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अध्ययन: अच्छी दोस्ती आपको बना सकती है दीर्घायु, जानिए दोस्ती और लंबी आयु का कनेक्शन

Fri, 20 Aug 2021 01:54 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लंबी और स्वस्थ आयु कैसे पाएं? - फोटो : istock
जीवन के तमाम सुख और दुख साझा करने के लिए सभी को एक खास दोस्त की जरूरत होती है। माना जाता है कि दोस्तों के साथ दिल की बात कर लेने से परेशानी आधी हो जाती है, मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेषज्ञ भी लोगों को अच्छे दोस्त बनाने की सलाह देते हैं, पर क्या आप जानते हैं किअच्छे दोस्त आपके लिए लंबी आयु का वरदान भी साबित हो सकते हैं? यदि आपके पास अच्छे दोस्त हैं तो आपके दीर्घायु होने की संभावना 50 फीसदी तक बढ़ सकती है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है।
पीएलओएस मेडिसिन रिसर्च जर्नल में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों के सामाजिक संबंध अच्छे होते हैं, उनके जीवन रहने की संभावना भी अधिक हो सकती है। वैज्ञानिक कहते हैं, सामान्यतौर पर लंबी आयु का जिक्र आते ही लोगों का ध्यान आहार या व्यायाम पर चला जाता है, पर इस अध्ययन में इससे हटकर दोस्ती और सामाजिक रिश्तों की मजबूती को लंबी आयु से जोड़कर देखने की कोशिश की गई है। लंबी आयु के लिए जीवनशैली में बदलाव के साथ अब लोगों को अच्छे दोस्त की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। आइए अध्ययन के महत्वपूर्ण पहलुओं को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।
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अच्छे दोस्तों का होना जरूरी - फोटो : istock
क्यों खास है यह अध्ययन?
दोस्ती और अच्छे सामाजिक रिश्ते किस तरह से आयु को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं, इस बारे में जानने के लिए वैज्ञानिकों ने 148 अध्ययनों में 308,849 प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों के जीवन में अच्छे दोस्त होते हैं उनके जीवित रहने की संभावना 50 फीसदी तक अधिक हो सकती है। वहीं जो लोग अकेला या एकांत जीवन जीते हैं, उनके जीवित रहने की अवधि में समय से साथ गिरावट दर्ज की गई है। 
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अच्छे दोस्त होने से कम होती हैं परेशानियां - फोटो : Pixabay
अच्छी दोस्ती और लंबी आयु का क्या कनेक्शन है?
रॉयल सोसाइटी पब्लिशिंग की एक रिपोर्ट के अनुसार दो मुख्य परिकल्पनाएं हैं, जिसके आधार पर अध्ययन में यह जानने को मिला है कि लंबी आयु के लिए अच्छे दोस्त होना या सामाजिक संबंधों का बेहतर रहना आवश्यक है।
  • पहली परिकल्पना में वैज्ञानिकों का मानना है कि अच्छे दोस्त हमेशा भावनात्मक रूप से सहायक होते हैं, वह आपकी बातों को सुनते हैं। किसी भी परेशानी को उनके साथ शेयर करने से दुख की गंभीरता और अवृति दोनों कम हो जाती हैं। ऐसे में यह जीवन की तनावपूर्ण घटनाओं और कई तरह के रोगों से दूर रखने में आपके लिए सहायक है।
  • दूसरा अच्छे दोस्त या अच्छे सामाजिक रिश्ते आपको  प्रत्यक्ष रूप से भावनात्मक और व्यवहारिक शक्ति प्रदान करते हैं, इसका असर लोगों के जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव और स्वस्थ आदतों के रूप में देखा जा सकता है। यह दोनों ही पहलू स्वस्थ और लंबी आयु के लिए आवश्यक हैं।

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एकांत में रहना सेहत के लिए नुकसानदायक - फोटो : Social media
सोशल आइसोलेशन हो सकता है नुकसानदायक
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई अध्ययनों में पाया गया है कि सोशल आइसोलेशन यानी की लोगों से कट कर जीने की आदत स्वास्थ्य पर कई तरह से नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इतना ही नहीं एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि लंबे समय तक सोशल आइसोलेशन में रहने वाले लोगों में अकाल मृत्यु का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में काफी अधिक हो सकता है। इतना ही नहीं, सोशल आइसोलेशन में रहने वाले लोगों में डेमेंशिया का जोखिम भी 50 फीसदी तक अधिक होता है। 
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स्वस्थ और खुश रहने के लिए बनाएं अच्छे दोस्त - फोटो : Social media
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
स्वास्थ्य से जुड़ी ऑस्ट्रेलिया सरकार की एक वेबसाइट भी इस बात पर जोर देती है कि लोगों को अपने रिश्तों को मजबूत करने पर ज्यादा समय और ध्यान देना चाहिए। अच्छे दोस्तों का साथ कई तरह की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम करने में सहायक है। जिन लोगों के अच्छे दोस्त होते हैं, उन लोगों को तनाव और डिप्रेशन का खतरा कम होता है, यह दोनों स्थितियां लोगों की आयु को कम कर देती हैं।
हालांकि वैज्ञानिक कहते हैं, अच्छे दोस्त का मतलब खूब सारे दोस्तों से नहीं है, अच्छा दोस्त मतलब जो आपके सुख-दुख को अच्छे से समझे। अच्छे दोस्त का मतलव भावनात्मक जुड़ाव से है, इसलिए बहुत सारे नए लोगों से रिश्ते बनाने से बेहतर है जो रिश्ते हैं उनको और मजबूत किया जाए। 



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नोट: यह लेख तमाम अध्ययनों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित अध्ययन की कॉपी संलग्न है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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