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सेहत की बात: वजन ठीक है और शरीर में भी महसूस नहीं होती कोई दिक्कत, क्या फिर भी हेल्थ चेकअप जरूरी?

Tue, 08 Sep 2026 08:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

30 के बाद डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं बिना स्पष्ट लक्षण के विकसित हो सकती हैं। भारतीयों में कम उम्र में टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ 30 वर्ष के बाद नियमित स्क्रीनिंग की सलाह देते हैं।
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सेहत की जांच - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आपकी उम्र 30 साल या उससे ज्यादा है? अगर हां तो अभी से अपनी सेहत को लेकर सावधान हो जाइए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई बीमारियां जो एक दशक पहले तक बुजुर्गों में हुआ करती थीं, वो अब कम उम्र वालों को भी अपना शिकार बनाती जा रही है। भले ही आपका वजन सामान्य है, रोज काम पर जा रहे हैं और कोई खास दर्द या परेशानी नहीं है फिर भी समय-समय पर हेल्थ टेस्ट और डॉक्टरी सलाह लेते रहें। कई बार बीमारियां शुरू में तो कोई लक्षण नहीं दिखातीं लेकिन अंदर ही अंदर तेजी से बढ़ती रहती हैं। भले ही आप दिखने में स्वस्थ हो, पर अंदर बीमारियों पनप रही हो सकती हैं।

अमर उजाला में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में हमने बताया था कि स्वस्थ और फिट दिखते हैं, फिर भी अंदर से बीमार हो सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट संकेत के रह सकता हैं। डायबिटीज और प्रीडायबिटीज भी शुरुआती चरण में चुपचाप बढ़ती रहती है। यही वजह है कि सिर्फ फिट दिखना पर्याप्त नहीं है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की गाइडलाइन के अनुसार, भले ही आपमें बीमारियों के कोई लक्षण न हों फिर भी 30 वर्ष की उम्र के बाद डायबिटीज-लिपिड प्रोफाइल की जांच जरूर कराते रहना चाहिए। 
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 30 की उम्र के बाद अपनी सेहत को लेकर तब और अलर्ट हो जाना चाहिए जब आपके  परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अधिक वजन जैसी दिक्कतें रही हैं। बीमारियों की फैमिली हिस्ट्री आपको भी शिकार बना सकती है।

डायबिटीज का जोखिम

भारतीयों में डायबिटीज एक बड़ा खतरा है। ब्लड शुगर बढ़े रहने के बावजूद कई लोगों में लंबे समय तक कोई खास लक्षण नहीं दिखता। व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है, लेकिन अंदर ही अंदर शुगर का स्तर बढ़ता रहता है।
 
  • 30 वर्ष के बाद टाइप-2 डायबिटीज की जांच खासतौर पर महत्वपूर्ण हो जाती है। परिवार में डायबिटीज का इतिहास, अधिक वजन, शारीरिक गतिविधियों में कमी है तो आपका जोखिम और भी बढ़ सकता है।
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Adobe Stock
हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का खतरा

हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट बीमारी माना जाता है क्योंकि कई लोगों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। सिरदर्द या चक्कर न आने का मतलब यह नहीं कि ब्लड प्रेशर सामान्य है। इसी तरह बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी आमतौर पर कोई खास लक्षण नहीं देता। इसका पता लिपिड प्रोफाइल जैसे टेस्ट से चलता है।
 
  • 30 के बाद समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराना और अपने जोखिम के अनुसार कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना आपको दिल की बड़ी समस्याओं से बचाने में मददगार हो सकता है। 


वजन सामान्य है तो भी जोखिम हो सकता है

वजन सामान्य होने का मतलब यह नहीं कि शरीर के अंदर सब कुछ सामान्य है। वजन कंट्रोल में होने के बावजूद अगर आपकी शारीरिक गतिविधि कम और खानपान संतुलित  है तो इससे मेटाबोलिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह धूम्रपान, परिवार में डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की हिस्ट्री रही है तो भी आपको अलर्ट रहना चाहिए।
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समय रहते कराएं हेल्थ की जांच - फोटो : Freepik.com
30 के बाद कौन-सी जांच जरूरी हो सकती है?

डॉक्टर कहते हैं, 30 की उम्र के बाद सभी लोगों को नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहना चाहिए। हालांकि आपके लिए कौन से टेस्ट जरूरी है इसे जानने के लिए डॉक्टर की सलाह लें।  डॉक्टर आपकी उम्र, परिवार का हिस्ट्री, वजन, ब्लड प्रेशर-खानपान को देखकर तय करते हैं कि आपको किन परीक्षणों की जरूरत है? आम तौर पर ब्लड प्रेशर की नियमित जांच और डायबिटीज की स्क्रीनिंग सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। जोखिम के आधार पर लिपिड प्रोफाइल भी कराया जा सकता है। 

अगर आपको लगातार थकान, वजन में असामान्य बदलाव या कोई दूसरी परेशानी हो, तो डॉक्टर से समय रहते सलाह लेकर जांच कराएं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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