानी और सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है।
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माइक्रोप्लास्टिक और इसका जोखिम - फोटो : istock
नमक और चीनी में माइक्रोप्लास्टिक 

इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने भारत में बिकने वाले टेबल सॉल्ट, सेंधा नमक, समुद्री नमक और स्थानीय कच्चा नमक जैसे 10 प्रकार के नमकों पर अध्ययन किया। इसके साथ ऑनलाइन और स्थानीय बाजारों से खरीदी गई पांच प्रकार की चीनी का भी परीक्षण किया गया। अध्ययन में सभी नमक और चीनी के सैंपल में फाइबर और छोटे टुकड़ों सहित विभिन्न रूपों में माइक्रोप्लास्टिक्स की उपस्थिति का पता चला। इन माइक्रोप्लास्टिक्स का आकार 0.1 मिमी से 5 मिमी तक था। आयोडीन युक्त नमक में माइक्रोप्लास्टिक्स की उच्चतम मात्रा पाई गई।

इस आकार के माइक्रोप्लास्टिक्स गंभीर रूप से सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले हो सकते हैं।
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नमक और चीनी में पाए गए माइक्रोप्लास्टिक - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

टॉक्सिक्स लिंक के संस्थापक-निदेशक रवि अग्रवाल ने बताया, हमारे अध्ययन का उद्देश्य माइक्रोप्लास्टिक पर मौजूदा वैज्ञानिक डेटाबेस में योगदान देना था। माइक्रोप्लास्टिक और इसके कारण होने वाले स्वास्थ्य जोखिम बड़ी चिंता का कारण रहे हैं। 

अध्ययन में सभी नमक और चीनी के सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक पाया जाना चिंताजनक है। मानव स्वास्थ्य पर माइक्रोप्लास्टिक के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों पर तत्काल, व्यापक शोध की आवश्यकता है। नमक के सैंपलों में माइक्रोप्लास्टिक की सांद्रता प्रति किलोग्राम सूखे वजन में 6.71 से 89.15 टुकड़े तक थी। ये मात्रा हमारी सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है। 

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चीनी में भी पाए गए माइक्रोप्लास्टिक - फोटो : istock
चीनी में भी पाई गई मात्रा

चीनी के सैंपलों में माइक्रोप्लास्टिक की सांद्रता 11.85 से 68.25 टुकड़े प्रति किलोग्राम तक थी, जिसमें सबसे अधिक सांद्रता नॉन-ऑर्गेनिक चीनी में पाई गई। चूंकि हमारे घरों में नमक और चीनी दोनों का रोजाना सेवन किया जाता रहा है इसलिए जोखिमों को लेकर अलर्ट रहना बहुत जरूरी है।

अध्ययनों में पाया गया था कि औसत भारतीय हर दिन 10.98 ग्राम नमक और लगभग 10 चम्मच चीनी खाता है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसित सीमा से बहुत अधिक है। इसमें माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी और भी चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
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कैंसर का खतरा - फोटो : istock
माइक्रोप्लास्टिक के हो सकते हैं कई नुकसान

हाल ही में किए गए शोध में फेफड़े, हृदय जैसे मानव अंगों और यहां तक कि स्तन के दूध और अजन्मे शिशुओं में भी माइक्रोप्लास्टिक पाया गया है।

शोधकर्ताओं ने कहा अगर आप भी प्लास्टिक की बोतल में पानी पीते हैं तो भी सावधान हो जाइए। प्लास्टिक की बोतल में प्रत्येक लीटर पानी में प्लास्टिक के 100,000 से अधिक सूक्ष्म टुकड़े हो सकते हैं।  केवल एक बोतल पानी पीने से हम 10 गुना अधिक मात्रा में प्लास्टिक को शरीर में प्रवेश की अनुमति दे रहे होते हैं। प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े जो बोतलों की परतों से निकालते हैं उन्हें माइक्रोप्लास्टिक्स और नैनोप्लास्टिक्स कहा जाता है। ये समय के साथ शरीर में कई बीमारियों का कारक हो सकते हैं।



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स्रोत और संदर्भ
Microplastic pollution in table salt and sugar: Occurrence, qualification and quantification and risk assessment


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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