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अमेरिका में मशीन लर्निंग एल्गोरिथम से पता लगाया आत्महत्या के प्रयासों का स्तर, सुसाइड की दरों में आ सकेगी कमी

Mon, 15 Mar 2021 08:50 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आत्महत्या के प्रयास की इन भविष्यवाणियों पर चुपचाप काम किया जा रहा था - फोटो : अमर उजाला

एक मशीन लर्निंग एल्गोरिथम, जो आत्महत्या के प्रयास की भविष्यवाणी करता है, हाल ही में इसका वेंडरबिल्ट मेडिकल सेंटर में परीक्षण किया गया, यह वही संस्था है, जहां इसे विकसित किया गया था। अप्रैल 2020 में समाप्त होने वाले इस अध्ययन पर लगातार 11 महीनों से, आत्महत्या के प्रयास की इन भविष्यवाणियों पर चुपचाप काम किया जा रहा था क्योंकि वयस्क रोगियों को वेंडरबिल्ट विश्वविद्यालय मेडिकल सेंटर में देखा गया था। अगली स्लाइड्स से जानिए शोध से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी। 

 

 

 

 

 

 

 

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आत्महत्या के प्रयास और विचार की संभावनाओं पर काम करता है - फोटो : Social media

इस तरह करता है काम-
इस एल्गोरिथ्म से वेंडरबिल्ट सुसाइड अटैंप्ट और आइडिएशन लाइकलीहूड मॉडल को डब किया गया जो कि आत्महत्या के प्रयास और विचार की संभावनाओं पर काम करता है। इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड से आत्मघाती विचारों की विस्तृत रूप में नियमित जानकारी लेकर यह मॉडल आत्महत्या के प्रयास के 30 दिन के भीतर के जोखिम की गणना करता है।

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प्रतिवर्ष एक लाख लोगों में 14 लोग आत्महत्या करते हैं - फोटो : social media

अमेरिका की स्थिति चिंताजनक है
अमेरिका में एक विशेष पीढ़ी में आत्महत्या की संख्या चिंताजनक है। प्रतिवर्ष एक लाख लोगों में 14 लोग आत्महत्या करते हैं, यही कारण है कि इस देश में मौतों का यह दसवां सबसे प्रचलित कारण बन चुका है। कुल आत्महत्याओं में 8.5 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। यही वजह है कि कॉलिन वॉल्श, एमडी, एमए और सहकर्मियों ने इस  एल्गोरिदम के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया और जेएमए नेटवर्क ओपन में अध्ययन की सूचना दी। 

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सभी मामलों में आधे लोगों के दिमाग में आत्महत्या के विचार थे - फोटो : सोशल मीडिया

एक-तिहाई लोग आत्महत्या करना चाहते थे
एल्गोरिथ्म द्वारा निकाले गए जोखिम स्कोर के अनुसार आठ समूहों में वयस्क रोगियों को अलग करने पर, शीर्ष परत में ही लगभग एक तिहाई से अधिक लोग आत्महत्या के लिए तैयार थे,लगभग सभी मामलों में आधे लोगों के दिमाग में आत्महत्या के विचार थे। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड में लिखित साक्ष्य के रूप में यह दर्ज किया गया है कि उच्च जोखिम वाले समूह में 23 व्यक्तियों में से एक में आत्मघाती विचारों की रिपोर्ट की और 271 में से एक ने आत्महत्या का प्रयास किया।

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उनके लिए जोखिम न हो इसलिए उनकी स्क्रीनिंग नहीं हो सकती - फोटो : अमर उजाला

हर मरीज की स्क्रीनिंग संभव नहीं है
बायोमेडिकल इंफॉर्मेटिक्स, मेडिसिन और साइकियाट्री के सहायक प्रोफेसर वाल्श ने कहा, "आज मेडिकल सेंटर में हम हर मरीज को आत्महत्या के जोखिम में नहीं डाल सकते हैं और न ही हमें यह करना चाहिए।" "लेकिन हम जानते हैं कि कुछ व्यक्ति ऐसे भी हैं जिनमें वे  कारक हैं लेकिन उनके लिए जोखिम न हो इसलिए उनकी स्क्रीनिंग नहीं हो सकती। यह जोखिम मॉडल उस स्क्रीनिंग पर एक पहला पास है और सुझाव दे सकता है कि कौन से रोगियों को ऐसी सेटिंग्स में स्क्रीन करना है जहां आत्महत्या की अक्सर चर्चा नहीं होती है।"

 

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85 ने कम से कम एक बार आत्महत्या का प्रयास किया था - फोटो : social media
78,000 व्यस्क रोगियों पर हुआ परीक्षण
11 महीने के परीक्षण के दौरान, कुछ 78,000 वयस्क रोगियों को वीयूएमसी में अस्पताल, आपातकालीन कक्ष और सर्जिकल क्लीनिक में देखा गया। जैसा कि बाद में ईएचआर में प्रलेखित किया गया था, इस समूह में 395 व्यक्तियों ने आत्महत्या के विचार और 85 ने कम से कम एक बार आत्महत्या का प्रयास किया था और  23 दोहरा प्रयास करना चाहते थे। वाल्श ने कहा, "यहां  271 लोगों की उच्च जोखिम वाले समूह में पहचान की गई, जिसमें से एक इलाज के लिए भी लौटा।" यह संख्या असामान्य कोलेस्ट्रॉल और कैंसर जैसी समस्याओं की स्क्रीनिंग के लिए आवश्यक संख्याओं के बराबर है।  
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