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लिवर डिजीज: क्या दुबले-पतले लोगों को भी हो सकता है फैटी लिवर रोग? क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Tue, 08 Sep 2026 08:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दुबले-पतले लोगों को भी फैटी लिवर रोग हो सकता है। शोध के अनुसार सामान्य बीएमआई वाले लोगों में भी लिवर में फैट जमा हो सकता है, खासकर इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज जैसे जोखिमों के कारण ये समस्या बढ़ सकती है। भारतीय लोगों में फैटी लिवर की समस्या ज्यादा देखी जा रही है।
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लिवर की बीमारियां - फोटो : Amarujala.com/AI
फैटी लिवर की समस्या वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। शराब न पाने वाले लोगों में होने वाली नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) का नाम हाल ही में बदलकर मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) कर दिया गया है। ये दुनियाभर में लिवर की सबसे आम क्रोनिक बीमारी है, जो 32% से 38% वयस्क आबादी को प्रभावित करती है।

भारत में लगभग 38% से 40% वयस्क फैटी लिवर की बीमारी से प्रभावित हैं, जिससे यह स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी और तेजी से बढ़ती हुई समस्या बन गई है। लिवर की इस बीमारी को आमतौर पर  मोटापे के खतरे से जोड़कर देखा जाता है। यानी जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है उनमें फैटी लिवर रोग का खतरा अधिक हो सकता है।

अब सवाल ये है कि अगर किसी का शरीर दुबला है, वजन सामान्य है और पेट भी बाहर नहीं निकला है, तो क्या उसे फैटी लिवर का खतरा नहीं है? 
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लिवर की बीमारियों का खतरा - फोटो : Adobe Stock
फैटी लिवर का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर माना जाता है कि दुबले-पतले लोगों में फैटी लिवर का खतरा नहीं होगा लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। लिवर में चर्बी जमा होने का संबंध केवल मोटापे से नहीं है। सामान्य वजन वाले लोगों में भी फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। मेडिकल की भाषा में इसे लीन फैटी लिवर कहा जाता रहा है। 
 
  • अमेरिकन गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, फैटी लिवर वाले करीब 7 से 20 प्रतिशत लोगों का शरीर दुबला हो सकता है। 
  • भारत में भी सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले लोगों में फैटी लिवर पाया गया है। इसलिए सिर्फ शरीर देखकर लिवर को स्वस्थ मान लेना सही नहीं है।
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कम वजन वालों में फैटी लिवर डिजीज - फोटो : Freepik.com
दुबले-पतले लोगों में इसका खतरा

लिवर में चर्बी जमा होने के पीछे सिर्फ शरीर मोटापा जिम्मेदार नहीं होता। कुछ दुबले लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस, पेट के अंदर जमा आंतरिक चर्बी, डायबिटीज, ट्राइग्लिसराइड या कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी इसका खतरा बढ़ा सकती हैं।
 
  • इसके अलावा आनुवंशिक कारण, शराब का सेवन, कुछ दवाएं और लिवर की दूसरी बीमारियां भी इसकी वजह बन सकती हैं। इसलिए दुबले-पतले लोगों को फैटी लिवर से सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

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लिवर की समस्याओं का जोखिम - फोटो : Adobe Stock
इन खतरों को भी जानिए

सामान्य बीएमआई  का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि शरीर में चर्बी सही जगह पर है। कुछ लोगों में बाहर से शरीर दुबला दिख सकता है, लेकिन पेट के आसपास या शरीर के अंदर ज्यादा चर्बी जमा हो सकती है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड जैसे मेटाबोलिक जोखिम भी फैटी लिवर का कारण बन सकते हैं। इसलिए दुबले-पतले लोगों को भी इनकी समय-समय पर जांच जरूर कराते रहना चाहिए।
 
  • फैटी लिवर की शुरुआत अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के होती है। जांच के दौरान अगर एंजाइम बार-बार बढ़े हुए मिल रहे हैं, डायबिटीज या दूसरी मेटाबोलिक समस्या है तो अपने जोखिमों के बारे में जानने के लिए जांच जरूर कराएं। 
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लिवर को कैसे हेल्दी रखें - फोटो : adobe stock images
दुबले हैं तो फैटी लिवर से कैसे बचें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फैटी लिवर से बचाव का मतलब केवल वजन कम करना नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड चीजों से दूरी बहुत जरूरी है।
 
  • फैटी लिवर से बचाव के लिए डायबिटीज, रक्तचाप व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है। अगर जांच में फैटी लिवर की पुष्टि हो चुकी है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिवर की स्थिति और फाइब्रोसिस के जोखिम की जांच करानी चाहिए।
  • समय पर लाइफस्टाइल-खानपान में बदलाव के अलावा दवाओं की मदद से फैटी लिवर के खतरे को कम किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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