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चिंताजनक: खतरनाक वायरस का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है चीन, 100 से अधिक वायरस की पहचान; एक और महामारी का अलर्ट

Sun, 08 Sep 2024 12:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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100 से अधिक वायरस का चला पता - फोटो : Istock
कोरोना महामारी की शुरुआत से वायरस के प्रसार को लेकर चीन दुनियाभर की नजरों में बना हुआ है। कई मीडिया रिपोर्ट्स दावा करते रहे हैं कि सार्स-सीओवी 2 (नोवेल कोरोनावायरस) चीन से ही फैला था। अब एक बार फिर चीन से डराने वाली जानकारी सामने आ रही है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में चीन के फर फार्मों में सैकड़ों ऐसे वायरस की पहचान की गई है जो इंसानों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने फर फार्मों से जानवरों में करीब 125 प्रकार के वायरस की पहचान की है, जिनमें 36 वायरस बिल्कुल नए हैं और इससे वैज्ञानिक भी अनजान हैं। 39 प्रकार के वायरस को जानवरों के साथ और मनुष्यों को संक्रमित करने और गंभीर रोगों के लिए उच्च जोखिम वाला पाया गया है।

चीनी शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के आधार पर वायरोलॉजिस्ट एडवर्ड होम्स ने वायरस की निगरानी बढ़ाने की तत्काल आवश्यकताओं पर जोर दिया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इन वायरस का प्रसार होता है तो ये वैश्विक स्तर पर बड़ी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। कोरोनावारस के बाद अब एक बार फिर से चीन दुनियाभर के निशाने पर आ गया है।
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फार्मों में पाए गए खतरनाक वायरस - फोटो : एएनआई (फाइल)
कई नए प्रकार के वायरस का पता चला

नेचर जर्नल में प्रकाशित इस शोध में 2021 से 2024 तक करीब 461 जानवरों की जांच की गई, जिनमें पालतू और जंगली जानवर भी शामिल थे। वैज्ञानिकों ने बताया कि फार्मों में पता लगाए गए वायरस में हेपेटाइटिस ई, जापानी इंसेफेलाइटिस और 13 नए प्रकार के वायरस शामिल हैं।

वायरोलॉजिस्ट एडवर्ड होम्स ने खतरनाक वायरस के प्रसार में फर फार्मों की भूमिका पर चिंता व्यक्त करते हुए इस उद्योग को तुरंत बंद करने की सलाह दी है। होम्स ने कहा, भविष्य में प्रकोप को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। 
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वायरल संक्रमण का जोखिम - फोटो : freepik.com
खतरनाक वायरस का हो रहा है प्रसार

अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार जिन वायरस की पहचान की गई है उनमें पिपिस्ट्रेलस बैट एचकेयू5-लाइक वायरस जो पहले चमगादड़ों में पाया जाता था, अब मिंक में भी पाया गया है। यह मिडिल ईस्ट रेस्पोरेटरी सिंड्रोम (एमईआरएस) कोरोनावायरस से मिलता जुलता है, जो मनुष्यों के लिए घातक साबित हो सकता है। होम्स ने चेतावनी दी कि चमगादड़ों से मिंक में इसका संक्रमण एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। अगर समय रहते प्रभावी उपाय न किए गए तो हमें कोरोना से भी खतरनाक संक्रमण की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। 

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चमगादड़ों से भी फैल सकता है नया वायरस - फोटो : freepik.com
क्या कहती है रिपोर्ट?

अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि फर फार्म जानवरों और मनुष्यों के बीच वायरस के संचरण का सुविधाजनक माध्यम बना सकते हैं। शोधकर्ताओं ने गिनी पिग, मिंक और मस्कट जैसे जानवरों में बर्ड फ्लू वायरस के साथ-साथ सात प्रकार के कोरोनावायरस का पता लगाया, हालांकि उनमें से कोई भी सार्स-सीओवी 2 से संबंधित नहीं था। वैज्ञानिक रैकून प्रजाति के कुत्तों और मिंक को सबसे संभावित खतरनाक वायरस के संचरण का माध्यम मान रहे हैं।
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महामारी का खतरा - फोटो : istock
अगले वैश्विक प्रकोप का हो सकता है जोखिम

गौरतलब है कि डेनमार्क ने 2020 में कोविड-19 की चिंताओं के कारण पूरी मिंक आबादी को खत्म कर दिया था, लेकिन बाद में मिंक फार्मिंग फिर से शुरू कर दी गई। होम्स और अन्य विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि फर फार्म अगले वैश्विक प्रकोप को जन्म दे सकते हैं। वैश्विक स्तर पर इस चेतावनी को गंभीरता से लेने और फर फार्मिंग से उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए नीतियों को लागू करना जरूरी है वरना दुनियाभर को भविष्य में कई तरह की महामारियों का सामना करना पड़ सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Farmed fur animals harbour viruses with zoonotic spillover potential


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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