यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में प्रोफेसर और इस पेपर की लेखिका एलिसन रोजर्स ने कहा, ‘हमारे निष्कर्ष सबूत देते हैं कि एंटीरेट्रोवायलरल थेरेपी के साथ गे पुरुषों में एचआईवी संचरण का खतरा जीरो है।’ हालांकि आठ साल चली इस स्टडी के दौरान 15 आदमी एचआईवी से संक्रमित हुए। डीएनए टेस्टिंग से पता चला कि उन्हें ये संक्रमण इलाज करा रहे अपने पार्टनर से नहीं बल्कि दूसरे किसी शख्स से हुआ, जिसका इलाज नहीं चल रहा था।