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50 तरह के कैंसर के लिए एकमात्र टेस्ट, शरीर के किस हिस्से में है, यह भी पता चल जाएगा

Sat, 04 Apr 2020 05:16 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मेडिकल साइंस में हमने काफ तरक्की कर ली है और इसमें अक्सर नई-नई रिसर्च होती रहती है। कई सारी रिसर्च के चमत्कारिक परिणाम भी हासिल होते हैं। ऐसी ही एक नई रिसर्च के मुताबिक आने वाले समय में एकमात्र ब्लड टेस्ट से 50 तरह के कैंसर का पता लगाया जा सकेगा। रिसर्च जर्नल एन्नल्स ऑफ ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, इस एकमात्र ब्लड टेस्ट से शुरुआती स्टेज में ही कैंसर का पता लगाया जा सकेगा। बोस्टन के डाना फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता इस रिसर्च पर लगातार काम कर रहे हैं। 
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इस रिसर्च पर काम कर रहे शोधकर्ताओं का कहना है कि शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता लग जाने पर इसका इलाज आसानी से संभव है। यह टेस्ट कैंसर का प्रकार तो बताएगा ही, टेस्ट से यह भी पता चल जाता है कि शरीर के किस हिस्से में कैंसर है। बोस्टन के डाना फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट में इस रिसर्च का ट्रायल हो रहा है। बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ग्रेल इंक ने इस टेस्ट को विकसित किया है। 
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ब्लड टेस्ट - फोटो : demo pics
इस रिसर्च पर काम कर रहे शोधकर्ताओं का कहना है कि शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता लग जाने पर इसका इलाज आसानी से संभव है। यह टेस्ट कैंसर का प्रकार तो बताएगा ही, टेस्ट से यह भी पता चल जाता है कि शरीर के किस हिस्से में कैंसर है। बोस्टन के डाना फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट में इस रिसर्च का ट्रायल हो रहा है। बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ग्रेल इंक ने इस टेस्ट को विकसित किया है। 

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blood test
ग्रेल इंक कंपनी ने इसमें सिक्वेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डीएनए की जांच की, जिनसे जीन की सक्रियता या निष्क्रियता का पता चला। इसमें ट्यूमर डीएनए में जाकर पूरे शरीर में ब्लड की मदद से सर्कुलेट होता है। इस टेस्ट में डीएनए में होने वाले रसायनिक बदलाव का विश्लेषण किया जाता है, जिससे कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में ही चल जाता है। 
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blood test
इस रिसर्च के दौरान कुल 3,052 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए, जिनमें 1,531 लोगों के कैंसर से पीड़ित होने का पता चला। शोधकर्ता डॉ. जेफ्री ऑक्सनार्ड के मुताबिक इस नए टेस्ट से यह भी पता चला कि जहां से कैंसर की शुरुआत हुई है, वे कौन से ऊतक हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस टेस्ट ने पहली स्टेज वाले 18 फीसदी कैंसर मरीजों के बारे में सही जानकारी दी, जबकि चौथी स्टेज के मरीजों के बारे में 93 फीसदी सही जानकारी दी। विशेषज्ञ बताते हैं कि ओ वाले समय में यह चिकित्सा जगत के लिए बहुत मददगार साबित होगी। 
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