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Health Tips: क्या आप भी स्क्रीन एडिक्टेड है? जानें इसके लक्षण और इससे बचाव के उपाय

Sat, 26 Jul 2025 06:13 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Screen Addiction Symptoms: स्क्रीन एडिक्शन एक बेहद आम समस्या जिससे बहुत से लोग परेशान हैं। ये आदत दिखने में एक सामान्य आदत लग सकता है, लेकिन यह धीरे-धीरे हमारे जीवन में कई चीजों को प्रभावित करता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में सब कुछ जानते हैं।
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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik
Screen Addiction Solutions: आज के दौर में स्मार्टफोन, टैबलेट, कंप्यूटर और टेलीविजन जैसे गैजेट्स हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुके हैं। काम से लेकर मनोरंजन तक, हर क्षेत्र में इनकी भूमिका बढ़ती जा रही है, खासकर कोरोना महामारी के बाद 'वर्क फ्रॉम होम' और 'ऑनलाइन लर्निंग' ने स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय को और बढ़ा दिया है। हालांकि, इन गैजेट्स के कई फायदे हैं, लेकिन इनका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग धीरे-धीरे एक नई समस्या को जन्म दे रहा है जिसे 'स्क्रीन एडिक्शन' कहते हैं।

यह डिजिटल उपकरणों के उपयोग की एक लत है, जिसमें व्यक्ति नकारात्मक परिणामों के बावजूद स्क्रीन से दूर नहीं रह पाता। यह लत बच्चों, किशोरों और वयस्कों सहित हर आयु वर्ग को प्रभावित कर रही है। ध्यान देने वाली बात यह है कि बहुत से लोगों को ये मालूम भी नहीं है कि वो स्क्रीन एडिक्टेड हैं। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि स्क्रीन एडिक्शन के लक्षण क्या हैं और इससे बचाव के लिए क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं।
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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik
स्क्रीन एडिक्शन के लक्षणों को पहचानना पहला कदम है। ये लक्षण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से दिख सकते हैं। सबसे पहला व्यक्ति स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय को कंट्रोल नहीं कर पाता और जब स्क्रीन उपलब्ध न हो तो बेचैनी या चिड़चिड़ापन महसूस करता है। दूसरा काम, पढ़ाई या घर के कामों की जगह स्क्रीन टाइम को प्राथमिकता देना शुरू कर देता है।

तीसरा व्यक्ति असली दुनिया के बजाय डिजिटल बातचीत को पसंद करता है, जिससे परिवार और दोस्तों से दूरी बढ़ने लगती है। चौथा लगातार आंखों में खिंचाव, सिरदर्द, गर्दन या पीठ में दर्द और नींद में खलल (अनिद्रा) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पांचवा स्क्रीन का इस्तेमाल न कर पाने पर चिंता, उदासी या खालीपन महसूस होना।

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स्क्रीन एडिक्शन से होने वाले नुकसान
स्क्रीन एडिक्शन सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि यह कई गंभीर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है-
  • लगातार एक ही जगह बैठे रहने से मोटापा बढ़ता है, और खराब पोस्चर से गर्दन व पीठ दर्द की समस्या होती है। आंखों की रोशनी प्रभावित होती है और 'कार्पल टनल सिंड्रोम' जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं।
  • चिंता, अवसाद और आत्म-सम्मान में कमी (सोशल मीडिया पर तुलना के कारण) का जोखिम बढ़ जाता है। एकाग्रता की कमी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है।
  • वास्तविक जीवन के रिश्ते कमजोर पड़ते हैं, संचार कौशल बिगड़ता है, और व्यक्ति अकेलापन महसूस कर सकता है। काम या पढ़ाई में प्रदर्शन में गिरावट आती है।
  • स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी नींद हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन में बाधा डालती है, जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

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स्क्रीन एडिक्शन से बचाव के उपाय
स्क्रीन एडिक्शन से बचने और स्वस्थ डिजिटल आदतें अपनाने के लिए कुछ प्रभावी उपाय हैं-

समय सीमा निर्धारित करें
स्क्रीन उपयोग के लिए विशिष्ट समय सीमा तय करें। भोजन के दौरान, सोने से पहले या परिवार के साथ समय बिताते समय गैजेट्स से दूर रहें। ऐप्स की मदद से भी उपयोग पर नज़र रख सकते हैं।

विकल्प तलाशें
अपनी रुचि के अनुसार अन्य गतिविधियों में शामिल हों जैसे किताबें पढ़ना, खेलकूद, कला, या प्रकृति में समय बिताना। दोस्तों और परिवार के साथ आमने-सामने का समय बिताएँ।

डिजिटल डिटॉक्स
समय-समय पर सभी डिजिटल उपकरणों से पूरी तरह से डिस्कनेक्ट करें। कुछ घंटों या पूरे दिन के लिए गैजेट्स से दूर रहें।

सोच-समझकर उपयोग
जब भी आप अपना फोन उठाएं, तो खुद से पूछें कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। क्या यह किसी खास काम के लिए है या सिर्फ आदत के कारण? यदि आप माता-पिता हैं, तो बच्चों के सामने अपने स्क्रीन टाइम को सीमित करके एक अच्छा उदाहरण पेश करें।
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ध्यान रखें-
स्क्रीन आज हमारी जरूरत हैं, लेकिन उनका विवेकपूर्ण उपयोग ही हमें स्वस्थ रख सकता है। स्क्रीन एडिक्शन एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन लक्षणों को पहचानकर और प्रभावी बचाव के उपायों को अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। एक संतुलित डिजिटल जीवन समग्र कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है। यदि आपको लगता है कि स्क्रीन एडिक्शन आपकी या आपके किसी परिचित की दैनिक जीवन पर गंभीर रूप से असर डाल रहा है, तो किसी काउंसलर या थेरेपिस्ट जैसे पेशेवर की मदद लेने में संकोच न करें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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