फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sonali Phogat Death: कम उम्र की महिलाओं में बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा, जानिए इसके कारण और बचाव के तरीके

Tue, 23 Aug 2022 05:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
सोनाली फोगाट का निधन - फोटो : instagram
कम उम्र में हार्ट अटैक के कारण होने वाली मौतों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मंगलवार को राजनीति और मनोरंजन जगत से जुड़ी सोनाली फोगट का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया। 41 वर्षीय सोनाली बिग बॉस 14 के शो में भी नजर आ चुकी थीं। हाल के वर्षों में कम उम्र में बिगबॉस के ही कंटेस्टेंट रहे सिद्धार्थ शुक्ला, मशहूर गायक केके और कन्नड़ फिल्मों के स्टार पुनीत कुमार का भी हार्ट अटैक के कारण निधन हो चुका है।

सोनाली फोगट की मौत के बाद से बॉलीवुड और राजनीति जगत में शोक की लहर है। इसके साथ ही एक बार फिर से यह सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि आखिर कम उम्र में लोग गंभीर हृदय रोगों के शिकार क्यों होते जा रहे हैं?

सोनाली फोगट की हार्ट अटैक से मौत ने महिलाओं में हार्ट अटैक के जोखिमों को लेकर भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अध्ययनों से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में धमनी में बिना किसी गंभीर रुकावट के भी दिल का दौरा पड़ने की आशंका अधिक होती है। इसके अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों के लिए कई प्रकार की अन्य स्थितियां जैसे तनाव, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी कारक हो सकती हैं। सोनाली को बिगबॉस शो के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या भी रही थी। आइए समझते हैं कि महिलाओं में हार्ट अटैक के क्या कारण हो सकते हैं और इससे सुरक्षित रहने के लिए कौन से उपाय किए जाने चाहिए?
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
हार्ट अटैक की बढ़ती समस्या - फोटो : istock
कम उम्र की महिलाओं में हार्ट अटैक का जोखिम

जॉन हॉप्किंस मेडिसिन की एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों में आश्चर्यजनक रूप से परिवर्तन देखा जा रहा है। इसमें वृद्ध लोगों की तुलना में 35-54 की आयु वाले लोगों में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हुए देखे जा रहे हैं। जॉन्स हॉपकिन्स कम्युनिटी फिजिशियन-हार्ट केयर में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ वर्जीनिया कॉलिवर कहते हैं, "इस अवलोकन संबंधी अध्ययन में देखा गया है कि युवा महिलाओं में हार्ट अटैक का जोखिम और भी अधिक हो सकता है। इसके लिए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कुछ जोखिम कारकों को रेखांकित किया है।
विज्ञापन

3 of 5
महिलाओं में हार्ट अटैक की समस्या - फोटो : iStock
महिलाओं में हार्ट अटैक के क्या लक्षण होते हैं?

वैसे तो पुरुषों और महिलाओं दोनों में सीने में दर्द या बेचैनी को हार्ट अटैक का प्रमुख संकेत माना जाता रहा है हालांकि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसके कुछ लक्षण अलग प्रकार के भी हो सकते हैं जिसपर ध्यान देते रहना आवश्यक हो जाता है। 
  • शरीर के ऊपरी हिस्सों (पीठ, गर्दन, जबड़े, हाथ या पेट) में दर्द या बेचैनी 
  • सांस लेने में कठिनाई या चक्कर आना।
  • अधिक पसीना आना।
  • थकान, मतली और उल्टी

4 of 5
कम उम्र में बढ़ती हार्ट अटैक की समस्या - फोटो : Pixabay
महिलाओं में हार्ट अटैक के कारणों के बारे में जानिए

जॉन हॉप्किंस की रिपोर्ट बताती है कि जो महिलाएं बर्थ कंट्रोल पिल्स का सेवन अधिक करती हैं, उनमें दिल या पैरों में रक्त का थक्का बनने का खतरा अधिक पाया गया है, जो हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों के जोखिम को भी बढ़ा देती है।  इसलिए, यदि आपको उच्च रक्तचाप या थक्के की समस्या है तो इस तरह की गोलियों से बचाव जरूरी हो जाता है।

इसके अलावा हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण भी महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा अधिक हो सकता है। मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास और आहार की गड़बड़ी भी इस जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
हार्ट अटैक के खतरे को समझने की आवश्यकता - फोटो : iStock
हृदय रोग और हार्ट अटैक से बचाव के लिए क्या करें?

हृदय रोगों के कुछ जोखिम कारक आपके नियंत्रण से बाहर होते हैं, हालांकि कई चीजों पर ध्यान देकर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने का प्रयास किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवनशैली में स्वस्थ बदलाव के माध्यम से दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को 80 फीसदी तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञ सभी लोगों को नियमित व्यायाम के साथ धूम्रपान-शराब से दूरी बनाने और तनाव की स्थिति को कंट्रोल करने की सलाह देते हैं।



----------------
नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें