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Poonam Pandey: मॉडल पूनम पांडे की सर्वाइकल कैंसर से 'मौत' की अफवाह, जानिए इस कैंसर के बारे में विस्तार से

Fri, 02 Feb 2024 06:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पूनम पांडे की मौत - फोटो : twitter
एक्ट्रेस और मॉडल पूनम पांडे के निधन की खबर शुक्रवार को उन्हीं के इंस्टाग्राम हैंडल से पोस्ट हुई हालांकि 24 घंटे बाद वे खुद सामने आईं और खुलासा किया कि यह उनका पब्लिसिटी स्टंट था। सर्वाइकल कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए उन्होंने ऐसा किया।

दुनियाभर में सर्वाइकल कैंसर और इसके कारण मौत के मामले पिछले कुछ दशकों में काफी तेजी से बढ़ते देखे गए हैं। भारत में, सर्वाइकल कैंसर 18.3% (123,907 मामले) की दर के साथ तीसरा सबसे आम कैंसर है। रिपोर्ट के अनुसार 9.1% की मृत्यु दर के साथ ये महिलाओं में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण भी है।

सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए अंतरिम बजट 2024-25 में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में सर्वाइक कैंसर वैक्सीनेशन (एचपीवी) को बढ़ाने की घोषणा की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर के जोखिमों को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। आइए इस गंभीर कैंसर के बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।
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सर्वाइकल कैंसर का खतरा - फोटो : Agency (File Photo)
सर्वाइकल कैंसर के बारे में जानिए

सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स में होने वाला गंभीर प्रकार का कैंसर माना जाता है। सर्विक्स गर्भाशय का सबसे निचला भाग होता है, जो योनि से जुड़ता है। सर्वाइकल कैंसर के अधिकतर मामले ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के संक्रमण के कारण होते हैं। एचपीवी एक आम वायरस है, जो संभोग के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। यौन रूप से सक्रिय कम से कम आधे लोगों को अपने जीवन में कभी न कभी एचपीवी संक्रमण हो सकता है हालांकि हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इस संक्रमण को कम कर देती है।

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महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के लक्षण - फोटो : iStock
सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों के बारे में जानिए

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि 35 से 44 वर्ष की आयु के लोगों में सर्वाइकल कैंसर का सबसे अधिक निदान होता है। हालांकि स्क्रीनिंग और एचपीवी वैक्सीन के कारण इस दर में गिरावट आ रही है। सभी लोगों को इसके लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की सलाह दी जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती चरणों में लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते हैं, यही कारण है कि अधिकतर महिलाओं को इसके गंभीर चरणों तक कैंसर का पता ही नहीं चल पाता है। हालांकि कुछ लक्षणों पर ध्यान देते रहना सभी के लिए जरूरी माना जाता है।
  • मासिक धर्म के बीच में, सेक्स के बाद असामान्य रक्तस्राव।
  • योनि से स्राव जो सामान्य से अलग दिखता या गंध देता है।
  • पेल्विक हिस्से में अक्सर दर्द बने रहना। 
  • बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता और पेशाब के दौरान दर्द होना।

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देता है, तो जांच के लिए अपने डॉक्टर से मिलें। 
 

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सर्वाइकल कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
सर्वाइकल कैंसर का इन लोगों में खतरा अधिक

कई प्रकार के जोखिम कारक आपमें सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं, इनपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देते रहने और बचाव की आवश्यकता होती है। एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा खतरा है। कुछ अन्य कारक भी आपके जोखिमों को बढ़ा सकते हैं।
  • धूम्रपान-मोटापा
  • सर्वाइकल कैंसर की फैमिली हिस्ट्री
  • फलों और सब्जियों में कम सेवन
  • गर्भनिरोधक गोलियां लेना
  • 17 वर्ष से कम उम्र में गर्भवती होना।
भले ही आपमें इनमें से एक या अधिक कारक हों, फिर भी आपको सर्वाइकल कैंसर होना तय नहीं है। इसकी स्क्रीनिंग के लिए डॉक्टर से मिलना और सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
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सर्वाइकल कैंसर का टीका (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : Pixabay
एचपीवी वैक्सीनेशन है बचाव का तरीका

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीनेशन को सबसे कारगर तरीका माना जाता है। बजट 2024-25 में वित्तमंत्री ने देश में वैक्सीनेशन की दर को बढ़ाने का ऐलान किया है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इस घातक प्रकार के कैंसर से सुरक्षित रखा जा सके। अध्ययनकर्ताओं ने बताया, एचपीवी वैक्सीनेशन सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती है। टीके 90% से अधिक एचपीवी संक्रमण और कैंसर को कम करने में मददगार पाए गए हैं। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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