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सेहत की बात: खांसने-छींकने पर होता है सीने में दर्द? ये फेफड़ों में संक्रमण तो नहीं, जानिए इसके लक्षण और बचाव

Thu, 15 Dec 2022 06:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खांसते समय होने वाला दर्द - फोटो : iStock
सर्दियों के इस मौसम में जुकाम-खांसी होना काफी सामान्य है, आमतौर पर यह सामान्य घरेलू उपचार और दवाइयों के माध्यम से ठीक भी हो जाती है। पर क्या आपको खांसते-छींकते समय छाती के आसपास दर्द बना रहता है? अगर हां तो इस तरह की स्थिति के बारे में सावधान हो जाइए। इस तरह के दर्द को नजरअंदाज कर देना गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकता है। अगर आपको पिछले कुछ समय से यह दिक्कत बनी हुई है तो समय रहते डॉक्टर से संपर्क करके इसकी जांच करा लें। इसे सीने में संक्रमण के कारण होने वाली दिक्कत भी माना जाता है।

खांसते-छींकते समय होने वाले दर्द को प्लुरिसी नामक मेडिकल कंडिशन के रूप में जाना जाता है, इस स्थिति में दर्द धीरे-धीरे कंधे और पीठ तक फैलने लग जाता है। प्लूरिसी, प्लूरा में होने वाले इंफ्लामेशन की समस्या है। प्लूरा, आपके फेफड़ों के बाहर लिपटी एक पतली झिल्ली नुमा ऊतक है जो फेफड़ों की सुरक्षा करती है।

इसमें होने वाली समस्या पर ध्यान न देना आपके स्वास्थ्य जटिलताओं को बढ़ाने वाली हो सकती है। आइए इस समस्या के लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।
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छाती में दर्द की समस्या - फोटो : iStock
इस तरह के लक्षणों को लेकर बरतें सावधानी

प्लुरिसी की समस्या और सीने में होने वाले सामान्य दर्द के बीच अक्सर अंतर कर पाना कठिन होता है। हालांकि इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि प्लुरिसी का दर्द सांस लेने, खांसने या छींकने पर बढ़ जाता है। कुछ लोगों में यह सांस की तकलीफ का भी कारण बन सकती है। इसके कारण बुखार और कफ आने की भी दिक्कत हो सकती है।

यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, इसलिए सभी को विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
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प्लुरिसी के बारे में जानिए - फोटो : istock
प्लुरिसी की समस्या क्यों होती है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कई ऐसी स्थितियां हैं जो प्लुरिसी का कारण बन सकती है, ऐसे में इसकी सही जानकारी और बचाव के बारे में जानना बहुत आवश्यक है। वायरल संक्रमण जैसे फ्लू (इन्फ्लूएंजा), बैक्टीरियल संक्रमण जैसे निमोनिया, ऑटोइम्यून विकार, टीबी आदि के कारण इस तरह की समस्याओं का जोखिम अधिक होता है। रिब फ्रैक्चर या सीने में चोट और दवाइयों के दुष्प्रभावों के कारण भी इस तरह की दिक्कतों के विकसित होने का जोखिम देखा गया है।

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फेफड़ों की समस्या का इलाज - फोटो : iStock
प्लुरिसी को कैसे ठीक किया जाता है?

प्लूरिसी का समय रहते पता चल जाने पर इसका इलाज और इससे संबंधित जटिलताओं को आसानी से कम करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए जांच के आधार पर उन कारणों के बारे में जानने की कोशिश की जाती है जो प्लुरिसी का कारण बनती है। यदि यह बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होने वाली दिक्कत है तो इसमें एंटीबायोटिक दवाओं को प्रयोग में लाया जाता है। दर्द और सूजन के इलाज के लिए आमतौर पर नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) को प्रयोग में लाया जाता है।
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हाथों की साफ-सफाई जरूरी - फोटो : Pexels.com
इन उपायों से कर सकते हैं बचाव

दैनिक जीवन में कुछ बातों का ध्यान रखकर प्लुरिसी के जोखिमों को कम किया जा सकता है। इसके लिए धूम्रपान छोड़ना सबसे आवश्यक है। बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण को रोकने के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। हाथ धोना इसमें आपके लिए विशेष मददगार है। लंबे और गहरे सांस के अभ्यास की आदत फेफड़ों को स्वस्थ रखने और इससे संबंधित बीमारियों के जोखिमों को कम करने में मददगार है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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