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NEET Paper Leak: प्रदर्शन और हंगामा के दौरान एस्फिक्सिएशन का खतरा, थोड़ी सी लापरवाही हो सकती है जानलेवा

Thu, 23 Jul 2026 10:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली समेत कई शहरों में छात्रों के प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आई हैं। ऐसे माहौल में यह जानना बेहद जरूरी है कि एस्फिक्सिएशन क्या है, यह किन कारणों से होता है, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं?
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प्रदर्शन के दौरान होने वाली दिक्कतें - फोटो : Amarujala.com/AI
राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है। बुधवार (22 जुलाई) को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। बुधवार को कनॉट प्लेस में हुई घटना में उपद्रवियों द्वारा पत्थर और बोतलें फेंके जाने से दिल्ली पुलिस का एक अधिकारी घायल हो गया। इससे पहले 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारी भी घायल हुए थे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारी भीड़ और प्रदर्शन के दौरान कई तरह के स्वास्थ्य जोखिम, चोट जैसी घटनाओं का भी खतरा लगातार बना रहता है।  प्रदर्शन और हंगामा के दौरान एस्फिक्सिएशन का जोखिम सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है। 

दुनियाभर में हुई कई भीड़भाड़ वाली घटनाओं और भगदड़ की जांच में यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में मौतें केवल भगदड़ और कुचलने से नहीं, बल्कि एस्फिक्सिएशन के कारण भी होती हैं। एस्फिक्सिएशन वह स्थिति है जिसमें शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। धुआं या जहरीली गैस का संपर्क, गला दबना, भीड़ में छाती पर अत्यधिक दबाव पड़ना के कारण ये समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती रही है। एस्फिक्सिएशन पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये जानलेवा तक भी हो सकती है।
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Cjp Protest in Delhi - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
प्रदर्शनों के दौरान एस्फिक्सिएशन का खतरा

प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस, लोगों में भगदड़, किसी बंद जगह पर भीड़ जमा होने से जोखिम हो सकता है। ऐसे में घबराहट भी सांस की तकलीफ को कई गुना बढ़ा सकती है। यही कारण है कि आपदा प्रबंधन एजेंसियां और मेडिकल विशेषज्ञ बड़े आयोजनों या प्रदर्शनों में भीड़ से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और शुरुआती लक्षण पहचानने की सलाह देते हैं।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस के इस्तेमाल से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में जानकारी दी थी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एस्फिक्सिएशन जैसी आपात स्थिति में सही समय पर उठाया गया एक छोटा-सा कदम किसी की जान बचा सकता है। इसलिए केवल प्रदर्शन में शामिल होने वाले ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद हर व्यक्ति को भी इस मेडिकल इमरजेंसी की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए।
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सांस लेने में कठिनाई - फोटो : Adobe Stock
एस्फिक्सिएशन और इसके जोखिमों को जानिए

भीड़भाड़ वाली घटनाओं में कंप्रेसिव एस्फिक्सिएशन के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते हैं। इसमें व्यक्ति की छाती इतनी दब जाती है कि वह सामान्य रूप से सांस नहीं ले पाता। यदि यह स्थिति कुछ मिनट तक बनी रहे तो मस्तिष्क, हृदय और अन्य अंगों को ऑक्सीजन की कमी होने लगती है।

अचानक भगदड़, पुलिस बैरिकेडिंग, बंद रास्ते, धक्का-मुक्की और घबराहट इस खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। यदि प्रदर्शन के दौरान धुआं, आंसू गैस का इस्तेमाल हो रहा है तो इससे सांस लेने में और कठिनाई हो सकती है। ऐसे में लोगों के लिए एस्फिक्सिएशन के लक्षणों को जानना बहुत जरूरी है
 
  • सांस लेने में कठिनाई
  • तेज-तेज सांस चलना
  • सीने में जकड़न
  • बोलने में परेशानी या बेहोशी
  • होंठ और नाखून नीले पड़ना 
  • चक्कर आना या भ्रम-घबराहट की स्थिति
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सांस न आने पर दें सीपीआर - फोटो : Adobe Stock
किसी को सांस लेने में तकलीफ हो तो क्या करें?

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, भीड़-प्रदर्शन के दौरान यदि कोई बोल नहीं पा रहा, सांस लेने में दिक्कत हो या बेहोश हो गया है, तो यह मेडिकल इमरजेंसी है और तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।
 
  • सबसे पहले व्यक्ति को भीड़ वाली जगह से सुरक्षित खुले स्थान पर ले जाएं।
  • कपड़ों को ढीला करें।
  • यदि व्यक्ति सांस ले रहा है, तो उसे आरामदायक स्थिति में बैठाएं या रिकवरी पोजीशन में रखें।
  • यदि सांस नहीं ले रहा है तो सीपीआर शुरू करें। 
  • बिना जरूरत पानी या कोई दवा मुंह से न दें, खासकर यदि व्यक्ति बेहोश है।
  • तुरंत स्थानीय एंबुलेंस की मदद लें और मरीज को अस्पताल पहुंचाएं। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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