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Covid-19: कोरोना का ये वैरिएंट पाया गया 'घातक', सलाह- बचाव के लिए इन चीजों का सेवन तुरंत कर दें कम

Sat, 06 Jan 2024 07:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के खतरनाक वैरिएंट्स - फोटो : Pixabay
वैश्विक स्तर पर पिछले एक महीने में कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ज्यादातर देशों में JN.1 वैरिएंट ही बढ़ते संक्रमण का प्रमुख कारण है, हालांकि इसके अलावा कुछ स्थानों पर ओमिक्रॉन के अन्य वैरिएंट्स जैसे BA.5 के भी मामले दर्ज किए गए हैं।

चीन-सिंगापुर सहित यूके-यूएस में JN.1 वैरिएंट के कारण अस्पतालों में रोगियों की संख्या बढ़ने की भी खबर है, हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नया वैरिएंट अधिक गंभीर रोगकारक नहीं है, इसकी संक्रामकता दर जरूर चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है। 



अध्ययनकर्ता कहते हैं, ओमिक्रॉन और इसके म्यूटेटेड वैरिएंट्स गंभीर रोगों का कारण कम ही बनते हैं। हालांकि ओमिक्रॉन के कुछ वैरिएंट्स के कारण मृत्युदर अधिक जरूर देखी गई थी, अब उनका वैश्विक प्रसार कम है। आइए जानते हैं कि अध्ययनों में ओमिक्रॉन के किस वैरिएंट को अधिक मृत्युदर वाला पाया गया है? और बढ़ते संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या सलाह दे रहे हैं?
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कोरोना के कारण मौत का खतरा - फोटो : iStock
ओमिक्रॉन वैरिएंट्स और मृत्यु का खतरा

अध्ययनकर्ता कहते हैं, सर्दियों का सीजन कोरोनावायरस में म्यूटेशन को बढ़ाने वाला देखा जाता रहा है। पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से दुनियाभर में मुख्यरूप से ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स के कारण ही संक्रमण के मामले बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। ओमिक्रॉन की प्रकृति शुरू से ही अति संक्रामक, पर गंभीरता में कम देखी जा रही है। हालांकि ओमिक्रॉन बीए.5 के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों में मौत के मामले अधिक रिपोर्ट देखे गए थे।

ओमिक्रॉन के अन्य वैरिएंट्स या फ्लू से पीड़ित लोगों की तुलना में इससे (BA.5) से मौत का खतरा अधिक हो सकता है। कुछ देशों में अब भी बीए.5 के केस देखे जा रहे हैं, इसलिए कोरोना की सही जांच और सभी लोगों को इससे बचाव करते रहना जरूरी है। 
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बीए.5 वैरिएंट के कारण होने वाली समस्या - फोटो : istock
बीए.5 वैरिएंट हो सकता है खतरनाक

ओपन फोरम इंफेक्शियस डिजीज में प्रकाशित अध्ययन में साल 202-2022 में अस्पताल में कोविड-19 और इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती इन्फ्लूएंजा रोगियों के अनुपात को देखा गया, जिसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि इस दौरान मरने वाले अधिकतर लोग बीए.5 वैरिएंट से संक्रमित थे।

अध्ययनकर्ता कहते हैं, किसी वैरिएंट की गंभीरता या संक्रामकता उसी समूह के पिछले वैरिएंट्स से अलग हो सकती है, ये मुख्यरूप से म्यूटेशन की प्रकृति पर निर्भर करता है। इन दिनों बढ़ रहा JN.1 वैरिएंट, ओमिक्रॉन के BA.2.86 का म्यूटेटेड वर्जन है। JN.1 में एक अतिरिक्त म्यूटेशन है जो इसकी संक्रामकता को बढ़ाने वाला पाया गया है।

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कोरोना से बचाव के करें उपाय - फोटो : Pixabay
कोरोना से बचाव के लिए क्या करें?

कोरोना के खतरे से किस प्रकार से बचाव किया जा सकता है, इस बारे में शोध कर रही टीम ने बताया कि आपके आहार की इसमें बड़ी भूमिका हो सकती है। यही कारण है कि सभी लोगों को स्वस्थ और पौष्टिक चीजों के सेवन को बढ़ाने पर जोर दिया जाता रहा है।

अध्ययन में पाया गया है कि हाई फैट वाली चीजें प्रतिरक्षा प्रणाली पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं, जिससे कोविड का खतरा बढ़ जाता है। शोध के मुताबिक उच्च वसा वाले आहार प्रतिरक्षा प्रणाली, मस्तिष्क के कार्य और संभावित रूप से कोविड-19 के जोखिमों से जुड़े जीन को प्रभावित करते हैं। 
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हाई फैट डाइट्स हो सकती हैं हानिकारक - फोटो : iStock
उच्च वसा वाले आहार नुकसानदायक

शोधकर्ताओं ने कहा, कोरोना के जोखिमों से बचाव के लिए इम्युनिटी पावर बढ़ाने पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। उच्च वसा वाले आहार का लंबे समय तक सेवन प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव का कारण बन सकता है। शरीर को स्वस्थ रखने, इम्युनिटी पावर को बढ़ाने और कोरोना से बचाव के लिए पौष्टिक आहार के सेवन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। कोरोना के बढ़ते जोखिमों को कम करने के लिए कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर के साथ इम्युनिटी बढ़ाने वाली चीजों का सेवन बहुत आवश्यक है। 


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स्रोत और संदर्भ
Clinical outcomes of U.S. adults hospitalized for COVID-19 and influenza in the Respiratory Virus Hospitalization Surveillance Network, October 2021-September 2022


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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