दुनिया के कई देशों में कोरोना के नए वैरिएंट्स के मामलों के बढ़ने की खबरें हैं। यूके-यूएस से लेकर सिंगापुर सहित कई अन्य देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स के कारण अस्पतालों में रोगियों की संख्या बढ़ी है। इन वैरिएंट्स के प्रारंभिक अध्ययनों में पाया गया है कि नए वैरिएंट्स के कारण गंभीर रोगों का जोखिम कम है, हालांकि इसकी संक्रामकता दर अधिक हो सकती है जिसके कारण तेजी से संक्रमण बढ़ने का खतरा हो सकता है। सभी लोगों को कोरोना के इन नए वैरिएंट्स से बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महामारी के बाद दुनियाभर में वैक्सीनेशन की दर बढ़ी है, ज्यादातर लोगों में प्राकृतिक संक्रमण से भी कोरोना के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है, जिससे संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोग होने का खतरा कम हो जाता है।
नए वैरिएंट्स के जोखिमों को देखते हुए वैक्सीनों को भी अपडेट किया गया है, जिससे संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। नए वैरिएंट्स से बचाव के लिए क्या हम सभी को फिर से एक बूस्टर वैक्सीन की जरूरत होगी? आइए जानते हैं।