ज्यादा शराब पीने के कारण लिवर खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। अल्कोहल से लिवर को पहुंचने वाले नुकसान के बारे में
आपने भी सुना होगा, लेकिन क्या आपको मालूम है कि लिवर को इतना ही नुकसान मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज से भी पहुंच सकता है? जी हां, नॉन अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिसीज़ आपके लिवर को बिना शराब का सेवन किए भी मुश्किल में डाल सकती है। यह मुख्यतः खान-पान और बिगड़े रूटीन से जुड़ी समस्या होती है जिसका प्रतिशत भारतीय आबादी में भी बढ़ता जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में बदले खान-पान और रूटीन ने कई सारी जीवनशैली सम्बन्धी समस्याओं को बढ़ा दिया है। इसमें डायबिटीज और मोटापा भी शामिल है। शरीर का बढ़ता वजन अपने साथ कई मुसीबतें लेकर आता है। फैटी लिवर की स्थिति भी इसमें शामिल है। पहले यह स्थिति ज्यादातर शराब का सेवन करने वालों में पाई जाती थी। अब इसका खतरा उन लोगों में भी बढ़ता जा रहा है जो बहुत कम या बिल्कुल भी शराब का सेवन नहीं करते। इसी समस्या को नॉन अल्कोहॉलिक फैटी डिजीज़ के तौर पर जाना जाता है। इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में लिवर की कोशिकाओं में फैट इकट्ठा हो जाता है। मोटापा, डायबिटीज, हार्मोनल असंतुलन, हाई कोलेस्ट्रॉल, नींद में कमी, पीसीओडी और खून में ज्यादा मात्रा में ट्राइग्लिसराइड्स का होना आदि, इस बीमारी की आशंका बढ़ा सकता है।