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मानसून का समय: डायबिटीज रोगियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत, इन बातों का रखें विशेष ध्यान

Sat, 10 Jul 2021 02:40 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मानसून में डायबिटीज रोगियों के लिए खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)


दुनियाभर में साल दर साल डायबिटीज रोगियों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तेजी से बढ़ते इस रोग पर चिंता जताते हुए इसके नियत्रंण और रोकथाम को लेकर विशेष जागरूक रहने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिससे पीड़ित व्यक्ति कई तरह के संक्रमण और गंभीर बीमारियों के प्रति 
अतिसंवेदनशील हो जाता है। यही कारण है कि मधुमेह रोगियों को विशेष सावधानी बरतने के साथ ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। इतना ही नहीं ऐसे रोगियों के लिए बदलते मौसमों के आधार पर सेहत का ख्याल रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
देश में इस समय मानसून का मौसम चल रहा है। इस मौसम के साथ आने वाली आर्द्रता और नमी को भी विशेषज्ञ डायबिटीज रोगियों की सेहत के लिए प्रतिकूल मानते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मानसून के समय में ऐसे रोगियों को कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। इस संबंध में की गई लापरवाही तमाम तरह की मुसीबतों को जन्म दे सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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आरामदायक जूते पहनें - फोटो : getty images
फुटवियर के चुनाव पर ध्यान दें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर नसों और वाहिकाओं सहित शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। मधुमेह के रोगियों में अक्सर पैर से संबंधित समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। पैर की उंगलियों का काला हो जाना या अक्सर सुन्न हो जाना, इसके सामान्य लक्षण हैं। इन समस्याओं से सुरक्षित रहने के लिए ऐसे रोगियों को हमेशा आरामदायक फुटवियर पहन कर रखने चाहिए। ऐसे जूतों या चप्पलों को प्रयोग करें जो त्वचा के लिए सहज हों। मानसून के समय में विशेषकर पैरों को नमी से बचाकर रखने के उपायों को जरूर प्रयोग में लाएं।
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पैर की उंगलियां का रखें विशेष ख्याल - फोटो : Social media
पैर और पैर की उंगलियों का व्यायाम करें
लंबे समय तक जूतों को पहनकर रखने से पैर की उंगलियां आपस में चिपक जाती हैं, यह स्थिति आपको काफी असहज महसूस करा सकती है। इसके अलावा चूंकि डायबिटीज के कारण पैर की नसें प्रभावित हो जाती हैं जिसका उंगलियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इन समस्याओं से बचे रहने के लिए पैर और पैर की उंगलियों का व्यायाम करें। ऐसा करने से पैरों में रक्त का संचार बना रहता है। रक्त के संचार को बढ़ाने के लिए समय-समय पर पैरों की मालिश भी कर सकते हैं।

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डायबिटीज उपयुक्त आहार का सेवन करें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करें
मीठे और अधिक फैट बढ़ाने वाली चीजों के सेवन से मानसून के समय में डायबिटीज के रोगियों को परहेज करना चाहिए। उन चीजों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें जो इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक हों। मधुमेह रोगियों को अपने दैनिक आहार में कम दो फल (जूस नहीं) और तीन सब्जियों का सेवन जरूर करना चाहिए। अच्छी ऊर्जा और बेहतर स्वास्थ्य के लिए यह बहुत आवश्यक माना जाता है। नियमित रूप से ब्लड शुगर के स्तर की जांच करते रहना आवश्यक माना जाता है।
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उचित मात्रा में ही भोजन करें - फोटो : iStock
बहुत अधिक मात्रा में भोजन करने से बचें
मानसून के समय में खराब मौसम के कारण शारीरिक गतिविधियां स्वाभाविक रूप से कम हो जाती हैं, इसलिए डायबिटीज के रोगियों को अतिरिक्त कैलोरी के सेवन से भी बचना चाहिए। जब आपको लगे कि आप थोड़ा और खा सकते हैं, वहीं रुक जाएं। ऐसा करने से भोजन का पाचन आसानी से हो सकता है। खाने के बाद कुछ देर वॉक जरूर करें, बाहर न जा सकें तो घर में ही टहल लें। रात के खाने के तुरंत बाद न सोएं, बेहतर है कि जल्दी भोजन करें एक से दो घंटे के बाद ही सोने के लिए जाएं।
इन उपायों को प्रयोग में लाकर आप ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ने से रोक सकते हैं।

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नोट: यह लेख डॉ. परवेश मलिक के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ. परवेश एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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