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Infertility: क्या मोबाइल का अधिक इस्तेमाल घटा रहा है प्रजनन क्षमता? पैंट की जेब में फोन रखना कितना खतरनाक

Tue, 17 Sep 2024 04:53 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रजनन की समस्याएं - फोटो : freepik.com
आज के समय में शायद ही कोई होगा जो मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करता हो। अपनी कई तरह की दैनिक जरूरतों के लिए हम मोबाइल फोन पर निर्भर हो गए हैं। मोबाइल फोन्स ने जहां जिंदगी को काफी आसान बना दिया है वहीं इसके कारण होने वाली कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भी विशेषज्ञ अलर्ट करते रहे हैं।

मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल को शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत के लिए नुकसानदायक पाया गया है। विशेषतौर पर इससे निकलने वाली नीली रोशनी और रेडिएशन के अध्ययनों में कई दुष्परिणाम बताए गए हैं।

क्या मोबाइल फोन का अधिक इस्तेमाल प्रजनन क्षमता की समस्याओं को भी बढ़ा रहा है? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है। कई रिपोर्ट्स भी बताते हैं कि मोबाइल फोन्स से निकलने वाले रेडिएशन स्पर्म क्वालिटी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। क्या वास्तव में मोबाइल इतना खतरनाक है? आइए इस बारे में समझते हैं।
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मोबाइल का बढ़ता इस्तेमाल - फोटो : Adobe Stock
मोबाइल फोन कम कर रहे हैं प्रजनन क्षमता?

अध्ययनों की रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले आधी सदी में पुरुषों की प्रजनन क्षमता, शुक्राणुओं की संख्या में कमी जैसे मामले बढ़े हैं। इसके लिए विशेषज्ञ पर्यावरण और जीवनशैली के कई कारकों को जिम्मेदार मानते हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि लो-लेवल रेडियोफ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिव फील्ड का उत्सर्जन करने वाले मोबाइल फोन्स के कारण भी पुरुष प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

स्विस लोगों पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के साथ शुक्राणुओं की सांद्रता और इनकी संख्या में कमी आई है। 
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स्पर्म क्वालिटी पर असर - फोटो : Freepik.com
हालिया अध्ययन में इन संबंधों से किया इनकार

हालांकि इससे संबंधित अन्य अध्ययन इन तथ्यों से इनकार करते हैं

हाल ही में वैज्ञानिकों की एक टीम ने मोबाइल से ब्रेन कैंसर के खतरे की जांच की। जिसमें पाया गया कि मोबाइल का उपयोग भले ही कई मामलों में नुकसानदायक है पर इससे मस्तिष्क में कैंसर का जोखिम नहीं होता है। विशेषज्ञों की टीम ने ये भी जानने की कोशिश की कि क्या मोबाइल से निकलने वाले तरंग स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित करते हैं? 

ऑस्ट्रेलियन रेडियन प्रोटेक्शन और परमाणु सुरक्षा एजेंसी में विशेषज्ञ प्रोफेसर केन कारिपिडिस कहते हैं, फोन और शुक्राणुओं की संख्या में गिरावट के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया है। रेडियो तरंगों के संपर्क की अधिक सीमा वाली कुछ महिलाओं में जन्म के समय बच्चे के अधिक वजन की दिक्कतें जरूर रिपोर्ट की गई हैं। 

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स्पर्म क्वालिटी जांच के लिए अध्ययन - फोटो : istock
पैंट की जेब में फोन रखना खतरनाक?

मोबाइल फोन्स को लेकर एक चर्चा ये भी रही है कि पैंट की जेब में (जननांगों के अधिक पास) फोन रखने से भी प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि पैंट की जेब में फोन रखने और वीर्य की गुणवत्ता में कमी के बीच भी कोई संबंध नहीं है।

विशेषज्ञ कहते हैं, मोबाइल से प्रजनन पर असर के बीच के संबंधों को स्पष्ट करने के लिए और अधिक और विस्तृत शोध की आवश्यकता है।
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मोबाइल के कारण होने वाले दुष्प्रभाव - फोटो : Adobe Stock
क्या है निष्कर्ष?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अभी तक के परिणाम काफी मिले-जुले देखे गए हैं। कुछ अध्ययन मानते हैं कि मोबाइल फोन्स प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं जबकि कुछ इससे इनकार करते हैं। हालांकि सुरक्षात्मक दृष्टि से मोबाइल का कम से कम इस्तेमाल ही सुरक्षित है। मोबाइल आपकी शारीरिक निष्क्रियता बढ़ा देते हैं, जिसे स्षप्ट तौर पर प्रजनन विकारों के लिए बड़ा कारण माना जाता रहा है। इसलिए मोबाइल पर रोजाना बीतने वाली अवधि को कम करना संपूर्ण स्वास्थ्य में लाभकारी हो सकता है।



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स्रोत और संदर्भ

WHO systematic review finds no conclusive evidence on effect of RF-EMF on male fertility

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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