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चिंताजनक: इस वजह से अगले 25 साल में चार करोड़ से अधिक मौतों की आशंका, भारत जैसे देशों में खतरा और भी अधिक

Tue, 17 Sep 2024 12:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा - फोटो : amarujala.com
पिछले दो-तीन दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि कई प्रकार के संक्रामक रोग और क्रोनिक बीमारियों ने वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा की हैं। युवाओं में बढ़ती ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की समस्या हो या कोविड-19 जैसी गंभीर महामारी, इसके कारण न सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है साथ ही बड़ी संख्या में लोगों की मौतें भी हुई हैं। इसी तरह की एक और तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य चुनौती को लेकर हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अलर्ट किया है।

द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के बढ़ते गंभीर खतरे को लेकर सावधान किया है। एक वैश्विक विश्लेषण के अनुसार साल 1990 से 2021 के बीच एंटीबायोटिक प्रतिरोध या रेजिस्टेंस के कारण दुनियाभर में हर साल एक मिलियन (10 लाख) से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। वैज्ञानिकों ने चिंता जताते हुए कहा कि ये संकट और भी बढ़ता जा रहा है। अगर इस दिशा में तुरंत सुधार वाले बड़े फैसले न लिए गए तो अगले 25 सालों में 39 मिलियन (3.9 करोड़) यानी करीब चार करोड़ लोगों की जान जा सकती है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि भारत सहित एशियाई देशों के लिए भी ये बड़ी चुनौती बनते जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को इस संबंध में बड़े फैसले लेने होंगे, वरना एक समय ऐसा आ जाएगा जहां लोगों को दवाओं को सख्त जरूरत होगी और ये दवाएं काम नहीं करेंगी।



ये पढ़ें-  वैज्ञानिकों की चेतावनी- 'हमें दवाओं की सख्त जरूरत होगी पर उनका असर नहीं होगा'
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बढ़ रहा है एंटीबायोटिक दवाओं का प्रतिरोध - फोटो : freepik.com
भारत सहित कई एशियाई देशों में खतरा अधिक

ग्लोबल रिसर्च ऑन एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (जीआरएएम) प्रोजेक्ट के शोधकर्ताओं ने कहा कि भविष्य में एंटीबायोटिक प्रतिरोध से होने वाली मौतों का अनुमान दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ज्यादा है। जिसमें भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं। यहां साल 2025 से 2050 के बीच सीधे तौर पर यहां कुल 11.8 मिलियन (1.18 करोड़) से अधिक मौतों की आशंका है।

साल 1990 से 2021 के बीच के आंकड़ों से पता चलता है कि 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में एंटीबायोटिक या एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के कारण होने वाली मौतों में 80 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। आने वाले वर्षों में यह वृद्ध लोगों को अधिक प्रभावित कर सकता है।
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस में संक्रमण बढ़ने का खतरा - फोटो : freepik.com
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस होता क्या है? 

एंटीबायोटिक प्रतिरोध या रेजिस्टेंस तब होता है जब बैक्टीरिया या कवक जैसे रोगाणुओं को मारने के लिए बनाई गई दवाओं के प्रति ये रोगाणु बचाव की क्षमता विकसित कर लेते हैं। एंटीबायोटिक दवाएं मुख्यरूप से संक्रमण की स्थिति में रोगजनकों को खत्म करने के लिए दी जाती हैं, पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति में ये दवाएं काम करना ही बंद कर देती हैं। इस स्थिति में दवा लेने पर भी रोगाणु मरते नहीं बल्कि और बढ़ते रहते हैं। ऐसे में संक्रमणों का इलाज करना कठिन और असंभव भी हो सकता है।

जिस तरह से दुनियाभर में संक्रामक रोगों के मामले बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की बढ़ती समस्या को विशेषज्ञ काफी गंभीर मानते हैं।

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बच्चों की सेहत पर खतरा - फोटो : istock
बच्चों में भी खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, थोड़ी राहत की खबर ये है कि 1990 से 2021 के बीच में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण होने वाली मृत्यु में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है।

वाशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैट्रिक्स (आईएचएमई) में प्रोफेसर केविन इकुटा कहते हैं, पिछले तीन दशकों में छोटे बच्चों में सेप्सिस (रक्तप्रवाह संक्रमण) और एंटीबायोटिक प्रतिरोध से होने वाली मौतों में कमी अविश्वसनीय उपलब्धि है। हालांकि, इन निष्कर्षों से ये भी पता चलता है कि बच्चों में संक्रमण के मामले कम हुए हैं, लेकिन जब ये होते हैं तो उनका इलाज करना कठिन हो जाता है।

पिछले अध्ययनों में विशेषज्ञों ने चिंता जताई थी कि बच्चों में निमोनिया के लिए दी जाने वाली कई दवाएं बेअसर हो रहीं है जिससे गंभीर रोगों का खतरा हो सकता है।
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दवाओं के उपयोग को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : istock
कैसे बचें इस खतरे से?

लेखकों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवा में सुधार और एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतकर भविष्य में करोडों लोगों की जान बचाई जा सकती है। यह अध्ययन समय के साथ एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के रुझानों का पहला वैश्विक विश्लेषण है। आईएचएमई के एक अन्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह समझना महत्वपूर्ण है कि समय के साथ एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध से होने वाली मौतों के रुझान कैसे बदल गए हैं और भविष्य में उनमें कैसे सुधार किया जा सकता है।

इस बढ़ते खतरे से बचने के लिए विशेषज्ञ कहते हैं, हमेशा किसी विशेषज्ञ की सलाह से ही दवा लें। बिना प्रिस्क्रिप्शन ओवर-द-काउंटर, इंटरनेट-यूट्यूब से देखकर न तो खुद डॉक्टर बनें, न ही खुद से दवा लेना शुरू करें, विशेषतौर पर कोई भी एंटीबायोटिक दवा।




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स्रोत और संदर्भ

Global burden of bacterial antimicrobial resistance 1990–2021: a systematic analysis with forecasts to 2050

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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