वैश्विक स्तर पर बढ़ते कोरोना के खतरे से हर कोई परेशान है। कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने लोगों की चिंताओं को कई गुना तक बढ़ा दिया है। भारत के संदर्भ में बात करें तो कोरोना का यह वैरिएंट देश में संक्रमण की तीसरी लहर का कारण बना हुआ है, विशेषज्ञों को मानना है कि इसका कम्युनिटी स्तर पर प्रसार हो चुका है जिसके चलते सभी लोगों को लगातार विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण हो चुका है, उनमें लॉन्ग कोविड का खतरा भी बना हुआ है, मतलब यदि आप कोरोना से ठीक चुके हैं तो भी खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।
पोस्ट कोविड या लॉन्ग कोविड का मतलब संक्रमण के बाद भी शरीर में बनी रहने वाली कुछ समस्याएं होती हैं। आमतौर पर कोविड-19 से ठीक होने के करीब 3 महीने तक ऐसे लक्षण हो सकते, कुछ लोगों में लक्षण और लंबे समय तक भी बने रह सकते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि कोविड-19 का दीर्घकालिक प्रभाव किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है, ऐसे में लोगों को कोरोना से ठीक होने के बाद भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। आइए आगे की स्लाइडों में लॉन्ग कोविड सिंड्रोम के बारे में विस्तार से जानते हैं।