दुनिया के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण के एकबार फिर से बढ़ते मामले स्वास्थ्य संगठनों के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। वैक्सीनेशन की दो डोज को संक्रमण से सुरक्षा देने में काफी असरदार बताया जा रहा है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि देश की केवल 4 फीसदी आबादी को ही अब तक दोनों खुराक मिल पाई हैं। कई स्थानों पर वैक्सीनेशन की लगातार कमी बनी हुई है जिसके कारण पहली डोज ले चुके लोग अब भी दूसरी डोज के लिए इंतजार कर रहे हैं। वैक्सीनेशन के बूस्टर डोज की कमी के बीच हालिया अध्ययन ने लोगों को बड़ी उम्मीद दी है।
सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि रूस की वैक्सीन स्पुतनिक-वी, की केवल एक डोज भी सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ मजबूत एंटीबॉडी बनाने में पर्याप्त हो सकती है। इस अध्ययन को स्वास्थ्य विशेषज्ञ उन देशों के लिए काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं जो लगातार कोविड वैक्सीन की कमी की समस्यओं का सामना कर रहे हैं। भारत के संदर्भ में इस अध्ययन को दो स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, पहला- यहां भी वैक्सीनेशन की कमी की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी हुई है और दूसरा- देश में स्पुतनिक-वी वैक्सीन को प्रयोग में लाया जा रहा है।
आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि स्पुतनिक-वी वैक्सीन को लेकर अध्ययन में और किन महत्वपूर्ण बातों के बारे में सूचित किया गया है?