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XEC Covid Variant: कितना खतरनाक है नया वेरिएंट, क्या हैं इसके लक्षण? चार प्वाइंट्स में जानिए सभी जरूरी बातें

Fri, 20 Sep 2024 04:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वेरिएंट के मामले - फोटो : istock
New Covid Variant XEC Details: कोरोनावायरस अपने एक नए वेरिएंट XEC (एक्सईसी) के साथ फिर से लौट आया है। कई यूरोपीय देशों में संक्रमण में मामलों में उछाल दर्ज किया जा रहा है। सैंपल जांच के ज्यादातर रिपोर्ट्स में कोरोना के इस नए एक्सईसी वेरिएंटस की पुष्टि की जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस अपनी प्रकृति के अनुसार जिंदा रहने के लिए लगातार म्यूटेट होते रहते हैं, इसी क्रम में कोरोना में फिर से नए म्यूटेशन देखे जा रहे हैं। इस नए वेरिएंट की प्रकृति को अध्ययनों की शुरुआती रिपोर्ट्स में काफी संक्रामक बताया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, कोरोना वायरस के प्रोटीन में कुछ नए बदलाव देखे गए हैं, जो इसे अब और भी संक्रामक बना रहे हैं। यही कारण है कि जून में सबसे पहले इस नए वेरिएंट की पहचान की गई थी और अब ये देखते ही देखते करीब 27 देशों में फैल गया है। सभी लोगों को एक बार फिर से कोरोना से बचाव के लिए जरूरी उपायों का पालन शुरू कर देना चाहिए।

आइए एक्सईसी वेरिएंट और इसके कारण होने वाली समस्याओं के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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कोरोना का नया वैरिएंट - फोटो : freepik.com
एक्सईसी वेरिएंट बढ़ा रहा है चिंता

गौरतलब है कि जून के महीने में सबसे पहले जर्मनी में XEC वेरिएंट की पहचान की गई थी। अब इसके मामले यूके, यूएस, डेनमार्क और कई अन्य देशों में भी सामने आ रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कोविड का ये वेरिएंट अधिक संक्रामकता वाला हो सकता है।

कैलिफोर्निया स्थित स्क्रिप्स रिसर्च ट्रांसलेशनल इंस्टीट्यूट के निदेशक और वैज्ञानिक डॉ एरिक टोपोल ने कहा, ये नया वेरिएंट निश्चित ही दिक्कतें बढ़ रहा है। अगस्त के महीने में कई यूरोपीय देशों में इस वेरिएंट से संक्रमण की दर बहुत अधिक देखी गई, देश में कोविड केसों के 10 प्रतिशत से अधिक सैंपल में ये नया वेरिएंट पाया गया था। जिस गति से ये बढ़ रहा है वो वास्तव में चिंताजनक है।

आइए चार प्वाइंट्स में एक्सईसी वेरिएंटस के बारे में जानते हैं।
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एक्सईसी वेरिएंटस का खतरा - फोटो : istock
1. हाइब्रेड वेरिएंट है एक्सईसी

एक्सईसी वेरिएंटस अभी नया है इसलिए इसके बारे में ज्यादा नहीं समझा जा सका है। हालांकि शुरुआती अध्ययनों के आधार पर शोधकर्ताओं ने बताया कि एक्सईसी एक हाइब्रिड वेरिएंट है। ये पिछले दो साल से दुनियाभर में प्रमुख रूप से देखे जा रहे ओमिक्रॉन का ही नया सब-वेरिएंट है। इसे पहले के KS.1.1 और KP.3.3 वेरिएंट का संयुक्त रूप माना जा रहा है। दो अलग-अलग वेरिएंट के एक साथ मिलने के कारण संभवत: इसकी संक्रामकता दर अधिक हो सकती है।

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कोरोना का जोखिम - फोटो : istock
2. तेजी से फैल रहा है ये वेरिएंट

रिपोर्ट्स के मुताबिक दो-तीन महीनों के भीतर ही एक्सईसी वेरिएंटस 27 से अधिक देशों में फैल गया है। इसके ज्यादातर मामले मुख्य रूप से यूरोप में रिपोर्ट किए गए हैं। तीन सितंबर तक अमेरिका में एक्सईसी के कारण 23 मामलों की पहचान की गई थी। डेनमार्क-जर्मनी में भी कोरोना के अधिकतर मामलों के लिए इसे ही जिम्मेदार माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि नए वेरिएंट की संक्रामकता दर काफी अधिक हो सकती है। 
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कोरोना के लक्षण - फोटो : istock
3. लक्षणों में कोई खास बदलाव नहीं

अभी तक इस वेरिएंट के कारण बीमारी के लक्षणों में कोई खास बदलाव नहीं सामने आया है। वैज्ञानिक कहते हैं, फिलहाल इसके लक्षण पिछले कोविड वेरिएंट्स के समान ही हैं। ज्यादातर संक्रमितों को बुखार, गले में खराश, नाक बंद होना या बहने, खांसी, गंध न आने, मतली या उल्टी, भूख न लगने और शरीर में दर्द जैसी दिक्कतें हो रही हैं।

विशेषज्ञ कहते हैं, ओमिक्रॉन की प्रकृति गंभीर रोगों वाली नहीं रही है ऐसे में नए वेरिएंट के कारण भी गंभीर जोखिम कम हैं। हालांकि यह कहना बहुत जल्दबाजी है, हमें यह देखने के लिए थोड़ा और डेटा चाहिए कि इसके कारण शरीर पर किस तरह से असर हो रहा है?
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कोविड वैक्सीन - फोटो : istock
4. बचाव के लिए अपडेटेड टीके हो सकते हैं मददगार

वैज्ञानिकों ने कहा, म्यूटेशन के साथ नए वेरिएंट्स में शरीर में बनी प्रतिरक्षा को चकमा देकर संक्रमण फैलाने वाले गुण देखे जाते रहे हैं। हालांकि वैक्सीनेशन अब भी इनसे बचाव का एकमात्र कारगर तरीका है। टीके अभी भी गंभीर मामलों को रोकने में मदद करते हैं, इसलिए कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को एक और बूस्टर शॉट दिया जाना चाहिए है। कोरोना के अपडेटेड टीके उपलब्ध हैं जो ओमिक्रॉन और इसके सब-वेरिएंट्स के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।



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स्रोत और संदर्भ

New COVID variant XEC now in half of states

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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