फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Nairobi Infection: कई राज्यों में 'विदेशी मक्खी' के हमले से हड़कंप, त्वचा संक्रमण से लेकर अंधेपन तक का बन सकती है कारण

Fri, 08 Jul 2022 04:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
नैरोबी संक्रमण के जोखिम को जानिए - फोटो : istock
पश्चिम बंगाल, सिक्किम से लेकर बिहार तक, देश के कई राज्यों में 'एसिड फ्लाई' संक्रमितों के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। सिक्किम के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में सौ से अधिक छात्रों में हाल ही में सामने आए संक्रमण के बाद अब बिहार में भी इससे प्रभावितों के मामले देखे जा रहे हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए लोगों से बचाव के उपाय करते रहने की अपील की जा रही है।

दार्जिलिंग के जिलाधिकारी ने लोगों से बचाव के उपायों को लेकर अपील करते हुए कहा कि सभी लोग पूरी बाजू के कपड़े पहनें, शाम को बाहर निकलने से बचें और मच्छरदानी का प्रयोग करें। संक्रमण होने पर लोगों को तुरंत इलाज के लिए जाने के सुझाव दिए गए हैं। 

जिस मक्खी के कारण इस समस्या के मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं, वह मुख्यरूप से पूर्वी अफ्रीका के हिस्सों में पाई जाती रही है, इसे 'नैरोबी मक्खी' के नाम से जाना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह मानव शरीर पर पेडेरिन नामक एक विषैला और अम्लीय पदार्थ छोड़ती है, जिससे त्वचा में गंभीर संक्रमण हो सकते हैं। पेडेरिन के कारण त्वचा में आग जैसी तेज जलन की समस्या भी हो सकती है। अब तक दक्षिणी सुडान में इसके मामले अधिक देखने को मिलते रहे हैं। आइए नैरोबी संक्रमण के बारे में विस्तार से समझते हैं।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
नैरोबी मक्खी के कारण होता है संक्रमण (सांकेतिक) - फोटो : istock
नैरोबी मक्खियों के कारण होता है संक्रमण

नैरोबी संक्रमण, नैरोबी मक्खियों के कारण होने वाली समस्या है। ये मक्खियां आकार में छोटी, नारंगी और काले रंग की होती हैं। ये मक्खियां तेज प्रकाश और नम क्षेत्रों से आकर्षित होती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, नैरोबी मक्खियां न तो काटती हैं न ही डंक मारती हैं। इंसानी त्वचा पर बैठने भर से इनमें मौजूद अम्लीय पदार्थ त्वचा पर आ जाता है जिसके कारण जलन और संक्रमण की स्थिति हो सकती है। 
विज्ञापन

3 of 5
संक्रमण में त्वचा के गंभीर समस्याओं का जोखिम - फोटो : iStock
इसके लक्षणों के बारे में जानिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नैरोबी मक्खियों के भीतर सहजीवी बैक्टीरिया मौजूद होते हैं जो पेडेरिन नामक अम्लीय पदार्थ को निर्मित करते हैं। इन कीड़ों द्वारा छोड़ा गया द्रव त्वचा पर असामान्य जलन, सूजन या घाव पैदा कर सकता है। मक्खियों के त्वचा से संपर्क में आने के 24 से 48 घंटे में ही त्वचा पर पीले रंग के तरल पदार्थ से भरे फफोले भी हो जाते हैं। समय रहते संक्रमण का पता लगाकर इसका इलाज कराना आवश्यक होता है। कुछ स्थितियों में यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन सकते हैं।

4 of 5
आंखों को भी प्रभावित कर सकता है संक्रमण - फोटो : Pixabay
जा सकती है आंखों की रोशनी

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि यदि इंसान की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है और विषाक्त पेडेरिन ज्यादा असर कर रहा है तो इस स्थिति में त्वचा के संक्रमण के साथ बुखार, तंत्रिकाओं की समस्या, जोड़ों में दर्द और उल्टी जैसी दिक्कत भी हो सकती है। यदि विषाक्त पदार्थ व्यक्ति की आंखों के संपर्क में आते हैं, तो यह आंखों में गंभीर संक्रमण और अति गंभीर स्थितियों में अंधेपन का कारण भी बन सकता है। यही कारण है कि सभी लोगों को इस खतरे को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
नैरोबी संक्रमण से बचाव जरूरी - फोटो : iStock
नैरोबी संक्रमण से बचाव कैसे करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, नैरोबी संक्रमण के जोखिम और इसकी गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों के लिए इससे बचाव के तरीकों के बारे में जानना आवश्यक है। यह मक्खियां तेज रोशनी और नम क्षेत्रों में अधिक पाई जाती हैं, चूंकि इस समय मानसून देश के ज्यादातर हिस्सों में सक्रिय है ऐसे में मध्यम प्रकाश रखें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें जिससे त्वचा से इनके संपर्क को कम किया जा सके। आंखों को अनावश्यक रूप से छूने से बचें। मक्खियों के संपर्क में आने के कुछ ही देर में इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं, इसे ध्यान में रखते हुए तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। त्वचा में खुजली, चकत्ते या दाने हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। घबराएं नहीं, समय पर इलाज मिलने से स्थिति की गंभीरता को कम किया जा सकता है।  


---------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें