पिछले तीन साल से जारी कोरोना महामारी से बचाव के लिए हम सभी ने अपनी दिनचर्या में कई तरह के बदलाव किए, सोशल आइसोलेशन उसमें से एक है। इस आदत के माध्यम से कोरोना के प्रसार को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि अध्ययनकर्ताओं ने एक हालिया अध्ययन में पाया है कि सोशल आइसोलेशन के कारण लोगों में डेमेंशिया रोग का खतरा बढ़ रहा है।
डेमेंशिया, दिमाग की बनावट में होने वाले बदलाव के कारण होने वाली बीमारी है, जिसमें दिमाग की क्षमता कम हो जाती है और रोगियों को स्मृति, सोच, आचरण तथा मनोभाव से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सोशल आइसोलेशन का हमारे शरीर पर किस प्रकार से असर होता है इसको जानने के लिए किए गए शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह आदत 50 से अधिक आयु वालों में डेमेंशिया के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में 40 लाख से अधिक लोगों को डेमेंशिया की समस्या है। आमतौर पर 65 की आयु के बाद इस रोग का जोखिम अधिक होता है, पर हाल के वर्षों में इसकी आयु सीमा में भी कमी देखी जा रही है।