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Covid-19: क्या गंभीर लॉन्ग कोविड जटिलताओं का कारण बन सकते हैं ओमिक्रॉन वैरिएंट्स? अध्ययन में सामने आई यह जानकारी

Sat, 14 May 2022 02:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण - फोटो : Pixabay
वैश्विक स्तर पर पिछले दो साल से अधिक समय से जारी कोरोना महामारी के कारण स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की समस्याएं देखने को मिलीं। कोरोना के डेल्टा जैसे वैरिएंट्स ने जहां फेफड़े और हृदय की समस्याओं को काफी बढ़ा दिया, वहीं मौजूदा समय में मुसीबतों का कारण बने ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामकता दर चिंता का सबब बनी हुई है। वैसे तो ओमिक्रॉन संक्रमित लोगों में गंभीर रोग के मामले बहुत कम रिपोर्ट किए जा रहे हैं, इसके लक्षण ज्यादातर हल्के-मध्यम स्तर के ही रहते हैं, हालांकि जिस तेजी से यह लोगों को संक्रमित कर रहा है, उसको लेकर विशेषज्ञ सभी विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह देते हैं। कोरोना संक्रमण के कारण होने वाले रोग के साथ-साथ, संक्रमण से ठीक होने के बाद भी बनी रहने वाली समस्याएं शोधकर्ताओं के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं।

हाल में हुए शोध में वैज्ञानिकों ने पाया संक्रमण से ठीक हो चुके 4 में से तीन लोगों में एक साल बाद तक भी लॉन्ग कोविड की समस्या देखी जा रही है। ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो संक्रमण के दौरान गंभीर रोग के शिकार रह चुके थे या जिनमें पहले से ही कोमारबिडिटी की समस्या है।

ऐसे में सवाल उठता है कि चूंकि ओमिक्रॉन वैरिएंट के ज्यादातर मामले हल्के लक्षणों वाले होते हैं, ऐसे में इससे पोस्ट कोविड सिंड्रोम का खतरा कितना अधिक हो सकता है? आइए इस बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।
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लॉन्ग कोविड के बारे में जानिए - फोटो : iStock
ओमिक्रॉन संक्रमितों में लॉन्ग कोविड का खतरा कम

ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण की स्थिति में लॉन्ग कोविड के जोखिम को जानने के लिए हुए शोध और सर्वे के परिणाम थोड़ी राहत देने वाले हैं। शोधकर्ताओं द्वारा जारी किए गए डेटा से संकेत मिलता है कि ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स से संक्रमित रह चुके लोगों में लॉन्ग कोविड का जोखिम कम होता है।

डेल्टा और कोरोना के अन्य वैरिएंट्स के कारण संक्रमितों में जहां पोस्ट कोविड की समस्या छह महीने से एक साल तक बनी देखी जा रही है, वहीं ओमिक्रॉन से संक्रमितों में ज्यादा समय तक यह दिक्कतें नहीं देखने को मिली हैं।
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पोस्ट कोविड की जटिलताएं - फोटो : iStock
डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले जोखिम कम

इसी जोखिम को बारे में जानने के लिए यूके के ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ओएनएस) द्वारा हाल ही में जारी डेटा से पता चलता है कि जिस तरह से डेल्टा वैरिएंट के कारण लोगों में लंबे समय तक लॉन्ग कोविड के लक्षण बने रहते हैं, उसकी तुलना में ओमिक्रॉन संक्रमण की स्थिति में इसका जोखिम 49.7 फीसदी तक कम पाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीन की दो डोज ले चुके लोगों में संक्रमण की गंभीरता और लॉन्ग कोविड के लक्षण, दोनों का खतरा पहले के मुकाबले कम देखा जा रहा है। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह से ओमिक्रॉन के अलग-अलग सब-वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं, ऐसे में इसके खतरे को समझने के लिए अभी विस्तृत शोध की आवश्यकता है।

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कोरोना वैक्सीन से गंभीर मामलों में राहत - फोटो : पीटीआई
वैक्सीनेशन का बड़ा योगदान

ओएनएस के डेटा के अनुसार वैक्सीन की दो डोज ले चुके लोगों में डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण की स्थिति में जहां लॉन्ग कोविड का खतरा 16 फीसदी पाया गया था, वहीं ओमिक्रॉन के मूल स्वरूप BA.1 की स्थिति में यह आंकड़ा घटकर 9 फीसदी ही रह गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर लॉन्ग कोविड को लेकर अब तक के अध्ययन काफी चिंता बढ़ा रहे थे, उनके बीच ओमिक्रॉन संक्रमितों में मिल रहे डेटा से थोड़ी राहत जरूर मिली है।
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लॉन्ग कोविड के खतरे को जानिए - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड को लेकर डब्ल्यूएचओ का अलर्ट

लॉन्ग कोविड के बढ़ते खतरे को लेकर हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने लोगों को सचेत करते हुए इसको लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। डब्ल्यूएचओ ने एक विज्ञप्ति में कहा  कि लॉन्ग कोविड का जोखिम, संक्रमण से ठीक हो जाने के कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों या साल तक भी बना रह सकता है। अगर इन लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान न दिया जाए या समस्या को अनुपचारित ही छोड़ दिया जाए तो इससे गंभीर स्थिति विकसित होने का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है। 
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लॉन्ग कोविड की जटिलताएं - फोटो : Pixabay
थकान की समस्या सबसे आम

ओएनएस डेटा के मुताबिक संक्रमण से ठीक हो चुके ज्यादातर लोगों में लॉन्ग कोविड के रूप में थकान और कमजोरी की समस्या देखने को मिल रही है। यूके में करीब 51 फीसदी कोरोना संक्रमित रह चुके लोगों में थकान की समस्या देखी जा रही है। इसके अलावा कुछ लोगों में एकाग्रता की कमी, अत्यधिक कमजोरी, ब्रेन फॉग, गंध और स्वाद न आने और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित लक्षण रिपोर्ट किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को इस तरह के लक्षणों का अनुभव होता है, उन्हें इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। 


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स्रोत और संदर्भ
Self-reported long COVID after infection with the Omicron variant in the UK

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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