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Monkey Fever: कर्नाटक में बढ़ रहे हैं मंकी फीवर के मामले, जानिए क्या है ये बीमारी, कैसे करें बचाव?

Sun, 04 Feb 2024 08:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केरल में ‘मंकी फीवर’ की दस्तक - फोटो : self
कोरोना के नए वैरिएंट्स से संक्रमण के जोखिमों के बीच देश के कई राज्यों में इन दिनों मंकी फीवर के मामलों के बढ़ने की भी खबर है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया, पिछले 15 दिनों में कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में इस संक्रामक रोग के मामले तेजी से बढ़े हैं। 31 संक्रमितों में से 12 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं जबकि बाकी का इलाज घर पर ही किया जा रहा है। सभी की हालत स्थिर है और अब तक कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है। मंकी फीवर का पहला मामला 16 जनवरी को सामने आया था। 

मंकीफीवर को क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज ((केएफडी) के नाम से भी जाना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, जानवरों से इंसानों में इस रोग के प्रसार का खतरा हो सकता है। बंदरों के शरीर में पाए जाने वाले टिक्स (किलनी) के काटने से इसके इंसानों में फैलने का खतरा रहता है। भारत के कुछ हिस्सों, विशेष रूप से कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा में इस रोग के मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं।
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मंकी फीवर का खतरा - फोटो : iStock
क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज के बारे में जानिए

केएफडी या मंकी फीवर, मनुष्यों के लिए घातक भी हो सकती है। समय के साथ इसके लक्षणों के बिगड़ने का खतरा हो सकता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है। इस संक्रामक रोग के कारण अचानक बुखार आने, गंभीर सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकान जैसे लक्षणों का खतरा हो सकता है।

बीमारी बढ़ने के साथ उल्टी और दस्त जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षणों का भी खतरा हो सकता है। 
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मंकी फीवर के गंभीर लक्षण - फोटो : Pixabay
गंभीर भी हो सकते हैं इसके लक्षण

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मंकी फीवर के गंभीर मामलों में, नाक से खून आने और मसूड़ों से रक्तस्राव जैसी रक्तस्रावी समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है। कुछ लोगों में कंपकंपी, चलने में असामान्यताएं और मानसिक भ्रम जैसी न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं उन्नत हो सकती हैं। मंकी फीवर की समस्या में त्वरित उपचार और लक्षणों का शीघ्र पता लगाना महत्वपूर्ण है।
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संक्रमितों का इलाज - फोटो : pexels
मंकी फीवर का इलाज और बचाव

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि केएफडी के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, लेकिन लक्षणों का पता लगाकर संबंधित समस्याओं के जोखिमों को कम करने के लिए प्रारंभिक उपचार दिए जाते हैं। रक्तस्रावी विकार के लक्षण वाले रोगियों को अस्पाताल में भर्ती होने और खूब पानी पीते रहने की सलाह दी जाती है।  

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों के लिए मंकी फीवर से बचाव करते रहना जरूरी है। केएफडी के लिए टीके मौजूद हैं, इससे संक्रमण से बचाव और बीमारी के गंभीर रूप लेने का खतरा कम हो सकता है। अगर आप प्रभावित इलाकों में रहते हैं तो टिक्स के काटने से बचने के लिए सुरक्षात्मक कपड़े पहनना सुरक्षित तरीका हो सकता है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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