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Mini Workouts: नहीं मिलता है व्यायाम के लिए समय तो करें ये मिनी वर्कआउट, सेहत रहेगी दुरुस्त

Wed, 30 Nov 2022 08:00 AM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फिटनेस का अच्छा विकल्प हैं ये वर्कआउट - फोटो : istock
स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए रोजाना व्यायाम जरूरी है। व्यायाम न केवल शरीर को सेहतमंद बनाए रखने में मदद करता है बल्कि कई बीमारियों से बचाव में भी सहायक होता है। इसमें सबसे बड़ी चुनौती होती है नियमित व्यायाम के रूटीन को बनाये रखने की। नियमित व्यायाम के फ़ायदे तो कई हैं लेकिन व्यायाम की नियमितता कई बार दफ्तर तो कई बार घर के कामों के चक्कर में टूटने लगती है। कई बार लापरवाही और उदासीनता भी व्यायाम की नियमितता को भंग कर देती है। तो ऐसे में क्या किया जाए?  क्योंकि एक्सरसाइज है तो जरूरी।  

इस स्थिति में मिनी वर्कआउट बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। ये व्यायाम में निरंतरता बनाए रखने में मदद तो करते ही हैं, आपकी ओवरऑल फिटनेस को भी बनाये रखते हैं। इसके लिए बहुत अधिक समय देने की जरूरत भी नहीं होती, कम समय में आप सेहतमंद बने रहने का तरीका अपना सकते हैं। साथ ही इससे आपका काम और रूटीन भी अधिक प्रभावित नहीं होता। जानिए क्या है मिनी वर्कआउट और कैसे कर सकते हैं इसे रूटीन में शामिल। 
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काम के साथ भी एक्सरसाइज - फोटो : Pixabay
सहजता से रूटीन में ढलने वाला वर्कआउट

शोध यह साबित कर चुके हैं कि एक्सरसाइज का कोई भी रेग्युलर रूटीन सेहत को फायदा ही देता है। मिनी वर्कआउट इसका एक शानदार उदाहरण हैं। खासतौर पर उन लोगों के लिए जो रोजाना आधा-पौन घंटा वर्कआउट के लिए नहीं निकाल सकते। मिनी वर्कआउट टुकड़ों में बंटे एक्सरसाइज के सेशंस होते हैं जो दिनभर में कभी भी अपने हिसाब से अपनाये जा सकते हैं। ये लगातार किये जाने आए वर्कआउट जितने ही प्रभावी भी होते हैं और सबसे अच्छी बात यह कि इससे शरीर और मन की एकरसता टूटती है, जिससे सेहत पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। 
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सभी प्रकार के वर्कआउट करें मिक्स - फोटो : pixabay
मिक्स करने से मिलेंगे अच्छे परिणाम 

छोटे छोटे वर्कआउट के सेशन का मतलब है एक्सरसाइज को टुकड़ों में बांटकर करना। जैसे लगातार आधा या एक घंटा एक्सरसाइज करने या जिम में बिताने की बजाय 10 मिनिट का डांस या एरोबिक्स का सेशन, 5 मिनिट डीप ब्रीदिंग, 10 मिनिट्स तेज चलना, 10 मिनिट सीढ़ियां चढ़ना, 5-5 पुशअप्स या सिटअप्स मारना या 10 मिनिट्स साइकल चला लेना, आदि। मिनी वर्कआउट को इसी तरह मिक्स भी करना चाहिए कि इनमें स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से लेकर, स्ट्रेचिंग और कार्डियो आदि सब कुछ शामिल हो जाए।

उदाहरण के लिए घर के काम करते समय या बच्चों को स्कूल बस तक छोड़ने-लेने जाते समय ब्रिस्क वॉक, स्पॉट जॉगिंग आदि का उपयोग, दफ्तर में सीट पर बैठे-बैठे डीप ब्रीदिंग करना या शाम को बच्चों के साथ 10 मिनिट का एक डांस का सेशन करना, आदि। आप चाहें तो इसमें वेट उठाने, जुम्बा, एरोबिक्स या अन्य कार्डियो ट्रेनिंग को भी शामिल कर सकते हैं। आपको दिनभर में कभी भी मात्र 10, 5 मिनिट्स का समय 4-5 बार निकालना है जिसमें आप वर्कआउट कर सकें। 

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कम टाइम के छोटे छोटे वर्कआउट सेशन - फोटो : iStock
कितनी देर का हो सेशन 

मिनी वर्कआउट का एक सेशन10 मिनिट्स का भी काफी है और ये 10 मिनिट्स आसानी से निकाले जा सकते हैं। बल्कि कई बार तो हम 5-10 मिनिट्स ऐसे ही जाया कर देते हैं, बिना कुछ किये। यदि इसका सदुपयोग सेहत को दुरुस्त रखने के लिए किया जाये तो बेहतर है। कुछ एक्सरसाइज के लिए आप 15 मिनिट्स तक दे सकते हैं जैसे कि सूर्य नमस्कार या एरोबिक्स।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक हफ्ते में कम से कम कुल 150 मिनिट्स का वर्कआउट सेहत के लिए बहुत सारे फायदे दे सकता है। यदि आप पहले से जिमिंग या वर्कआउट के लिए आधा-एक घंटे का समय दे रहे थे तो उसे तीन-चार टुकड़ों में बाँट लें। ध्यान बस इतना रखना है कि खराब तबियत में, खाने के तुरंत बाद या पहले और देर रात को वर्कआउट नहीं करना है।
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पूरे शरीर को मिलता लाभ - फोटो : istock
ये हैं फायदे 

मिनी वर्कआउट के कई फायदे हैं जिनमें शामिल हैं-

हर एक्सरसाइज का फायदा:
जब आप जिम में या घर में वर्कआउट का एक लम्बा सेशन करते हैं और उसमें मात्र एक या दो तरह का ही रूटीन नियमित करते हैं तो शरीर धीरे धीरे इसका आदि होने लगता है और इसका असर भी सीमित होने लगता है। मिनी वर्कआउट में मौजूद अलग अलग एक्सरसाइज शरीर के लिए सरप्राइज की तरह होती हैं। हर एक्सरसाइज शरीर को अलग तरह से फायदा पहुंचाती है और इससे शरीर लय में बना रहता है। यह दिमाग के लिए भी एक चैलेन्ज की तरह होता है, जिससे दिमाग की कार्यक्षमता और सुधरती है। 
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दिमाग को ऊर्जा देने में करता है मदद - फोटो : istock
दिमाग के लिए टॉनिक:

फिजिकल एक्सरसाइज का असर दिमाग पर भी होता है, यह एक साबित तथ्य है। मिनी वर्कआउट कई तरह से दिमाग को राहत देने का काम करता है। इससे अन्य एक्सरसाइज वाले फायदे तो मिलते ही हैं, लम्बे वर्कआउट के लिए होने वाला प्रेशर, स्ट्रेस और व्यायाम न कर पाने की गिल्ट से भी छुटकारा मिलता है। शरीर की तरह ही अलग अलग एक्सरसाइज दिमाग को भी सरप्राइज करती हैं और इससे दिमाग को फायदा होता है। साथ ही दिनभर आपका मूड अच्छा रखने, ऊर्जावान और प्रसन्नचित्त बनाये रखने और एकाग्रचित्त बनाये रखने में भी यह मददगार होता है।  
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शरीर का लचीलापन बढ़ाने में सहायक - फोटो : iStock
लचीलापन और स्फूर्ति बढ़ाये 

शरीर की सभी मांसपेशियों और हड्डियों तक मिनी वर्कआउट का लाभ पहुंचता है। चूंकि यह दिनभर में कई बार अपनाई जाने वाली प्रक्रिया होती है, इसलिए इससे शरीर को फुर्तीला बने रहने में मदद मिलती है और मांसपेशियों को लचीला बने रहने में। मिनी वर्कआउट के छोटे छोटे सेगमेंट पूरे शरीर के जोड़ों को खुलने और काम करने का मौका देते हैं।

एक बार यह रूटीन अपनाने पर मात्र 10-15 दिनों के भीतर आपको शरीर में हल्केपन का एहसास होने लगता है। झुकने, मुड़ने, उठने-बैठने में आसानी होने लगती है। स्ट्रेचिंग इस वर्कआउट का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह पूरे शरीर की मजबूती और लचीलेपन को बढ़ाता है। 
 

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ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण में मददगार - फोटो : pixabay
ब्लड प्रेशर और शुगर पर नियंत्रण 

प्री डायबिटिक हों या डायबिटिक या फिर हाई बीपी के मरीज, मिनी वर्कआउट के साथ इन समस्याओं पर नियंत्रण पाना भी आसान हो सकता है। खासकर प्री डायबिटिक लोगों के लिए तो यह बहुत ही फायदेमंद है। इसके अलावा हार्मोन संबंधी अन्य अनियमितताओं जैसे थाइरॉइड, पीसीओएस आदि में भी नियंत्रण के लिए मिनी वर्कआउट को रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि हाई बीपी के मरीजों में 10-10 मिनिट के तीन ब्रिस्क वॉक या एरोबिक एक्सरसाइज के सेशन आधा घंटे लगातार की जाने वाली एक्सरसाइज से ज्यादा अच्छा परिणाम भी दे सकते हैं।  

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तनाव भगाने में कर सकता है मदद - फोटो : iStock
आलस दूर करने और तनाव घटाने में सहायक 

मिनी वर्कआउट को चूंकि दिन में कम से कम तीन-चार बार करना होता है, इसलिए शरीर आलस वाले कम्फर्ट ज़ोन में जाने से बच जाता है। लगातार की जाने वाली एक्सरसाइज की तुलना में इसमें थकावट भी कम होती है और शरीर के मूवमेंट्स में निरंतरता बनी रहती है। यह एक तरह का एक्टिविटी ब्रेक होता है जो तनाव और स्ट्रेस जैसी स्थितियों को घटाने में भी मददगार होता है। इससे आप अपने काम में भी पूरी ऊर्जा के साथ योगदान दे सकते हैं और वर्कआउट को भी एन्जॉय कर सकते हैं।  
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डीप ब्रीदिंग बढ़ाएगी फायदा
इन बातों का भी रखें ध्यान 
 
  • एक्सरसाइज के साथ संतुलित और पौष्टिक भोजन भी एक अहम् कड़ी है। इसे भुलाएं नहीं। 
  • पर्याप्त नींद लेने और पानी पीने की आदत को बरकरार रखें। 
  • यदि आप अधिक वजन घटाना चाहते हैं तो हाई इन्टेन्सिटी वर्कआउट को चुनें और साथ में मिनी वर्कआउट के कुछ सेशन जोड़ लें। 
  • खराब तबियत, असंतुलित शारीरिक स्थिति, किसी सर्जरी आदि की स्थिति में बिना डॉक्टर के परामर्श के एक्सरसाइज शुरू न करें। 
  • ब्रिस्क वॉक, स्पॉट जॉगिंग या डांस जैसी एक्टिविटीज के लिए सही फुटवेयर का चुनाव करें और दफ्तर हो या घर बिना सही फुटवेयर के एक्सरसाइज करने से बचें। 
  • चूंकि मिनी वर्कआउट्स में वार्मअप और कूल डाउन की गुंजाईश नहीं होती इसलिए कोशिश करें कि वर्कआउट की शुरुआत स्पॉट जॉगिंग या ब्रिस्क वॉक से करें। बाद के सेशन में बाकी की एक्सरसाइज शामिल करें। इसी तरह हर सेशन के बाद डीप ब्रीदिंग भी फायदेमंद होगी। 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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