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Cervical Cancer: देश में 10 करोड़ से अधिक महिलाओं की हुई सर्वाइकल कैंसर जांच, जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

Sat, 26 Jul 2025 02:30 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं के लिए एक गंभीर चुनौती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 10.18 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर के लिए जांच की गई है। आइए इस लेख में इसके लक्षण और बचाव के तरीकों को विस्तार से जानते हैं।
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सर्वाइकल कैंसर - फोटो : Freepik.com
Cervical Cancer Prevention: सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। यह विश्व स्तर पर महिलाओं में होने वाले कैंसर में चौथा सबसे आम प्रकार है। इसकी गंभीरता को देखते हुए, भारत सरकार आयुष्मान आरोग्य मंदिर और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग अभियान चला रही है। हाल ही में, ANI की रिपोर्ट के अनुसार, इन योजनाओं के तहत देश भर में 10.18 करोड़ से अधिक महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर के लिए जांच की गई है।

यह आंकड़ा इस बीमारी के व्यापक प्रसार और इसकी शुरुआती पहचान के महत्व को रेखांकित करता है। कैंसर के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि सर्वाइकल कैंसर क्या है? इसके लक्षण क्या हैं साथ ही इसके बचाव के तरीके क्या हो सकते हैं?
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सर्वाइकल कैंसर - फोटो : Freepik.com
क्या है सर्वाइकल कैंसर?
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर है, जो गर्भाशय के निचले हिस्से में विकसित होता है और योनि से जुड़ता है। इस कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण है। यह एक यौन संचारित संक्रमण है, जिसका मतलब है कि यह यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। हालांकि, हर एचपीवी संक्रमण कैंसर का कारण नहीं बनता।

शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अक्सर वायरस से लड़कर उसे खत्म कर देती है, लेकिन कुछ उच्च जोखिम वाले एचपीवी प्रकार यदि शरीर में लंबे समय तक बने रहें, तो वे गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव ला सकते हैं, जो धीरे-धीरे कैंसर में बदल जाते हैं। इस प्रक्रिया में आमतौर पर कई साल लगते हैं, जिससे शुरुआती लक्षण दिखने में समय लग सकता है।

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सर्वाइकल कैंसर के लक्षण - फोटो : Freepik.com
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती चरणों में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। हालांकि जब लक्षण प्रकट होते हैं, तो उन पर ध्यान देना जरूरी होता है-

असामान्य योनि से रक्तस्राव
मासिक धर्म के बीच रक्तस्राव, यौन संबंध के बाद रक्तस्राव, या मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद रक्तस्राव। यह सबसे आम चेतावनी संकेत है।

असामान्य योनि स्राव
योनि से असामान्य, पानी जैसा, खून से सना हुआ, या दुर्गंध स्राव आना भी सर्वाइकल कैंसर का संकेत हो सकता है।

पेल्विक दर्द
पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में दर्द होना, खासकर यौन संबंध के दौरान उस एरिया में दर्द होना सर्वाइकल कैंसर का संकेत हो सकता है।।

ये सामान्य लक्षण हैं, इसके अलावा जब कैंसर फैलने लगता है तो पेशाब या शौच के दौरान दर्द, पैरों में सूजन, वजन घटना, भूख न लगना, थकान जैसे लक्षण दिख सकते हैं। यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण लगातार महसूस होता है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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सर्वाइकल कैंसर से निदान - फोटो : Freepik.com
सर्वाइकल कैंसर से निदान और इलाज
सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये कैंसर या कोशिकाओं के असामान्य विकास का पता लगाने में मदद करते हैं। यदि कोई लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर पुष्टि के लिए एचपीवी डीएनए टेस्ट करवाने की सलाह भी दे सकते हैं।

सर्वाइकल कैंसर का उपचार कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे कैंसर किस स्टेज पर है या मरीज को कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या तो नहीं है। इन्हीं के आधार पर सर्जरी, रेडिएशन (विकिरण) या कीमोथेरेपी जैसी उपचार तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

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डॉक्टर - फोटो : Freepik.com
महिलाएं जरूर बरतें ये सावधानियां
देखा जाए तो सर्वाइकल कैंसर एक बड़ा खतरा है, इसलिए सभी महिलाओं के लिए इससे बचाव के तरीके जानना बहुत जरूरी है। एचपीवी वैक्सीन इस कैंसर के जोखिम को काफी कम कर सकती है। इसके अलावा, यौन संबंध के दौरान सफाई और सुरक्षात्मक उपायों का खास ध्यान रखें। कंडोम का उपयोग करना सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को बहुत हद तक कम कर सकता है। यदि आप धूम्रपान करती हैं, तो इसे तुरंत बंद कर दें, क्योंकि इससे सर्वाइकल कैंसर के साथ-साथ कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

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स्रोत और संदर्भ
Cervical cancer

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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