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विशेषज्ञ से जानें: कोरोना से ठीक होने के बाद आंखें लाल और रोशनी कम होने के क्या कारण हैं?

Thu, 09 Sep 2021 09:12 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आंखें लाल और रोशनी कम होना - फोटो : iStock
देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में उतार-चढ़ाव जारी है। कई राज्यों में केस लगभग खत्म हो गए हैं तो कई राज्यों में तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें केरल और महाराष्ट्र भी शामिल हैं। इन राज्यों में संक्रमण के मामले क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं, इसपर दिल्ली स्थित सीजीएचएस के सीएमओ डॉ. अरविंद कुमार कहते हैं, 'कोविड को नियंत्रित करने के लिए बेसिक (बुनियादी) चीजें हैं, मास्क, सैनिटाइजर और दूरी। लेकिन कहीं न कहीं इन दोनों राज्यों में इसकी अनदेखी हो रही है। इसलिए ही लोग वहां संक्रमित हो रहे हैं। इसके लिए जरूरी है कि अगर कोरोना कंट्रोल (नियंत्रित) नहीं हो रहा है तो नियम और सख्त करें। जैसा कि दिल्ली और यूपी में मास्क न लगाने पर फाइन (जुर्माना) का प्रावधान किया गया है।' हालांकि देश में अब तक 71 करोड़ से अधिक कोरोना के टीके लगाए जा चुके हैं, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन फिर भी खतरा तो बरकरार है ही। ऐसे में आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना से ठीक होने के बाद आंखे लाल रहती हैं और रोशनी भी कम हो रही है, क्या कारण है? 
  • डॉ. अरविंद कुमार कहते हैं, 'कोरोना से ठीक होने के बाद अगर शुगर की बीमारी हो गई है या पहले से थी तो इसमें भी आंख लाल और रोशनी कम होने लगती है। इसके लिए बहुत जरूरी है कि शरीर में शुगर लेवल कम करें। अगर रोशनी कम हो रही है तो एक बार आंख के डॉक्टर के यहां रेटिना भी चेक करा सकते हैं।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या वैक्सीन लगवाने के बाद अगर शारीरिक श्रम आदि करते हैं तो कुछ नुकसान हैं? 
  • डॉ. अरविंद कुमार कहते हैं, 'वैक्सीन लगवाने के बाद अपना व्यक्तिगत कार्य सामान्य रूप से किया जा सकता है। घर या ऑफिस का काम भी कर सकते हैं। हां, थोड़ा हैवीवेट उठाने या भारी काम करना, उस दिन टाल सकते हैं। वैसे तो कई लोगों को वैक्सीन लगवाने के बाद बुखार या दर्द तक नहीं होता है। इसलिए इससे बहुत ज्यादा कुछ समस्या नहीं है।' 

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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
किन वैरिएंट के ऊपर वैक्सीन कितनी प्रभावी है? 
  • डॉ. अरविंद कुमार कहते हैं, 'हमारी स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन और कोविशील्ड दोनों ही डेल्टा वैरिएंट पर प्रभावी मानी जा रही हैं। अगर कोई और वैरिएंट आता है, तो वैज्ञानिक जरूरी वैक्सीन को उसके खिलाफ बनाएंगे। लेकिन अभी लोग इन चक्करों में न पड़ें, वैक्सीन लगवा लें।' 
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निपाह वायरस पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
निपाह वायरस कितना खतरनाक हो सकता है? 
  • डॉ. अरविंद कुमार कहते हैं, 'निपाह वायरस बैट (चमगादड़) और पिग (सुअर) से फैलता है। ये वायरस जानवरों से इंसान और इंसानों से इंसानों में भी फैलता है। अगर चमगादड़ किसी फल आदि को खा लेते हैं, उस फल को खाने से भी वायरस का संक्रमण हो सकता है। इस वायरस में सीवियरटी रेट (गंभीरता की दर) ज्यादा है। हालांकि इसे लेकर सरकार सतर्क है और टीम नजर बनाए हुए है।' 
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निपाह और कोरोना वायरस पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या निपाह और कोरोना वायरस के लक्षण एक समान हैं? 
  • डॉ. अरविंद कुमार कहते हैं, 'जी हां, दोनों ही वायरस एक तरह से रेस्पिरेटरी वायरस हैं और लक्षण भी एकसमान हैं। बुखार, शरीर दर्द, सिर दर्द आदि होते हैं। इसमें अंतर जांच करके या पता लगाकर कि किसी जानवर के संपर्क में आए थे या नहीं, फिर जांच जरूरी है।' 
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