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Poonam Pandey: सर्वाइकल कैंसर जागरूकता के लिए फैलाई मौत की झूठी खबर, जानिए इस कैंसर से बचाव के कारगर तरीके

Sat, 03 Feb 2024 05:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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poonam pandey - फोटो : instagram
एक्ट्रेस और मॉडल पूनम पांडे की शुक्रवार को 'मौत' की खबर ने सभी को चौंका दिया। हालांकि अगले ही दिन सोशल मीडिया पर सामने आकर पूनम ने स्वयं कहा, 'मैं जिंदा हूं'। उन्होंने कहा, सर्वाइकल कैंसर से मैं तो जीवित हूं लेकिन दुखद बात यह है कि इसने उन हजारों महिलाओं की जान ले ली है जिन्हें इस बीमारी से सामना करने के बारे में सही जानकारी नहीं थी। कुछ अन्य कैंसरों के विपरीत, सर्वाइकल कैंसर पूरी तरह से रोकथाम योग्य है। एचपीवी वैक्सीनेशन और इसका शीघ्र पता लगाने वाले परीक्षणों के माध्यम से जान बचाई जा सकती है। 

पूनम पांडे ने अपनी मौत की खबर, सर्वाइकल कैंसर को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए फैलाई थी।
 

एचपीवी टीकाकरण और समय पर लक्षणों की पहचान, रोग का निदान होने से संक्रमण के बढ़ने और कैंसर का रूप लेने से रोकने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं कि सर्वाइकल कैंसर से बचाने में कारगर पाई गई एचपीवी वैक्सीन किस तरह से काम करती है और इस कैंसर की रोकथाम के लिए और क्या उपाय किए जा सकते हैं?
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सर्वाइकल कैंसर का खतरा - फोटो : Agency (File Photo)
सर्वाइल कैंसर से बचा सकती है एचपीवी वैक्सीन

सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स में होने वाला गंभीर प्रकार का कैंसर माना जाता है। सर्विक्स गर्भाशय का सबसे निचला भाग होता है, जो योनि से जुड़ता है। इस कैंसर के अधिकतर मामले ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के संक्रमण के कारण होते हैं। एचपीवी एक आम वायरस है, जो संभोग के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। यौन रूप से सक्रिय कम से कम आधे लोगों को अपने जीवन में कभी न कभी एचपीवी संक्रमण हो सकता है हालांकि हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इस संक्रमण को कम कर देती है।

एचपीवी वैक्सीन न सिर्फ संक्रमण से बचाने में कारगर हो सकती है साथ ही इससे कैंसर होने का खतरा भी कम किया जा सकता है।
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सर्वाइकल कैंसर का टीका (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : Pixabay
कैसे काम करती है ये वैक्सीन?

वायरल संक्रमण से बचाने वाले अन्य टीकों की ही तरह, एचपीवी वैक्सीन भी शरीर को एंटीबॉडी का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करती है, जो भविष्य में एचपीवी संक्रमण होने की स्थिति में शरीर को तुरंत इससे मुकाबले के लिए एक्टिव करने में मदद कर सकती है। वैक्सीन से शरीर में बनी प्रतिरक्षा, कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोकने और संक्रमण के प्रसार को कम करने में भी मददगार हो सकती है।

वर्तमान एचपीवी के टीके वायरस जैसे कणों (वीएलपी) पर आधारित हैं। 

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एचपीवी टीकाकरण - फोटो : iStock
कौन करा सकता है टीकाकरण?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीनेशन को सबसे कारगर तरीका माना जाता है। टीके 90% से अधिक एचपीवी संक्रमण और कैंसर को कम करने में मददगार पाए गए हैं। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के सुझावों के मुताबिक 9 साल की उम्र से ये टीके दिए जा सकते हैं। सभी प्री-टीन्स को एचपीवी टीके दिए जाने चाहिए  ताकि वे एचपीवी संक्रमण से सुरक्षित रहें जो बाद में जीवन में कैंसर से भी बचाव कर सकें। डॉक्टर से मिलकर टीकाकरण के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
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एचपीवी वैक्सीनेशन - फोटो : istock
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान

कैंसर विशेषज्ञ कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर को रोकने में मदद के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीजें जो आप कर सकते हैं, वे हैं एचपीवी के खिलाफ टीका लगवाना, नियमित स्क्रीनिंग परीक्षण करवाना और समय-समय पर डॉक्टरी सलाह लेते रहना। कुछ और उपाय आपमें इसके खतरे को कम करने में मददगार हो सकते हैं।

सर्वाइकल कैंसर को रोकने में मदद के लिए कुछ अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।
  • किशोरावस्था के दौरान संभोग से बचें।
  • ज्यादा यौन पार्टनर न रखें, इससे भी संक्रमण और कैंसर का खतरा हो सकता है।
  • सुरक्षित यौन संबंध रखना जरूरी है।
  • धूम्रपान से भी इसका खतरा हो सकता है, सभी लोगों को धूम्रपान से दूरी बनाकर रखना जरूरी है।  

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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