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नाना पाटेकर कार्डियक अरेस्ट: सीपीआर देने के बाद भी क्यों नहीं बच सकी जान? डॉक्टर से जानिए जरूरी बातें

Thu, 08 Oct 2026 02:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Nana Patekar Death Cause: सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एक आपातकालीन जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जो कार्डियक अरेस्ट के दौरान शरीर में रक्त का संचार बहाल करने में मदद करती है। जानिए सीपीआर कब देना चाहिए, इसके क्या फायदे हैं और सीपीआर के बाद भी कुछ लोगों को क्यों नहीं बचाया जा पाता?
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जीवनरक्षक सीपीआर - फोटो : Amarujala.com/AI
गुरुवार (8 अक्तूबर) की सुबह देशवासियों के लिए बुरी खबर लेकर आई। मशहूर बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का सुबह 5:20 पर 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट हुआ था। खबरों के मुताबिक उनके सहयोगियों ने कार्डियक अरेस्ट के लक्षणों को देखते हुए करीब 45 मिनट तक कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) दी, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

आमतौर पर दिल की गंभीर स्थितियों जैसे हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञ सीपीआर देने की सलाह देते हैं। पर यहां सवाल ये है कि नाना को सीपीआर देने के बावजूद भी क्यों नहीं बचाया जा सका? क्या सीपीआर वास्तव में जीवन बचाने का तरीका है?
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हार्ट की गंभीर समस्याओं का खतरा - फोटो : Adobe stock Images
क्या कहते हैं डॉक्टर?

सीपीआर और इससे जान बचने की संभावनाओं को समझने के लिए हमने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रवि.एस गर्ग से बातचीत की। डॉ. बताते हैं, सीपीआर निश्चित ही दिल की गंभीर स्थितियों में जान बचाने वाली प्रक्रिया है, पर ये भी समझना होगा कि ये बस सहायक उपचार है। सीपीआर को रुक चुके खून के संचार को फिर से बहाल करने में मददगार तरीका माना जाता है, पर इसके साथ भी कई चीजों का ध्यान रखना जरूरी है- जैसे मरीज को ये कितनी देर बाद दिया गया और क्या इसका तरीका सही था?

नाना पाटेकर के मामले में विस्तृत रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि उनकी जान क्यों नहीं बच सकी? 
 
  • सीपीआर जीवनरक्षक तकनीक है, जो दिल के काम न करने या पल्स न आने की स्थिति में रक्त और ऑक्सीजन के प्रवाह को सभी अंगों तक बनाए रखने में मदद करती है।
  • सही समय पर दिया गया सीपीआर व्यक्ति की जान बचाने की संभावना को 2-3 गुना तक बढ़ा सकता है।
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सीपीआर से क्या होता है? - फोटो : Adobe Stock
पहले सीपीआर को समझना जरूरी

सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन। 
  • कार्डियो- दिल या हार्ट।
  • पल्मोनरी- फेफड़े या सांस की गति।
  • रिससिटेशन- दोबारा से शुरू करना।

डॉक्टर बताते हैं, हर बार बेहोशी की स्थिति में मरीज को सीपीआर देने की जरूरत नहीं होती है। कई बार बेहोशी का कारण लो बीपी, लो शुगर, एंग्जाइटी जैसी कई अन्य वजहें भी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में सीपीआर की जरूरत नहीं होती है। सबसे पहले चेक करें कि मरीज सिर्फ बेहोश है या फिर उसे अरेस्ट हुआ है?
 
  • इसका पता लगाने के लिए मरीज के कंधों को हिलाकर उससे पूछें कि- आप ठीक हैं या नहीं? अगर मरीज का शुगर, बीपी लो है या एंग्जाइटी है तो वो दबी आवाज में कुछ जवाब देगा।
  • अगर कुछ रिस्पांड नहीं कर रहा हो तो उसकी पल्स और सांसों की जांच करें। अगर मरीज का पल्स और सांसें दोनों नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में सीपीआर दिया जाना चाहिए।

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सीपीआर देने का सही तरीका जान लीजिए - फोटो : Amarujala.com
सीपीआर देने का तरीका भी करता है मैटर

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार सीपीआर में हाथों की मदद से छाती को पंप किया जाता है, जिससे हार्ट पर दबाव पड़े और रक्त का संचार बन सके। 

यह भी समझना जरूरी है कि कई बार कार्डियक अरेस्ट के मामलों में दिल की सामान्य रिदम बहाल करने के लिए ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (एईडी) की जरूरत हो सकती है। इसलिए कार्डियक की स्थिति में जल्द से जल्द मेडिकल सहायता और एंबुलेंस को बुलाना, सीपीआर शुरू करना और उपलब्ध होने पर एईडी का इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है।

सीपीआर देने का तरीका सही नहीं है तो इससे कोई लाभ नहीं होता।
 
  • सबसे पहले रोगी के कपड़े और बेल्ट ढीला कर दें।
  • सीपीआर देते समय हमेशा हाथों को सीधा रखें, कोहनी मुड़नी नहीं चाहिए। जिससे दिल पर आवश्यक दबाव पहुंच सके।
  • एक मिनट में कम से कम 100-120 बार पंप करें। 
  • इसके साथ मरीज की सांस और नाड़ी को चेक करते रहे और बार-बार सीपीआर देते रहें, जब तक कि धड़कन चलने न लगे या उसे तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल में न पहुंचा दिया जाए।
  • अक्सर लोगों को लगता है दिल तो बाईं तरफ होता है तो सीपीआर भी बाईं तरफ देना है, हालांकि ऐसा नहीं है आपको छाती के बीचों-बीच दबाव डालना है। 
  • सीपीआर सही तरीके से दिया जा रहा है या नहीं इसका पता लगाने की तरीका ये है कि हमेशा दबाव सीपीआर देने वाले को अपने हिप ज्वाइंट्स पर महसूस होना चाहिए न कि कलाई या कोहनी पर।
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सीपीआर से जान बचने की संभावना - फोटो : Adobe Stock
क्या सीपीआर जान बचाने की गारंटी है?

डॉक्टर कहते हैं, सीपीआर जान बचाने की गारंटी नहीं है, इसे सहायक उपचार के तौर पर प्रयोग में लाया जाता है। इसका उद्देश्य व्यक्ति के बचने की संभावना को बढ़ाना है।

कार्डिक अरेस्ट के बाद जान बचने की संभावना कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इनमें कार्डियक अरेस्ट का कारण, सीपीआर कितनी जल्दी शुरू हुआ और मरीज अस्पताल तक कितने समय पर पहुंच पाया ये भी जरूरी है।  समय रहते सीपीआर न मिलने की तुलना में तुरंत और सही सीपीआर मरीज को जीवित बचने का बेहतर मौका दे सकता है। 

कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थितियों में हर सेकंड मायने रखता है। सही समय पर की गई आपकी कार्रवाई किसी व्यक्ति को अस्पताल तक जीवित पहुंचने का मौका दे सकती है।
 
  • अस्पताल के बाहर कार्डियक अरेस्ट का शिकार होने वाले लगभग 90-92% लोग बच नहीं पाते हैं, यानी सर्वाइवल रेट सिर्फ 8% से 10% होती है।
  • अस्पताल के अंदर कार्डियक अरेस्ट से बचने की दर थोड़ी ज्यादा देखी जाची रही है क्योंकि मरीज को तुरंत इलाज मिल जाता है। ऐसे मामलों में मृत्यु दर लगभग 70-75% होती है। यहां  सर्वाइवल रेट सिर्फ 25% तक हो सकती है।



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स्रोत: 
CPR Fact Sheet

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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